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Kia Unhe Khabar Nahi Ali Lyrics Fatima Yateem Hogai | Ayyam E Bibi Fatima Noha 2025-26 | Farhan Ali Waris

Kia Unhe Khabar Nahi Ali Lyrics  Audio Credits: Singer: Anamta Khan Fatima Yateem Hogai Lyrics Noha Ayyam E Bibi Fatima Noha 2025-26 | Farhan Ali Waris Syed Farhan Ali Waris Presents Shahadat Bibi Fatima Zahra New Noha 2025 Lyrics Kiya Unhe Khabar Nahi Ali " i.e 13 jamadi ul awal / 3 jamadi ul sani. ***************

फज़लो करम Fazlo Karam Kalaam Anamta Khan Fazl-o-Karam

Anamta Khan Fazl-o-Karam Audio Credits: Singer: Anamta Khan Lyricist and Music Composer: Anamta-Amaan Video Credits: Music Programming, Mixing and Mastering: Deepp C Director and Editor: Pushpraj Singh DOP: Nilesh Pawar Outfit: IOU Trends Makeup and Hair: Shefali Lyrics: आफ़तों को टाल दे मौला गिर रहे हैं संभाल ले मौला अपनी रहमतों से इस दुनिया के सब दर्द दूर कर दे मौला आफ़तों को टाल दे मौला गिर रहे हैं संभाल ले मौला अपनी रहमतों से इस दुनिया के सब दर्द दूर कर दे मौला तेरा फ़ज़ल-ओ-करम अगर हम पर हो जाए यह दुनिया फिर से संवर जाए तेरे बंदे हैं परेशान ऐ खुदा तेरे सजदे में सर यह झुका है अब सुन ले हमारी इल्तिजा तू बातिन भी तू ज़ाहिर भी तू अव्वल भी तू आख़िर भी तू ही इस दुनिया का खालिक है तू ही इस दुनिया का मालिक है आफ़तों को टाल दे मौला गिर रहे हैं संभाल ले मौला अपनी रहमतों से इस दुनिया के सब दर्द दूर कर दे मौला आफ़तों को टाल दे मौला गिर रहे हैं संभाल ले मौला अपनी रहमतों से इस दुनिया के सब दर्द दूर कर दे मौला तुझसे ही मिलती है शिफा मांगते हैं तुझसे हर दफ़ा इस मर्ज की भी दवा दे दे यह हमारी दुआ...

NOOR WALE AAQA KA MILAD AAYA LYRICS नूर वाले आक़ा का मीलाद आया

NOOR WALE AAQA KA MILAD AAYA LYRICS HINDI नूर वाले आक़ा का मीलाद आया मरहबा सल्ले-'अला ! मरहबा सल्ले-'अला ! सल्लल्लाहु 'अलैका या रसूलल्लाह ! व सल्लम 'अलैका या हबीबल्लाह ! मुस्तफ़ा या मुस्तफ़ा ! मरहबा सल्ले-'अला ! ना'रा-ए-'इश्क़-ओ-वफ़ा ! मरहबा सल्ले-'अला ! है सहाबा की नवा ! मरहबा सल्ले-'अला ! है सदा-ए-सय्यिदा ! मरहबा सल्ले-'अला ! रैलियों में है सदा ! मरहबा सल्ले-'अला ! हर तरफ़ शोर उठा ! मरहबा सल्ले-'अला ! विर्द ये रोज़ाना ! मरहबा सल्ले-'अला ! सारी दुनिया ने कहा ! जान-ओ-दिल तुम पे फ़िदा ! चाँद उतर आया, नूर-ओ-नूर छाया चाँद उतर आया, नूर-ओ-नूर छाया नूर वाले आक़ा का मीलाद आया नूर वाले आक़ा का मीलाद आया ज़िक्र-ए-नबी-ए-पाक तो दिन-रात करेंगे लंगर, सबील, सदक़ा-ओ-ख़ैरात करेंगे सूनी कोई गली न मोहल्ला कहीं होगा कर के चरागाँ नूर की बरसात करेंगे गली गली शहर-शहर धूम मची है आमिना के लाल के आने की ख़ुशी है नूर वाले आक़ा का मीलाद आया नूर वाले आक़ा का मीलाद आया आमद है किस पयम्बर-ए-'आली-मक़ाम की आने लगीं सदाएँ दुरूद-ओ-सलाम की मीलाद-ए-मुस्तफ़ा से हैं दुनिया में रौनक़ें धू...

Dil Mein Ishq e Nabi ki ho aisi lagan Naat Lyrics

Dil Mein Ishq-e-Nabi Ki Ho Aisi Lagan दिल में इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन रूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे ज़िंदगी का मज़ा है कि हर साँस से या मुहम्मद मुहम्मद निकलता रहे दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन रूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे या मुहम्मद मुहम्मद मैं कहता रहा नूर के मोतियों की लड़ी बन गई आयतों से मिलाता रहा आयतें फिर जो देखा तो ना'त-ए-नबी बन गई दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन रूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे जो भी आँसू बहे मेरे महबूब के सब के सब अब्र-ए-रहमत के छींटे बने छा गई रात जब जुल्फ़ लहरा गई जब तबस्सुम किया चाँदनी बन गई दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन रूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे ये तो माना कि जन्नत है बाग़-ए-हसीं खूबसूरत है सब खुल्द की सर-ज़मीं हुस्न-ए-जन्नत को फिर जब समेटा गया सरवर-ए-अंबिया की गली बन गई दिल में 'इश्क़-ए-नबी की हो ऐसी लगन रूह तड़पती रहे, दिल मचलता रहे जब छिड़ा तज़्किरा उन के रुख़्सार का वद्दुहा पढ़ लिया, वल-क़मर कह दिया आयतों की तिलावत भी होती रही ना'त भी हो गई, बात भी बन गई दिल में 'इश्क़-...

काफ़िर किसे कहते हैं Who is a Kafir? सही अर्थ

"काफ़िर" अरबी शब्द "कुफ़्र" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "इनकार करना" या "अस्वीकार करना"। इस्लामी संदर्भ में, "काफ़िर" आमतौर पर उस व्यक्ति को कहते हैं जो: 1. **ईश्वर के अस्तित्व को नकारता हो** या अल्लाह की एकता (तौहीद) को स्वीकार नहीं करता। 2. **इस्लाम के मूल सिद्धांतों** (जैसे कुरान, पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं) को अस्वीकार करता हो। 3. **जानबूझकर सत्य को छुपाता हो** या उसका विरोध करता हो। हालांकि, इस शब्द का उपयोग संदर्भ और परिस्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोग इसे गैर-मुस्लिमों के लिए सामान्य रूप से इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इस्लामी विद्वानों के अनुसार, इसका सटीक अर्थ उन लोगों पर लागू होता है जो सचेत रूप से इस्लाम के सत्य को अस्वीकार करते हैं। **नोट**: यह शब्द संवेदनशील हो सकता है, क्योंकि इसका गलत या अपमानजनक उपयोग विवाद पैदा कर सकता है। इसका अर्थ समझते समय सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भ को ध्यान में रखना चाहिए।  क्या आप जानते हैं कि “काफ़िर” शब्द का सही मतलब क्या है? “काफ़िर” शब्द का मतलब क्या है? काफ़िर का मतलब “नफरत” नहीं ...

अज़ान के बाद की दुआ Prayer after adhan

अज़ान के बाद की दुआ इस प्रकार है: اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ रोमन लिपि में (उच्चारण): "Allahumma Rabba hadhihid-da‘watit-tammati wassalati qaimah, aati Muhammadanil-waseelata walfadheelata, wab‘athhu maqaman mahmoodanil-ladhee wa‘adtahu." हिंदी अनुवाद:   "ऐ अल्लाह! इस पूर्ण आह्वान और कायम होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को वसीला और श्रेष्ठता प्रदान कर, और उन्हें उस प्रशंसनीय स्थान पर पहुँचा, जिसका तूने उनसे वादा किया है।" नोट: - इस दुआ को अज़ान सुनने के बाद पढ़ा जाता है।  - कुछ लोग इसमें "إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ" (Innaka la tukhliful-mee‘aad) भी जोड़ते हैं, जिसका अर्थ है: "निश्चय ही तू अपने वादे को नहीं तोड़ता।" - इसे पढ़ने से बहुत सवाब मिलता है, और यह सुन्नत है।

रब्बना दुआ हिंदी में और तर्जुमा के साथ - क़ुरआन में मौजूद वो 40 दुआएँ जो रब्बना से शुरू होती है।

 रब्बना दुआ हिंदी में  क़ुरआन में मौजूद वो 40 दुआएँ जो रब्बना से शुरू होती है। 40 Rabbana Duas in Hindi ۞ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम ۞ 1 رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ العَلِيمُ रब्बना तक़ब्बल मिन्ना इन्नका अन्तस समीउल अलीम तर्जुमा : ऐ हमारे रब हमारी (ये खिदमत) क़ुबूल कर बेशक़ तू ही (दुआ) का सुनने वाला है (और उसका) जानने वाला है। 2 رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ रब्बना वज अल्ना मुस्लिमैनी लका वमिन जुर रिय यतिना उम्मतम मुस्लिमतल लक, व अरिना मना सिकना, व तुब अलैना, इन्नका अंतत तव्वाबुर रहीम तर्जुमा : ऐ हमारे रब्ब हमें अपना फरमाबरदार बना दे और हमारी औलाद में से भी एक जम’आत को अपना फरमाबरदार बना और हमें हमारे हज के तारीके बता दे और हमारी तौबाह क़ुबूल फरमा बेशक़ तू बड़ा तौबाह क़ुबूल करने वाला निहायत रहम वाला है। 3 رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ रब्बना आतिना फिद दुनिया हसनतव वाफ...

इस्लामी 12 महीने हिंदी

Islamic 12 Month Arabic مُحَرَّم صَفَر رَبِيع ٱلْأَوَّل ربيع الثاني or رَبِيع ٱلْآخِر جُمَادَىٰ ٱلْأُولَىٰ جُمَادَىٰ ٱلْآخِرَة رَجَب شَعْبَان رَمَضَان شَوَّال ذُو ٱلْقَعْدَة ذُو ٱلْحِجَّة Islamic 12 months Muharram Safar Rabiul Awwal Rabiul Akhir Jamadi-ul-Awwal Jumaada Al-Akhir Rajjab Shaban Ramzan Shawwal Zil Qad Zil Hajj इस्लामी 12 महीने हिंदी 01). मुहर्रम 02). सफ़र 03). रबीउल अव्वल 04). रबीउल आखिर 05). जमादी-उल-अव्वल 06). जुमादा अल-अखिर 07). रज्जब 08). शाबान 09). रमजान 10). शव्वाल 11). ज़िल क़दा 12). ज़िल हज

12 रबी उल अव्वल 04 सितंबर 2025 या 05 सितंबर 2025

12 रबी उल अव्वल इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबी उल अव्वल की 12वीं तारीख है, जिसे इस्लाम में विशेष महत्व प्राप्त है। यह तारीख मुख्य रूप से पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, जिसे ईद-ए-मिलाद-उन-नबी या मिलाद-उन-नबी के नाम से जाना जाता है। यह सुन्नी मुसलमानों के बीच खास तौर पर महत्वपूर्ण है। महत्व: पैगंबर मुहम्मद का जन्म : सुन्नी परंपरा के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद का जन्म 570 ई. में मक्का में 12 रबी उल अव्वल को हुआ था।  निधन : कुछ विद्वानों के अनुसार, पैगंबर का निधन भी 632 ई. में इसी तारीख को मदीना में हुआ था। उत्सव : इस दिन मुस्लिम समुदाय में जुलूस, धार्मिक सभाएं, कुरआन पाठ, और पैगंबर की जीवनी (सीरत) पर चर्चा होती है। मस्जिदों और घरों को सजाया जाता है, और दान-दक्षिणा किया जाता है। विवाद: -शिया मत : शिया मुसलमान पैगंबर के जन्म को 17 रबी उल अव्वल को मानते हैं, इसलिए उनके उत्सव की तारीख अलग हो सकती है। उत्सव पर मतभेद : कुछ इस्लामी विद्वान (जैसे वहाबी/सलफी) इस दिन को उत्सव के रूप में मनाने को बिदअत (नवाचार) मानते हैं, क्योंकि इसका उल्लेख कुरआन या हदीस में स्पष्ट र...

इस्लाम धर्म की इतिहास history of islam religion

इस्लाम धर्म की इतिहास इस्लाम धर्म का इतिहास लगभग 1400 वर्ष पुराना है, जो 7वीं शताब्दी में अरब प्रायद्वीप से शुरू हुआ। इसकी उत्पत्ति पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के माध्यम से हुई, जिन्हें इस्लाम का संस्थापक माना जाता है। नीचे इस्लाम के इतिहास का संक्षिप्त और व्यवस्थित विवरण दिया गया है: 1. इस्लाम का उदय (610-632 ई.) पैगंबर मुहम्मद का जीवन : इस्लाम की शुरुआत 610 ई. में मक्का (वर्तमान सऊदी अरब) में हुई, जब पैगंबर मुहम्मद को गुफा-ए-हिरा में अल्लाह की ओर से पहला वह्य (वह्य: कुरआन का पहला आयत) प्राप्त हुआ। यह आयत "इक़रा" (पढ़ो) थी। प्रचार और विरोध : मुहम्मद ने एकेश्वरवाद (तौहीद) और सामाजिक सुधार का संदेश फैलाया, जिसका मक्का के कुरैश कबीले ने विरोध किया। 622 ई. में, मुहम्मद और उनके अनुयायियों को मक्का से मदीना हिजरत (प्रवास) करना पड़ा, जो इस्लामी कैलेंडर (हिजरी) का प्रारंभ बिंदु है। मदीना में इस्लाम का विस्तार : मदीना में मुहम्मद ने एक संगठित समुदाय (उम्माह) स्थापित किया। कई युद्ध (जैसे बद्र, उहुद, खंदक) लड़े गए, और 630 ई. में मक्का पर विजय प्राप्त की। 632 ई. में पैगंबर मुहम्मद का निधन ...

कुरान (Qur'an) इस्लाम धर्म

कुरान (Qur'an) इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ है , जिसे मुसलमान अल्लाह का वचन मानते हैं। यह अरबी भाषा में है और इसमें 114 सूरह (अध्याय) हैं, जो विभिन्न विषयों जैसे आध्यात्मिकता, नैतिकता, मार्गदर्शन, और सामाजिक नियमों को कवर करते हैं। इसे पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) पर जिब्रईल (फरिश्ते) के माध्यम से 23 वर्षों में अवतरित किया गया। क्या आप कुरान के किसी विशिष्ट पहलू, सूरह, या विषय के बारे में जानना चाहते हैं? कुरान का इतिहास इस्लाम के उदय और इसके संकलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। नीचे कुरान के इतिहास का संक्षिप्त और व्यवस्थित विवरण दिया गया है: 1. अवतरण (Revelation) - ** समयावधि**: कुरान का अवतरण 610 ईस्वी से 632 ईस्वी तक, लगभग 23 वर्षों में हुआ। - **स्थान**: मक्का और मदीना (आधुनिक सऊदी अरब)। - **प्रक्रिया**: कुरान को अल्लाह द्वारा पैगंबर मुहम्मद (स.अ.व.) पर फरिश्ते जिब्रईल (गैब्रियल) के माध्यम से अवतरित किया गया। पहला अवतरण मक्का में हिरा गुफा में हुआ, जब पैगंबर 40 वर्ष के थे। पहली आयत थी: "इक़रा" (पढ़ो), जो सूरह अल-अलक (96) में है। - **प्रकृति**: कुरान को टुकड़ों में अवतरित किया ग...

हिंदी में आयतुल कुर्सी

अयातुल कुर्सी आयतुल कुर्सी (Ayat-ul-Kursi) कुरआन की सूरह अल-बकराह (Surah Al-Baqarah) की आयत नंबर 255 है। यह कुरआन की सबसे महत्वपूर्ण और बरकत वाली आयतों में से एक मानी जाती है, जो अल्लाह की महानता, उसकी सत्ता, और उसकी कुदरत को बयान करती है। इसे पढ़ने से सुरक्षा, बरकत, और आध्यात्मिक शांति मिलती है। इसे अक्सर नमाज़ के बाद, सोने से पहले, या मुश्किल वक्त में पढ़ा जाता है।आयतुल कुर्सी का अरबी पाठ: اللّٰہُ لَآ اِلٰہَ اِلَّا ہُوَ الْحَیُّ الْقَیُّوْمُ ۚ لَا تَاْخُذُہٗ سِنَۃٌ وَّلَا نَوْمٌ ۚ لَہٗ مَا فِی السَّمٰوٰتِ وَمَا فِی الْاَرْضِ ۫ مَنْ ذَا الَّذِیْ یَشْفَعُ عِنْدَہٗٓ اِلَّا بِاِذْنِہٖ ۚ یَعْلَمُ مَا بَیْنَ اَیْدِیْہِمْ وَمَا خَلْفَہُمْ ۚ وَلَا یُحِیْطُوْنَ بِشَیْءٍ مِّنْ عِلْمِہٖٓ اِلَّا بِمَا شَآءَ ۚ وَسِعَ کُرْسِیُّہٗ السَّمٰوٰتِ وَالْاَرْضَ ۚ وَلَا یَئُوْدُہٗ حِفْظُہُمَا ۚ وَہُوَ الْعَلِیُّ الْعَظِیْمُ हिंदी में आयतुल कुर्सी : "अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवा, अल-हय्युल-कय्यूम, ला ता'खुज़ुहु सिनतुव्वला नवम, लहू मा फिस-समावाति वा मा फिल-अर्ध, मन ज़ल्ल्लिजी यशफ़'उ 'इंदहु ...