अज़ान के बाद की दुआ Prayer after adhan

अज़ान के बाद की दुआ इस प्रकार है: اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ  रोमन लिपि में (उच्चारण): "Allahumma Rabba hadhihid-da‘watit-tammati wassalati qaimah, aati Muhammadanil-waseelata walfadheelata, wab‘athhu maqaman mahmoodanil-ladhee wa‘adtahu."  हिंदी अनुवाद:   "ऐ अल्लाह! इस पूर्ण आह्वान और कायम होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को वसीला और श्रेष्ठता प्रदान कर, और उन्हें उस प्रशंसनीय स्थान पर पहुँचा, जिसका तूने उनसे वादा किया है।"  नोट: - इस दुआ को अज़ान सुनने के बाद पढ़ा जाता है।  - कुछ लोग इसमें "إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ" (Innaka la tukhliful-mee‘aad) भी जोड़ते हैं, जिसका अर्थ है: "निश्चय ही तू अपने वादे को नहीं तोड़ता।" - इसे पढ़ने से बहुत सवाब मिलता है, और यह सुन्नत है। अज़ान के फायदे  अज़ान के कई आध्यात्मिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक फायदे हैं, जो इस्लाम में इसकी अहमियत को दर्शाते हैं। नीचे कुछ प्रमुख फायदे संक्षेप में दिए गए हैं:  आध्यात्मिक फायदे : 1. अल्लाह की याद और तौहीद का ऐलान:    अज़ान अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी महानता का ऐलान करती है। यह मुसलमानों को अल्लाह की इबादत और नमाज़ की याद दिलाती है। 2. शैतान का भगाना:     हदीस में है कि अज़ान सुनकर शैतान भाग जाता है (सहीह बुखारी: 608)। यह आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है। 3. सवाब का अवसर:    अज़ान सुनने और इसके जवाब देने, फिर दुआ पढ़ने से बहुत सवाब मिलता है। अज़ान के बाद की दुआ में पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए वसीला मांगने की फज़ीलत है। 4. जन्नत की बशारत:     हदीस के अनुसार, जो व्यक्ति अज़ान को ध्यान से सुनता है और उसका जवाब देता है, उसके लिए जन्नत की खुशखबरी है।  सामाजिक फायदे: 1. समुदाय को एकजुट करना:     अज़ान नमाज़ के लिए मुसलमानों को एकत्रित करती है, जिससे सामुदायिक एकता और भाईचारा बढ़ता है। 2. वक़्त की पाबंदी:    अज़ान दिन में पाँच बार समय की याद दिलाती है, जिससे लोगों में समयबद्धता और अनुशासन की आदत पड़ती है। 3. इस्लामी पहचान:    अज़ान इस्लाम की पहचान को मजबूत करती है और मुस्लिम समुदाय को एक विशिष्ट आध्यात्मिक माहौल प्रदान करती है।  मनोवैज्ञानिक और शारीरिक फायदे: 1. मानसिक शांति:    अज़ान की मधुर और आध्यात्मिक आवाज़ सुनने से मन को सुकून मिलता है और तनाव कम होता है। 2. ध्यान केंद्रित करना:    अज़ान सुनकर लोग अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों से ध्यान हटाकर अल्लाह की ओर केंद्रित होते हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। 3. स्वास्थ्य लाभ:    अज़ान के जवाब में नमाज़ पढ़ने से शारीरिक गतिविधि होती है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।  हदीस से सबूत: हज़रत उमर (रज़ि.) ने कहा : "अगर मैं अज़ान देने वाला होता, तो मुझे जन्नत की बशारत मिल जाती" (सहीह मुस्लिम: 387)।  पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया : "जो अज़ान सुनकर उसके जवाब में दुआ पढ़ता है, उसकी शफाअत मेरे लिए वाजिब हो जाती है" (सहीह बुखारी: 614)।  निष्कर्ष:   अज़ान न केवल नमाज़ के लिए बुलावा है, बल्कि यह आध्यात्मिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप से जीवन को समृद्ध करती है। यह मुसलमानों को अल्लाह के करीब लाती है और समाज में एकता और सुकून का माहौल बनाती है।  अगर आप किसी खास पहलू के बारे में और जानना चाहते हैं, तो बताएँ!


अज़ान के बाद की दुआ इस प्रकार है:

اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ

रोमन लिपि में (उच्चारण):

"Allahumma Rabba hadhihid-da‘watit-tammati wassalati qaimah, aati Muhammadanil-waseelata walfadheelata, wab‘athhu maqaman mahmoodanil-ladhee wa‘adtahu."

हिंदी अनुवाद:  

"ऐ अल्लाह! इस पूर्ण आह्वान और कायम होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को वसीला और श्रेष्ठता प्रदान कर, और उन्हें उस प्रशंसनीय स्थान पर पहुँचा, जिसका तूने उनसे वादा किया है।"

नोट:

- इस दुआ को अज़ान सुनने के बाद पढ़ा जाता है। 
- कुछ लोग इसमें "إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ" (Innaka la tukhliful-mee‘aad) भी जोड़ते हैं, जिसका अर्थ है: "निश्चय ही तू अपने वादे को नहीं तोड़ता।"
- इसे पढ़ने से बहुत सवाब मिलता है, और यह सुन्नत है।

अज़ान के फायदे


अज़ान के कई आध्यात्मिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक फायदे हैं, जो इस्लाम में इसकी अहमियत को दर्शाते हैं। नीचे कुछ प्रमुख फायदे संक्षेप में दिए गए हैं:

आध्यात्मिक फायदे :

1. अल्लाह की याद और तौहीद का ऐलान:

   अज़ान अल्लाह की एकता (तौहीद) और उसकी महानता का ऐलान करती है। यह मुसलमानों को अल्लाह की इबादत और नमाज़ की याद दिलाती है।

2. शैतान का भगाना: 

   हदीस में है कि अज़ान सुनकर शैतान भाग जाता है (सहीह बुखारी: 608)। यह आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है।

3. सवाब का अवसर:

   अज़ान सुनने और इसके जवाब देने, फिर दुआ पढ़ने से बहुत सवाब मिलता है। अज़ान के बाद की दुआ में पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए वसीला मांगने की फज़ीलत है।

4. जन्नत की बशारत: 

   हदीस के अनुसार, जो व्यक्ति अज़ान को ध्यान से सुनता है और उसका जवाब देता है, उसके लिए जन्नत की खुशखबरी है।

सामाजिक फायदे:

1. समुदाय को एकजुट करना: 

   अज़ान नमाज़ के लिए मुसलमानों को एकत्रित करती है, जिससे सामुदायिक एकता और भाईचारा बढ़ता है।

2. वक़्त की पाबंदी:

   अज़ान दिन में पाँच बार समय की याद दिलाती है, जिससे लोगों में समयबद्धता और अनुशासन की आदत पड़ती है।

3. इस्लामी पहचान:

   अज़ान इस्लाम की पहचान को मजबूत करती है और मुस्लिम समुदाय को एक विशिष्ट आध्यात्मिक माहौल प्रदान करती है।

मनोवैज्ञानिक और शारीरिक फायदे:

1. मानसिक शांति:

   अज़ान की मधुर और आध्यात्मिक आवाज़ सुनने से मन को सुकून मिलता है और तनाव कम होता है।

2. ध्यान केंद्रित करना:

   अज़ान सुनकर लोग अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों से ध्यान हटाकर अल्लाह की ओर केंद्रित होते हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

3. स्वास्थ्य लाभ:

   अज़ान के जवाब में नमाज़ पढ़ने से शारीरिक गतिविधि होती है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

हदीस से सबूत:

हज़रत उमर (रज़ि.) ने कहा : "अगर मैं अज़ान देने वाला होता, तो मुझे जन्नत की बशारत मिल जाती" (सहीह मुस्लिम: 387)।

पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया : "जो अज़ान सुनकर उसके जवाब में दुआ पढ़ता है, उसकी शफाअत मेरे लिए वाजिब हो जाती है" (सहीह बुखारी: 614)।

निष्कर्ष:  

अज़ान न केवल नमाज़ के लिए बुलावा है, बल्कि यह आध्यात्मिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप से जीवन को समृद्ध करती है। यह मुसलमानों को अल्लाह के करीब लाती है और समाज में एकता और सुकून का माहौल बनाती है।

अगर आप किसी खास पहलू के बारे में और जानना चाहते हैं, तो बताएँ!