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Showing posts from August, 2025

काफ़िर किसे कहते हैं Who is a Kafir? सही अर्थ

"काफ़िर" अरबी शब्द "कुफ़्र" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "इनकार करना" या "अस्वीकार करना"। इस्लामी संदर्भ में, "काफ़िर" आमतौर पर उस व्यक्ति को कहते हैं जो: 1. **ईश्वर के अस्तित्व को नकारता हो** या अल्लाह की एकता (तौहीद) को स्वीकार नहीं करता। 2. **इस्लाम के मूल सिद्धांतों** (जैसे कुरान, पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं) को अस्वीकार करता हो। 3. **जानबूझकर सत्य को छुपाता हो** या उसका विरोध करता हो। हालांकि, इस शब्द का उपयोग संदर्भ और परिस्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोग इसे गैर-मुस्लिमों के लिए सामान्य रूप से इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस्लामी विद्वानों के अनुसार, इसका सटीक अर्थ उन लोगों पर लागू होता है जो सचेत रूप से इस्लाम के सत्य को अस्वीकार करते हैं। **नोट**: यह शब्द संवेदनशील हो सकता है, क्योंकि इसका गलत या अपमानजनक उपयोग विवाद पैदा कर सकता है। इसका अर्थ समझते समय सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भ को ध्यान में रखना चाहिए।  क्या आप जानते हैं कि “काफ़िर” शब्द का सही मतलब क्या है? “काफ़िर” शब्द का मतलब क्या है? काफ़िर का मतलब “नफरत” नहीं ...

अज़ान के बाद की दुआ Prayer after adhan

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अज़ान के बाद की दुआ इस प्रकार है: اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ रोमन लिपि में (उच्चारण): "Allahumma Rabba hadhihid-da‘watit-tammati wassalati qaimah, aati Muhammadanil-waseelata walfadheelata, wab‘athhu maqaman mahmoodanil-ladhee wa‘adtahu." हिंदी अनुवाद:   "ऐ अल्लाह! इस पूर्ण आह्वान और कायम होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को वसीला और श्रेष्ठता प्रदान कर, और उन्हें उस प्रशंसनीय स्थान पर पहुँचा, जिसका तूने उनसे वादा किया है।" नोट: - इस दुआ को अज़ान सुनने के बाद पढ़ा जाता है।  - कुछ लोग इसमें "إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ" (Innaka la tukhliful-mee‘aad) भी जोड़ते हैं, जिसका अर्थ है: "निश्चय ही तू अपने वादे को नहीं तोड़ता।" - इसे पढ़ने से बहुत सवाब मिलता है, और यह सुन्नत है।

रब्बना दुआ हिंदी में और तर्जुमा के साथ - क़ुरआन में मौजूद वो 40 दुआएँ जो रब्बना से शुरू होती है।

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 रब्बना दुआ हिंदी में  क़ुरआन में मौजूद वो 40 दुआएँ जो रब्बना से शुरू होती है। 40 Rabbana Duas in Hindi ۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞ 1 رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ العَلِيمُ रब्बना तक़ब्बल मिन्ना इन्नका अन्तस समीउल अलीम तर्जुमा : ऐ हमारे रब हमारी (ये खिदमत) क़ुबूल कर बेशक़ तू ही (दुआ) का सुनने वाला है (और उसका) जानने वाला है। 2 رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ रब्बना वज अल्ना मुस्लिमैनी लका वमिन जुर रिय यतिना उम्मतम मुस्लिमतल लक, व अरिना मना सिकना, व तुब अलैना, इन्नका अंतत तव्वाबुर रहीम तर्जुमा : ऐ हमारे रब्ब हमें अपना फरमाबरदार बना दे और हमारी औलाद में से भी एक जम’आत को अपना फरमाबरदार बना और हमें हमारे हज के तारीके बता दे और हमारी तौबाह क़ुबूल फरमा बेशक़ तू बड़ा तौबाह क़ुबूल करने वाला निहायत रहम वाला है। 3 رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ रब्बना आतिना फिद दुनिया हसनतव वाफ...

इस्लामी 12 महीने हिंदी

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Islamic 12 Month Arabic مُحَرَّم صَفَر رَبِيع ٱلْأَوَّل ربيع الثاني or رَبِيع ٱلْآخِر جُمَادَىٰ ٱلْأُولَىٰ جُمَادَىٰ ٱلْآخِرَة رَجَب شَعْبَان رَمَضَان شَوَّال ذُو ٱلْقَعْدَة ذُو ٱلْحِجَّة Islamic 12 months Muharram Safar Rabiul Awwal Rabiul Akhir Jamadi-ul-Awwal Jumaada Al-Akhir Rajjab Shaban Ramzan Shawwal Zil Qad Zil Hajj इस्लामी 12 महीने हिंदी 01). मुहर्रम 02). सफ़र 03). रबीउल अव्वल 04). रबीउल आखिर 05). जमादी-उल-अव्वल 06). जुमादा अल-अखिर 07). रज्जब 08). शाबान 09). रमजान 10). शव्वाल 11). ज़िल क़दा 12). ज़िल हज

12 रबी उल अव्वल 04 सितंबर 2025 या 05 सितंबर 2025

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12 रबी उल अव्वल इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबी उल अव्वल की 12वीं तारीख है, जिसे इस्लाम में विशेष महत्व प्राप्त है। यह तारीख मुख्य रूप से पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, जिसे ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या मिलाद-उन-नबी के नाम से जाना जाता है। यह सुन्नी मुसलमानों के बीच खास तौर पर महत्वपूर्ण है। महत्व: पैगंबर मुहम्मद का जन्म : सुन्नी परंपरा के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद का जन्म 570 ई. में मक्का में 12 रबी उल अव्वल को हुआ था।  निधन : कुछ विद्वानों के अनुसार, पैगंबर का निधन भी 632 ई. में इसी तारीख को मदीना में हुआ था। उत्सव : इस दिन मुस्लिम समुदाय में जुलूस, धार्मिक सभाएं, कुरआन पाठ, और पैगंबर की जीवनी (सीरत) पर चर्चा होती है। मस्जिदों और घरों को सजाया जाता है, और दान-दक्षिणा किया जाता है। विवाद: -शिया मत : शिया मुसलमान पैगंबर के जन्म को 17 रबी उल अव्वल को मानते हैं, इसलिए उनके उत्सव की तारीख अलग हो सकती है। उत्सव पर मतभेद : कुछ इस्लामी विद्वान (जैसे वहाबी/सलफी) इस दिन को उत्सव के रूप में मनाने को बिदअत (नवाचार) मानते हैं, क्योंकि इसका उल्लेख कुरआन या हदीस में स्पष्ट र...

इस्लाम धर्म की इतिहास history of islam religion

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इस्लाम धर्म की इतिहास इस्लाम धर्म का इतिहास लगभग 1400 वर्ष पुराना है, जो 7वीं शताब्दी में अरब प्रायद्वीप से शुरू हुआ। इसकी उत्पत्ति पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के माध्यम से हुई, जिन्हें इस्लाम का संस्थापक माना जाता है। नीचे इस्लाम के इतिहास का संक्षिप्त और व्यवस्थित विवरण दिया गया है: 1. इस्लाम का उदय (610-632 ई.) पैगंबर मुहम्मद का जीवन : इस्लाम की शुरुआत 610 ई. में मक्का (वर्तमान सऊदी अरब) में हुई, जब पैगंबर मुहम्मद को गुफा-ए-हिरा में अल्लाह की ओर से पहला वह्य (वह्य: कुरआन का पहला आयत) प्राप्त हुआ। यह आयत "इक़रा" (पढ़ो) थी। प्रचार और विरोध : मुहम्मद ने एकेश्वरवाद (तौहीद) और सामाजिक सुधार का संदेश फैलाया, जिसका मक्का के कुरैश कबीले ने विरोध किया। 622 ई. में, मुहम्मद और उनके अनुयायियों को मक्का से मदीना हिजरत (प्रवास) करना पड़ा, जो इस्लामी कैलेंडर (हिजरी) का प्रारंभ बिंदु है। मदीना में इस्लाम का विस्तार : मदीना में मुहम्मद ने एक संगठित समुदाय (उम्माह) स्थापित किया। कई युद्ध (जैसे बद्र, उहुद, खंदक) लड़े गए, और 630 ई. में मक्का पर विजय प्राप्त की। 632 ई. में पैगंबर मुहम्मद का निधन ...

कुरान (Qur'an) इस्लाम धर्म

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कुरान (Qur'an) इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ है , जिसे मुसलमान अल्लाह का वचन मानते हैं। यह अरबी भाषा में है और इसमें 114 सूरह (अध्याय) हैं, जो विभिन्न विषयों जैसे आध्यात्मिकता, नैतिकता, मार्गदर्शन, और सामाजिक नियमों को कवर करते हैं। इसे पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) पर जिब्रईल (फरिश्ते) के माध्यम से 23 वर्षों में अवतरित किया गया। क्या आप कुरान के किसी विशिष्ट पहलू, सूरह, या विषय के बारे में जानना चाहते हैं? कुरान का इतिहास इस्लाम के उदय और इसके संकलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। नीचे कुरान के इतिहास का संक्षिप्त और व्यवस्थित विवरण दिया गया है: 1. अवतरण (Revelation) - ** समयावधि**: कुरान का अवतरण 610 ईस्वी से 632 ईस्वी तक, लगभग 23 वर्षों में हुआ। - **स्थान**: मक्का और मदीना (आधुनिक सऊदी अरब)। - **प्रक्रिया**: कुरान को अल्लाह द्वारा पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) पर फरिश्ते जिब्रईल (गैब्रियल) के माध्यम से अवतरित किया गया। पहला अवतरण मक्का में हिरा गुफा में हुआ, जब पैगंबर 40 वर्ष के थे। पहली आयत थी: "इक़रा" (पढ़ो), जो सूरह अल-अलक (96) में है। - **प्रकृति**: कुरान को टुकड़ों में अवतरित किया ग...

हिंदी में आयतुल कुर्सी

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अयातुल कुर्सी आयतुल कुर्सी (Ayat-ul-Kursi) कुरआन की सूरह अल-बकराह (Surah Al-Baqarah) की आयत नंबर 255 है। यह कुरआन की सबसे महत्वपूर्ण और बरकत वाली आयतों में से एक मानी जाती है, जो अल्लाह की महानता, उसकी सत्ता, और उसकी कुदरत को बयान करती है। इसे पढ़ने से सुरक्षा, बरकत, और आध्यात्मिक शांति मिलती है। इसे अक्सर नमाज़ के बाद, सोने से पहले, या मुश्किल वक्त में पढ़ा जाता है।आयतुल कुर्सी का अरबी पाठ: اللّٰہُ لَآ اِلٰہَ اِلَّا ہُوَ الْحَیُّ الْقَیُّوْمُ ۚ لَا تَاْخُذُہٗ سِنَۃٌ وَّلَا نَوْمٌ ۚ لَہٗ مَا فِی السَّمٰوٰتِ وَمَا فِی الْاَرْضِ ۫ مَنْ ذَا الَّذِیْ یَشْفَعُ عِنْدَہٗٓ اِلَّا بِاِذْنِہٖ ۚ یَعْلَمُ مَا بَیْنَ اَیْدِیْہِمْ وَمَا خَلْفَہُمْ ۚ وَلَا یُحِیْطُوْنَ بِشَیْءٍ مِّنْ عِلْمِہٖٓ اِلَّا بِمَا شَآءَ ۚ وَسِعَ کُرْسِیُّہٗ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ ۚ وَلَا یَئُوْدُہٗ حِفْظُہُمَا ۚ وَہُوَ الْعَلِیُّ الْعَظِیْمُ हिंदी में आयतुल कुर्सी : "अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवा, अल-हय्युल-कय्यूम, ला ता'खुज़ुहु सिनतुव्वला नवम, लहू मा फिस-समावाति वा मा फिल-अर्ध, मन ज़ल्ल्लिजी यशफ़'उ 'इंदहु ...

दुआए कुनूत और तर्जुमा के साथ

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 दुआए कुनूत  अल्लाहुम्मदिनी फीमन हदैत, वआफिनी फीमन आफैत व तवल्लनी फीमन तवल्लैत, वबारिक ली फीमा अस्त, वकिनी शर-र मा कज़ैत, फइन्न-क तकज़ी वायुकज़ा अलैक, वइन्नहू ला यजिल्लु मंव वालैत, तबारक – रब्बना व तआलैत.  दुआ के खातिमह पर यह दरुद पढ़ना चाहिए : ( व सल्लल्लाहु अलन्नबिय्य ) तर्जुमा : ऐ अल्लाह ! मुझे हिदायत दे उन में जिन को तूने हिदायत दी और मुझे आफियत (चैन) दे उन में जिनको तूने आफियत दी और मुझे दोस्त बना उन में जिन को तूने दोस्त बनाया और मुझे बरकत दे उस में जो तूने मुझे दिया है और मुझे उस बुराई से बचा जिस का तूने फैसला किया है, पस बेशक तू ही फैसला करता है और तेरे ऊपर किसी का फैसला नहीं होता, बेशक वह ज़लील नहीं होता जिस को तू दोस्त रखे, तू बरकतवाला है हमारे रब और तू बुलंद ( ऊँचा, अज़ीम ) है ।  ________________*****__________________ दुआए कुनूत (Dua-e-Qunoot) एक विशेष दुआ है जो मुख्य रूप से वित्र (Witr) नमाज़ के दौरान पढ़ी जाती है, जो रात की आखिरी नमाज़ होती है। इसे आमतौर पर तीसरी रकअत में कियाम (खड़े होकर) के दौरान रुकू से पहले पढ़ा जाता है। यह दुआ अल्लाह से माफी, हिदाय...

Muslim Dua in All Islamic Dua

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