रब्बना दुआ हिंदी में और तर्जुमा के साथ - क़ुरआन में मौजूद वो 40 दुआएँ जो रब्बना से शुरू होती है।
रब्बना दुआ हिंदी में
क़ुरआन में मौजूद वो 40 दुआएँ जो रब्बना से शुरू होती है।
40 Rabbana Duas in Hindi
۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞
1
رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ العَلِيمُ
रब्बना तक़ब्बल मिन्ना इन्नका अन्तस समीउल अलीम
तर्जुमा : ऐ हमारे रब हमारी (ये खिदमत) क़ुबूल कर बेशक़ तू ही (दुआ) का सुनने वाला है (और उसका) जानने वाला है।
2
رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
रब्बना वज अल्ना मुस्लिमैनी लका वमिन जुर रिय यतिना उम्मतम मुस्लिमतल लक, व अरिना मना सिकना, व तुब अलैना, इन्नका अंतत तव्वाबुर रहीम
तर्जुमा : ऐ हमारे रब्ब हमें अपना फरमाबरदार बना दे और हमारी औलाद में से भी एक जम’आत को अपना फरमाबरदार बना और हमें हमारे हज के तारीके बता दे और हमारी तौबाह क़ुबूल फरमा बेशक़ तू बड़ा तौबाह क़ुबूल करने वाला निहायत रहम वाला है।
3
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना आतिना फिद दुनिया हसनतव वाफिल आखिरति हसनतव व किना अज़ाबन नार
तर्जुमा : ऐ हमारे रब्ब हमें दुनिया में नेकी और आख़िरत में भी नेकी दे और हमें दोज़ख केअज़ाब से बचा।
4
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْراً وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى القَوْمِ الكَافِرِينَ
रब्बना अफरिग अलैना सबरव व सबबित अकदामना वन सुरना अलल कौमिल काफ़िरीन
तर्जुमा : ऐ हमारे रब! हमपर धैर्य उडेल दे और हमारे क़दम जमा दे और इनकार करनेवाले लोगों पर हमें विजय प्रदान कर।
5
رَبَّنَا لاَ تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا
रब्बना ला तुआखिज़ना इन नसीना अव अख्तअना
तर्जुमा : ऐ हमारे रब अगर हम भूल जाये या ग़लती करें तो हमें न पकड़।
6
رَبَّنَا وَلاَ تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا
रब्बना वला तहमिल अलैना इसरन कम हमल्तहू अलल लज़ीना मिन क़ब्लिना
तर्जुमा : ऐ हमारे रब और हम पर भारी बोझ न रख जैसा तूने हम से पहले लोगो पर रखा था।
7
رَبَّنَا وَلاَ تُحَمِّلْنَا مَا لاَ طَاقَةَ لَنَا بِهِ وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا أَنتَ مَوْلاَنَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
रब्बना वला तुहम्मिलना मा ला ताक़ता लाना बिह वाफु अन्ना वाग्फिर लाना वर हमना अंता मौलाना फंसुरना अलल कौमिल काफ़िरीन
तर्जुमा : ऐ हमारे रब और हमसे वह बोझ न उठवा जिसकी हमें ताक़त नहीं और हमें मु’आफ़ कर दे और हमें बख़्श दे और हम पर रहम कर तू ही हमारा कारसाज़ है काफिरों के मुक़ाबले में तू हमारी मदद कर।
8
رَبَّنَا لاَ تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ
रब्बना ला तुज़िग कुलूबना ब अदा इज़ हदैतना, व हब लना मिल लदुन्का रहमह, इन्नका अंतल वह्हाब
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है।
9
رَبَّنَا إِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لاَّ رَيْبَ فِيهِ إِنَّ اللّهَ لاَ يُخْلِفُ الْمِيعَادَ
रब्बना इन्नका जमिउन नासि लियौमिल ला रैबा फ़ीह, इन्नल लाहा ला युखलिफुल मीआद
तर्जुमा : ऐ हमारे रब! तू एक दिन सब लोगों को इकट्ठा करने वाला है जिसमें कोई शक़ नहीं बेशक़ अल्लाह अपने वादे के खिलाफ नहीं करता।
10
رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना इन्नना अमन्ना फग्फिर लना ज़ुनूबना, व किना अज़ाबन नार
तर्जुमा : ऐ हमारे रब हम ईमान लाए है सो हमें हमारे गुनाह बख़्श दे और हमें दोज़ख के अज़ाब से बचा ले।
11
رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلَتْ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَِ
रब्बना आमन्ना बिमा अन्ज़ल्ता वत तबा अनर रसूला फकतुब्ना मअश शाहिदीन
तर्जुमा : ए हमारे रब ! तू ने जो कुछ नाजिल किया उस पर हम ईमान लाये और हम ने रसूल की बात मानी बस तू हम को मानने वालों में से लिख दे।
12
ربَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَِ
रब्बनग फिर लना ज़ुनूबना व इसरा फ़ना फ़ी अमरिना व सबबित अकदामना वन सुरना अलल कौमिल काफ़िरीन
तर्जुमा : ए हमारे रब ! हमरे गुनाहों को बख्श दे और हम से हमारे काम में जो ज्यादती हुई ( उस से दरगुज़र फरमा ) और हमारे क़दमों को जमा दे और काफिर कौम पर हमारी मदद फरमा
13
رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَذا بَاطِلاً سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना मा खलकता हाज़ा बातिला सुब हानाका फकिना अज़ाबन नार
तर्जुमा : ए हमारे रब ! तू ने इन को यूँ ही पैदा नहीं किया, तेरी ज़ात पाक है, बस तू हमें दोज़ख़ के अज़ाब से बचा ले
14
رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
रब्बना इन्नका मन तुद्खिलिन नारा फ़क़द अख्जैतह वमा लिज़ ज़ालिमीना मिन अन्सार
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं
15
رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلإِيمَانِ أَنْ آمِنُواْ بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا
रब्बना इन्नना समिअना मुनादियय युनादी लिल इमानि अन आमनू बिरब बिकुम फ़ आमनना
तर्जुमा : ए हमारे रब ! बेशक हम ने एक मुनादी को ईमान की निदा लगाते सुना कि अपने रब पर ईमान लाओ सो हम ईमान ले आये
16
رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الأبْرَارِ
रब्बनग फिर लना ज़ुनूबना व काफ्फिर अन्ना सैययि आतिना व तवफ्फना मअल अबरार
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले
17
رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَى رُسُلِكَ وَلاَ تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّكَ لاَ تُخْلِفُ الْمِيعَاد
रब्बना व आतिना मा वअत तना अला रुसुलिक वला तुख्ज़िना यौमल कियामह इन्नका ला तुख्लिफुल मीआद
तर्जुमा : ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं
18
رَبَّنَا آمَنَّا فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ
रब्बना अमन्ना फक तुब्ना मअश शाहिदीन
तर्जुमा : ऐ मेरे पालने वाले हम तो ईमान ला चुके तो (रसूल की) तसदीक़ करने वालों के साथ हमें भी लिख रख
19
رَبَّنَا أَنزِلْ عَلَيْنَا مَآئِدَةً مِّنَ السَّمَاء تَكُونُ لَنَا عِيداً لِّأَوَّلِنَا وَآخِرِنَا وَآيَةً مِّنكَ وَارْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
रब्बना अन्जिल अलैना मा इदतम मिनस समाइ, तकूनु लाना ईदल लिअव्वलिना, व अखिरिना व आयतम मिनका, वर ज़ुक्ना व अंता खैरुर राज़िकीन
तर्जुमा : अल्लाह वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान (नेअमत) नाज़िल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए (और हमारे हक़ में) तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है
20
رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
रब्बना ज़लमना अन्फुसना वईल लम तग्फिर लना वतर हमना लनकूनन्ना मिनल खासिरीन
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें
21
رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
रब्बबना ला तज अल्ना म अल कौमिज़ ज़ालिमीन
तर्जुमा : ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना
22
رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَيْرُ الْفَاتِحِينَ
रब्बनफ़ तह बैनना व बैना कौमिना बिल हक्क़ व अंता खैरुल फातिहीन
तर्जुमा : ऐ हमारे परवरदिगार तू ही हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फैसला कर दे और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है
23
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
रब्बना अफरिग अलैना सबरव व तवफ्फना मुस्लिमीन
तर्जुमा : ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा) और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले
24
رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ ; وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
रब्बना ला तज अल्ना फितनतल लिल कौमिज़ ज़ालिमीन, वनज जिना बिरहमतिका मिनल कौमिज़ काफिरिन
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना और अपनी रहमत से हमें इन काफ़िर लोगों (के नीचे) से नजात दे
25
رَبَّنَا إِنَّكَ تَعْلَمُ مَا نُخْفِي وَمَا نُعْلِنُ وَمَا يَخْفَى عَلَى اللّهِ مِن شَيْءٍ فَي الأَرْضِ وَلاَ فِي السَّمَاء
रब्बना इन्नका तअलमु मा नुख्फ़ी वला नु’अलिन वमा यख्फा अलल लाही मिन शयइन फ़िल अरज़ि वला फिस समाई
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ हम छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तू (सबसे) खूब वाक़िफ है और अल्लाह से तो कोई चीज़ छिपी नहीं (न) ज़मीन में और न आसमान में
26
رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاء
रब्बना व तक़ब्बल दुआ
ऐ मेरे पालने वाले मेरी दुआ क़ुबूल फरमा
27
رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ
रब्बनग फ़िरली वाली वालिदय्या वलिल मु’मिनीना यौमा यकूमुल हिसाब
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले जिस दिन (आमाल का) हिसाब होने लगे मुझको और मेरे माँ बाप को और सारे ईमानदारों को तू बख्श दे
28
رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
रब्बना आतिना मिल लदुन्का रहमतव वहययिअ लना मिन अमरिना रशदा
तर्जुमा : ऐ हमारे परवरदिगार हमें अपनी बारगाह से रहमत अता फरमा-और हमारे वास्ते हमारे काम में कामयाबी इनायत कर
29
رَبَّنَا إِنَّنَا نَخَافُ أَن يَفْرُطَ عَلَيْنَا أَوْ أَن يَطْغَى
रब्बना नखाफु अय यफरुता अलैना अव य यत्गा
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले हम डरते हैं कि कहीं वह हम पर ज्यादती (न) कर बैठे या ज्यादा सरकशी कर ले
30
رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
रब्बना अमन्ना फग फिर लना वर हमना व अंता खैरुर राहिमीन
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है
31
رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا إِنَّهَا سَاءتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا
रब्बनस रिफ अन्ना अज़ाबा जहन्नम इन्ना अज़ाबहा काना गरामा, इननहा सा अत मुस्तक़ररव व मुकामा
तर्जुमा : परवरदिगारा हम से जहन्नुम का अज़ाब फेरे रहना क्योंकि उसका अज़ाब बहुत (सख्त और पाएदार होगा) बेशक वह बहुत बुरा ठिकाना और बुरा मक़ाम है
32
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
रब्बना हब लना मिन अज्वाजिना वज़ुररिय यातिना कुररता अ’अयुन व जअल्ना लिल मुत्तक़ीना इमामा
तर्जुमा : परवरदिगार हमें हमारी बीबियों और औलादों की तरफ से ऑंखों की ठन्डक अता फरमा और हमको परहेज़गारों का पेशवा बना
33
رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ
रब्बना लगफूरून शकूर
तर्जुमा : बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है
34
آمَنُوا رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
रब्बना वसि’अता कुल्ला शयईन रहमतव व इल्मन फग्फिर लिल लज़ीना ताबू वत तबऊ सबीलका वकिहीम अज़ाबल जहीम
तर्जुमा : परवरदिगार तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ पर अहाता किए हुए हैं, तो जिन लोगों ने (सच्चे) दिल से तौबा कर ली और तेरे रास्ते पर चले उनको बख्श दे और उनको जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले
35
رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّهُم وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ وَقِهِمُ السَّيِّئَاتِ وَمَن تَقِ السَّيِّئَاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُ وَذَلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
रब्बना व अदखिल्हुम जन्नाति अदनी निल लती व अततहुम वमन सलहा मिन अबाईहीम व अज्वा जिहिम व ज़ुररिय यातिहिम, इन्नका अंतल अज़ीज़ुल हकीम, वकिहिमुस सय्यिआत व मन ताकिस सय्यिआति यौमइजिन फ़क़द रहिमतह, वज़ालिका हुवल फौज़ुल अज़ीम
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले इन को सदाबहार बाग़ों में जिनका तूने उन से वायदा किया है दाख़िल कर और उनके बाप दादाओं और उनकी बीवीयों और उनकी औलाद में से जो लोग नेक हो उनको (भी बख्श दें) बेशक तू ही ज़बरदस्त (और) हिकमत वाला है।
رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ آمَنُوا
रब्बनग फिर लना वलि इख्वानिनल लज़ीना सबकूना बिल ईमान, वला तज अल फ़ी कुलूबिना गिल लल लिल लज़ीना आमनू
तर्जुमा : परवरदिगारा हमारी और उन लोगों की जो हमसे पहले ईमान ला चुके मग़फेरत कर और मोमिनों की तरफ से हमारे दिलों में किसी तरह का कीना न आने दे
37
رَبَّنَا إِنَّكَ رَؤُوفٌ رَّحِيمٌ
रब्बना इन्नका रऊफ़ुर रहीम
तर्जुमा : परवरदिगार बेशक तू बड़ा शफीक़ निहायत रहम वाला है
38
رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ
रब्बना अलैका तवक्कलना व इलैका अनब्ना व इलैकल मसीर
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले, हमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं
39
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
रब्बना ला तज अलना फितनतल लिल लज़ीना कफरू वग्फिर लना रब्बना इन्नका अंतल अजीजुल हकीम
तर्जुमा : ऐ हमारे पालने वाले तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) न क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है
40
رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا إِنَّكَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
रब्बना अत मिम लना नूरना वग़फ़िर लना इन्नका अला कुल्लि शयइन क़दीर
तर्जुमा : ऐ परवरदिगार हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमें बख्य दे बेशक तू हर चीज़ पर कादिर है
Post a Comment