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Posted by
Sameem khan
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12 रबी उल अव्वल इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबी उल अव्वल की 12वीं तारीख है, जिसे इस्लाम में विशेष महत्व प्राप्त है। यह तारीख मुख्य रूप से पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, जिसे ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या मिलाद-उन-नबी के नाम से जाना जाता है। यह सुन्नी मुसलमानों के बीच खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
महत्व:
पैगंबर मुहम्मद का जन्म : सुन्नी परंपरा के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद का जन्म 570 ई. में मक्का में 12 रबी उल अव्वल को हुआ था।
निधन : कुछ विद्वानों के अनुसार, पैगंबर का निधन भी 632 ई. में इसी तारीख को मदीना में हुआ था।
उत्सव : इस दिन मुस्लिम समुदाय में जुलूस, धार्मिक सभाएं, कुरआन पाठ, और पैगंबर की जीवनी (सीरत) पर चर्चा होती है। मस्जिदों और घरों को सजाया जाता है, और दान-दक्षिणा किया जाता है।
विवाद:
-शिया मत : शिया मुसलमान पैगंबर के जन्म को 17 रबी उल अव्वल को मानते हैं, इसलिए उनके उत्सव की तारीख अलग हो सकती है।
उत्सव पर मतभेद : कुछ इस्लामी विद्वान (जैसे वहाबी/सलफी) इस दिन को उत्सव के रूप में मनाने को बिदअत (नवाचार) मानते हैं, क्योंकि इसका उल्लेख कुरआन या हदीस में स्पष्ट रूप से नहीं है।
भारत में 12 रबी उल अव्वल:
भारत में यह दिन बारावफात के नाम से भी जाना जाता है। लोग जुलूस निकालते हैं, जिन्हें "जुलूस-ए-मोहम्मदी" कहा जाता है, और पैगंबर की शिक्षाओं का प्रचार करते हैं।
नोट : इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित है, इसलिए 12 रबी उल अव्वल की तारीख हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए, 2025 में यह 04 सितंबर 2025 या 05 सितंबर 2025 में पड़ सकता है।
यदि आप इस दिन के उत्सव, इतिहास, या किसी विशेष पहलू पर और जानकारी चाहते हैं, तो बताएं!

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