जानिये ! इस्लाम में दाढ़ी क्यों रखी जाती है ? (दाढ़ी की सुन्नत)

"हमारी शरीयत में दाढ़ी रखना सिरफ सुन्नत ही नहीं बाल्की इसे वाजिब कहा गया है और इसे कटाना एक हराम अमल है, जो अल्लाह और उसके रसूल صلى الله ليه وسلم की नारजगी का बैश है"

हदीस शरीफ

  1. मुशरिको की मुखलीफत क्रो दधी को बढ़ाओ और मुंछो को छोटा करो।
  2. हजरत अब्दुल्ला बिन उमर रदिअल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं की रसूलुल्लाह لى الله ليه وسلم ने मूछो को छोटा करने और दारी को बढ़ाने का हुकम दिया है।
  3. तमं सुन्नतो में दही एक मुश्त तक बढ़ाने की सुन्नत इतनी कवी है की उल्माये किराम इसे वाजिब कहते हैं।
  4. दधी बढ़ाना तमं नबियों की सुन्नत है इसे मुंडाना या एक मुश्त से काम करना हराम है।
  5.  ये है दादी जबकी एक मुश्त से काम हो तो इस्तेमाल करना या काम करना किसी के इमाम मसाला हनफी शफायी मालिकी वा हम्बली के नाजदीक जजेज नहीं है और पूरी तरह से चांददी देना से मुख्नास का यानि हिंदुस्तान में।

एक मुट्ठी दधी सुन्नत है:

 अब्दुल्लाह इब्न उमर से रिवायत है: मारवान इब्न सलीम अल-मुकाफ़ा' ने कहा: मैंने इब्न उमर को अपने हाथ से अपनी रोटी पकड़े हुए देखा और जो मुट्ठी भर से अधिक था उसे काट दिया।
 

 अमर बिन शुऐब से रिवायत है:

 अपने पिता से, अपने दादा से जो वह पैगंबर (ﷺ) अपनी दाढ़ी से लेगा; उसकी चौड़ाई और उसकी लंबाई से।

 दाढ़ी के अतराफ वा जावानीब की इस्लाह कर्ण:

 नबी ए करीम ﷺ के खिदमत में अबी कहाफा आए और इनकी दधी (दाढ़ी) बिखरी हुई थी तो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इनकी दधी के अतराफ इशारा फरमाकर फरमाया काश तुम इसे कटाते और इस्लाह करते।

 "कुछ लोग छोटी सी दादी रख लेते हैं ये पूरी दधी नहीं दधि की लंबी शरीयत और अहदियों की रोशनी से सबित है की दही की लंबी एक मुट्ठी के बराबर हो, यानि थोड़ी से मिलाकर मुट्ठी पकडे फिर उसे ज्यादा एक ताकत है यही अमल सहाबा ए किरम का था"

 नोट- कुछ लोग ये सोच कर दधी नहीं रखते हैं उनसे कोई गुना हो जय जिससे दधी की बे-अदाबी होगी जबकी ये एक सिरफ या सिर्फ शैतानी वासवास है जो आपको वाजिब को अदा करने से रोकता है और आपको गुनाहगर बनता है... बरय महरबानी दधी राखे क्यूकी दधी रखना वाजिब है और साथ ही ये मर्द की जीनत भी होती है।


 "इस पोस्ट को शेयर जरूर करे और दुआ करे की अल्लाह हम दही रखने की तौफीक अता करे..."
 आमीन!

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