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Sameem khan
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इमाम महदी (अ.स.) का जहूरी / Imam Mahdi (A.S.) ka Zahoor
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन मसूद से मरवी है के नबी करीम (ﷺ) ने इरशाद फरमाया: "कयामत कयम नहीं होगी हट्टा के मेरे अहले चारा से एक आदमी अरब का हकीम बन जाएगा जिस का नाम मेरे नाम जैसा होगा।"
📕 सुनन तिर्मिज़ी; किताब उल फ़ितन; बाब मा जा फ़िल महदी २२३०
📕 अहमद 471/1, अबू दाऊद 4282, हकीम 488/4,
इब्ने हिब्बान 236/15, तिबरानी कबीर 133/10133
सहीह जामी अल सगीर 5180
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन मसूद ए मैरवी है के अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने इरशाद फरमाया: “दुनिया में एक ऐसा दिन बाकी है (जिसे अल्लाह तआला तवील कर देगा और) में मेरे अहले बैत में से एक आदमी को (इमाम बना कर) जहीर है करेंगे जिस का नाम मेरे नाम जैसा और जिस के बाप का नाम मेरे बाप के नाम जैसा होगा।”
📕 अबू दाऊद; किताब उल मेहदी 4283
मसनद अहमद १२०/१
हदीस: हज़रत अबू सईद (आरए) से मारवी है के अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने इरशाद फरमाया: "कयामत क़ायम नहीं होगी हट्टा के रू-ए-ज़मीन ज़ुल्म ओ ज़ायदती से भर जाएगी”, कहा फ़िर। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "फिर मेरी नाक या अहले बैत में से (एक आदमी) निकलेगा जो जमीन को इस तरह अदल ओ इंसाफ से भर दूंगा जिस तरह ये ज़ुल्म-ओ-जोर से भारी परी थी।"
सुनन तिर्मिज़ी; किताब उल फ़ितन; बाब मा जा फिल मेहदी २२३२
अबू दाऊद; २४८५, इब्ने माजा; ४१३४, हकीम; 600/4
हदीस: हज़रत अबू सईद (आरए) फरमाते हैं के हम नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की वफ़ात के बाद हदसात (के) जहूर) का खड़ा लहक हुआ तो हम ने अल्लाह के रसूल (ﷺ) से पुचा तो आप (ﷺ) ने फरमाया: "महदी मेरी उम्मत में जहीर होंगे। जो पंच साल या सात साल या 9 साल तक (जिंदा) रहेंगे।”
हदीस: हज़रत अली (आरए) से मारवी है के अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने इरशाद फरमाया: "महदी मेरे अहले बैत से होगा जिस की एक ही रात में अल्लाह तआला इस्लाह फरमा दूंगा।"
मसनद अहमद 102/1, इब्ने अबी शाइबा 678/8
📕 इब्ने माजाह; किताब उल फितान; बाब खुरूज अल महदी 4136
हदीस: हज़रत उम्मे सलमा (आरए) फरमाती है के मैंने अल्लाह के रसूल (ﷺ) का ये इरशाद गरमी सुना है के "महदी मेरी नाक में (हजरत) फातिमा (आरए) की औलाद में से होगा।"
📕 अबू दाऊद; किताब अल मेहदी 4278
इब्ने माजा 4086
हदीस: हज़रत अबू सईद (आरए) से मारवी है के अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने इरशाद फरमाया: “मेरी उम्मत में महदी का जहूर होगा। वो (मुसलसाल) सात या 8 साल (तक जिंदा) रहेगा।”
📕 मुस्तद्रिक हकीम; किताब अल फ़ितन वाल मलहिम ५५७-८/४
सिलसिला अल साहेहा ३३६/२
हदीस: हज़रत जबर बिन अब्दुल्ला से मरवी है के मैंने रसूल अल्लाह (ﷺ) से सुना, आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमाते वे के "मेरी उम्मत का एक गिरोह कयामत तक हक पर ग़ालिब (क़याम) रहते हुए क़तल करता रहेगा। नीज़ फरमाया: फ़िर ईसा अलैही सलाम नज़िल होंगे तो मुसलमानो का अमीर (महदी) कहेगा आईये नमाज़ परहें। मगर ईसा अलैही सलाम फरमायेंगे, नहीं बिला शुभा अमीर तुम से ही होगा। ये अल्लाह ताला ने उम्मत को शरफ बख्शा है।"
सही मुस्लिम; किताब उल ईमान; बाब नुज़ूल ईसा इब्ने मरियम हकीमा ३९०
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मारवी है के अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने इरशाद फरमाया: “तुम्हारा क्या हाल होगा जब (नमाज ए फजर के वक्त) इसा एएस तुम में नज़िल होंगे और तुम्हारा इमाम तुम्हारे में से होगा।"
सहीह बुखारी; किताब अल अहदीस अल अंबिया बाब नुजूल ईसा इब्ने मरियम अलैहे अलसलाम 3449
हदीस: हज़रत अबू सईद (आरए) से मारवी है के रसूल अल्लाह (ﷺ) ने इरशाद फरमाया: "हज़रत ईसा अलैही सलाम जिस इमाम की इक्तादा में नमाज परहेंगी वो (इमाम) हम (अहले बैत) में से होगा।"
साहिह जम अल सगीर 219/5
नोट:
इमाम महदी का ज़हूर नबी करीम (ﷺ) की सच्ची पेशनगोई की रोशनी में एक मुसलमान हकीकत है जो तहल वक़िया नहीं हुई मगर कबाल अज़ कयामत का वकू हो कर रहेगा।
इमाम मेहंदी के ज़ुहूर के वक़्त साड़ी दुनिया फ़ित्ना, क़ताल ओ घरत और कश्त ओ खून की ऐसे लापता में होगी के वैसी आज तक अहले ज़मीन ने देखी न होगी।
इमाम मेहंदी का नाम खटीम उल नबियान (ﷺ) के नाम जैसा और इन के वलीद का नाम नबी करीम (ﷺ) के वलीद के नाम जैसा होगा और ये याद रखिए के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के मरूफ नाम 2 वे एक मुहम्मद और दूसरा अहमद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और ये दोनो कुरान मजीद में भी मजबूर है लिहाजा इमाम मेहदी मूसा का नाम मुहम्मद या अहमद बिन अब्दुल्ला होगा।
इमाम मेहदी नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)
के अहले चारा यानी हज़रत फ़ातिमा (आरए) की औलाद (हज़रत हसन (आरए) या हज़रत हुसैन आरए) से होंगे। इमाम मेहदी का ज़हूर हज़रत ईसा ए.एस. से पहले होगा और हज़रत ईसा (अ.स.) की इकतादा में नमाज अदा करेंगे।
सहीं में इसरातन जबके दीगर कुतब हदीस में सराहतन इमाम मेहंदी का ज़िकर मौजूद है जिस के इकरार से मुफ़र नहीं। लिहाजा जिस तरह कुरान का बाज हिदा बाज की तफसीर करता है इसी तरह बाज अहदीस बाज की तशरीह करता है।
अल्लाह तआला अचानक एक ही रात में इमाम मेहंदी की इस्लाह फरमा देगा। हदीस के 2 माफूम हो सकते हैं।
इमाम मेहंदी में कुछ अयूब ओ नकूस होंगे जिन की एक वह रात में अल्लाह इस्लाह फरमा देगा। हाफिज इब्ने कसीर आर एच ने इसी को इख्तयार किया है। और ये राजे मलूम होता है।
खिलाफत का तस्वर इन के वहीम ओ गुमान में भी ना होगा मगर अल्लाह ताला एक ही रात में इन खिलाफत के लिए तय कर के मंजर आम पर ले आएगा।
जहूर महदी के बाद हर तराफ खैर ओ बरकत, माल ओ दौलत, अमन ओ अमान और खुशहाली का ऐसा सुहाना समान होगा के तारीख इंसानी की मिसाल पैश करने से कसीर होगी।
इमाम मेहंदी ज़हूर के बाद ज़िदा से ज़िदा 9 साल और कुम अज़ कुम 5 साल ज़िंदा रहींगे।
इमाम मेहंदी कोई नबी या रसूल नहीं होंगे बाल्की एक नेइक सालेह और मुजाहिद हुक्मरन होंगे जो मनहज ए नबवी (ﷺ) के मुताबिक शरीयत मुहम्मदी का अह्या और खिलाफत इस्लामिया को कयाम करेंगे।
हाफिज इब्ने कसीर (आरए) फार्मते हैं इमाम मेहंदी का जहूर मशरकी मुमालिक से होगा समरा के घर से नहीं। जैसा के बाज़ (शियोन) का ख्याल है। अहले मशरिक इन की मूसादत करेंगे और इन की हुकुमत कयम करेंगे। बैतुल्लाह के नाजदीक की में चारा की जाएगी।
इमाम मेहदी जिस दिन ज़हीर होंगे वो दिन आम दिनो से खास तवील होगा और ये भी जहूर मेहदी आर.एच. की एक निशानी होगी।
इमाम मेहदी बैतुल्लाह में पाना लंगे क्यों कुछ लोग बग़रज़ जंग इनकी तराफ़ पैश क़ादमी करेंगे मगर अल्लाह तआला इन सब को बैतुल्लाह पोहंचने से पहले बैदा में ज़मीन के एंडर धनसा देगा।
मज़कोरा लश्कर का ज़मीन में धन जाना इमाम मेहंदी की मेहंदी के लिए जलती पर पूंछ का काम दूंगा और लोग
बैतुल्लाह में इमाम मेहदी चारा लेंगे जैसा के एक हदीस में है की तरफ इशारा है के हजरत अबू कितादा फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया "रुकन यामानी और मुक़म इब्राहीम के दर्मयान एक आदमी (इमाम मेहदी) की चारा की जाएगी।" [मसनद अहमद २९१/२]
नबी करीम (ﷺ) ने इमाम मेहंदी की बोहोत सी सिफ़ात ओ अलमत बयान फरमा दी है जिन की रोशनी में इमाम मेहंदी की पहचान उम्मत के लिए आसन है।
तहल जहूर मेहदी की निशानी जहीर नहीं हुई अगरचाय तारीख में बोहत से लोगों ने मेहंदी मूसूफ से मुतालिक हदीस को गलात पहचानवा देकर मेहदवियात का धोंग रचाया मगर में अल्लाह ने ता'आला के किज़ाब ओ इफ्तारा को नुमाया कर दिया और आज भी अगर कोई खुवाहंखुवाह ऐसी जुर्रत करने की कोशिश करेगा तो दुनिया में ही जलील ओ रूस होगा। मेहंदी की आलमत ओ सिफत याद रखें।
खुरूज ए दज्जाल (मसीह विरोधी का आगमन) / Khurooj e Dajjal (Arrival of the Antichrist)
1. दज्जाल का खुरोज़ क़यामत की 10 बड़ी निशानियों में से होगा
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा बिन असीद गफ़री (R.A) फरमाते हैं के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तशरीफ ले जबके हम आप में गुफ्तगु कर रहे हैं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पुचा: क्या गुफ्तगु कर रहे हो? लोगों ने कहा हम कयामत के बारे में गुफ्तगु कर रहे हैं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कयामत हरगिज कयम नहीं होगी जब के तुम कयामत से पहले 10 निशानियां न देख लो फिर आप ने (इनहे) बयान फरमाया:
(१) धुवन, (२) दज्जाल, (३) डब्बा (जानवर), (४) सूरज का मगरिब से तुलू होना, (५) हजरत ईसा एएस का नजूल, (६) यजुज मजूज का खुरूज, (७) मशरिक, (८) मगरिब और (९) जज़ीरा तुल अरब में ३ मुक़ामत पर (कुछ लोगों का) ज़मीन में धंसना। (१०) और सब से आखिर में यमन से आगे निकलेगा जो लोगों को मैदान-ए-मेहसर की तरफ हांक ले जाएगी।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2901
2. मसीह दज्जल तमम दज्जलों और कज़ाबों का सरदार होगा
हदीस: समरा बिन जंदाब (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: अल्लाह की कसम! क़यामत क़याम नहीं होगी हट्टा के 30 क़ज़ाब निकलेंगे, सब से आखिरी काना दज्जाल होगा जिस की बाई आंख कान होगी।”
मसनद अहमद 22/5
सुनन अल कुबरा; किताब उल सलात 339/3
मजमा अल जावेद 448/2
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (आरए) फरमाते है के में ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इरशाद सुना के "मसीह दज्जाल से पहले 30 या इस से ज़ियादा झूठे ज़हीर होंगे (और ये कुछ) ।"
मसनद अहमद 139/2, अबू याला 5706
मजमा अल जावेद किताब उल फितन 642/7
हदीस: हज़रत इमरान बिन हसीन (र.अ.) फरमाते है के मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुना के पदैश ए आदम ए.एस से ता कयामत दज्जाल से बड़ा कोई अमर (फ़ितना) नहीं।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2946
3. दज्जाल बड़े घुससे से खुरूज करेगा
हदीस: हज़रत हफ़्सा (आरए) से मैरवी है के रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल इस घुस्से के साथ खुरूज करेगा जिस में वो मुबताला होगा।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2932
4. दज्जाल की शकल ओ सूरत:
हदीस: हज़रत अनस (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "हर नबी ने अपनी उम्मत को काने और झूठे (दज्जल) से दरया है, खबरदार वो काना है। है (दज्जल) की आंखों के दरमायण काफिर लिखा होगा।"
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7131
हदीस: एक रिवायत में है के आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "मैं तुम ऐसे बात बताता हूं जो दोसरे अंबिया ने नहीं बताता वो (दज्जल) काना होगा जबके तुम्हारा रब काना नहीं।"
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7127
हदीस: हज़रत अनस बिन मलिक (आरए) से मैरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया दज्जाल काना हे, इस की आंखों के डरमायण काफिर लिखा होगा फिर आप ने हिज्जा कर, फा बताया ) जिसी हर मुसल्मान परहेगा।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 7365
हदीस: एक रिवायत में है के: "इससे हर मुसलमान परहेगा खूवाह वो परा लिखा हो या अनपढ़ हो।"
मसनद अहमद २६१/३
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल की दिन आंख कान और अंगोर के दान की तरह उभरी हुई होगी।"
सही बुखारी किताब उल फ़ितन ७१२३
हदीस: इब्ने अब्बास (आरए) फरमाते है के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से दज्जाल के मुतालिक पुचा गया तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “इस का रंग इंतहै सफ़ैद, जिस्मंत्र बोहत बारा है। और सर के बाल दरख्त की हरि शकों की मनिंद हैं।”
मसनद अहमद 467/1
۞ हदीस: एक रिवायत में है के "दज्जल की आंख शीशे की तरह (सबाज़ी मयेल) है।"
मसनद अहमद 164/5, इब्ने हिब्बन 206/15
मजमा अल जावेद 650/7
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (R.A) से मैरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “दज्जल बानों आंख से काना होगा, घनी बालों वाला होगा और इस के साथ और आ जाएगा। इस की आग (दारहकीकत) जन्नत है और की जन्नत (दरसाल) आग है।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2934
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन अब्बास (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया के "दज्जल काना और इंतहै सफ़ैद और चमकदार (रंगत) वाला होगा। क्या का सर अफ़ी सनप जैसा (छोटा मगर ख़ूब मुथरीक़) होगा। वो लोगों में से अब्दुल उज्जा बिन कतर (काफिर) के साथ सब से ज़िदा मुशहबत रखता होगा।”
मसनद अहमद 2991
हदीस: हज़रत सफ़ीना जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ग़ुलाम वे, बयान करते हैं के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “दज्जल ब्येन आंख से काना होगा और दिन हुई (ऐबदार) होगी जबके इस के दो आंखों के दर्मयान काफिर तहरीर होगा।”
मसनद अहमद 281/5
अल मौजम अल कबीर 6445
मजमा अल जावेद ६५४/७
हदीस: हज़रत हिशाम बिन अमीर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “दज्जल का सर पिच्ली जनीब से गांजा गांजा सा होगा। जिस ने कहा के तू मेरा रब है वो तो फिटने में मुबताला हुआ और जिस ने कहा तू झोटा है मेरा रब तू अल्लाह है जिस पर मैं भरोसा करता हूं तू वो इसे कुछ नुक्सन ना दे सकेगा।”
मसनद अहमद 28/4
हकीम किताब उल फ़ितन 554/
मजमा अल जावेद ६५८/७
5. क्या दज्जाल आदमी होगा?
हदीस: हज़रत इबादा बिन समत (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “मैंने तुम्हें दज्जाल के बारे में खबर दी है और मुझे खड़ा है के एक तुम इसे पहचान है। मसीह दज्जल एक पास्ता कद आदमी होगा, घुंघराले बाल होंगे, आंख कानी और मिट्टी हुई न बोहत ऊंची हुई और न बोहत धांसी हुई होगी फिर भी अगर तुमे तो उसके लिए तो तुम्हारा हो तो शक ओ शुभा है।"
सुनन अबू दाऊद; किताब उल मलहिम 4312
सहीह जम अल सगीर 317
हदीस: हज़रत फ़ातिमा बिन्त क़ैस (आरए) (एक तवील हदीस में जो मुतसिल बाद में मज़कोर है) फरमाती है के: “………. मैं (दज्जल का) जासूस होना तुम सुन रहा हूं की तरह चलो जहां एक आदमी तुम्हारे खबर का मुश्ताक है तुम वो सब वहां गए और कहते हैं के वहां हम ने इतना बड़ा आदमी देखा और ऐसा ही कैसा है हुआ आदमी पहले कभी नहीं देखा था।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2942
6. क्या दज्जाल जिंदा है?
हदीस: हज़रत फ़ातिमा बिन्त क़ैस (आरए) फिरती है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) नमाज़ से दूर हो कर मिम्बर प्रति तशरीफ़ ले और मुस्कुराते हुए फरमाया के हर बंदा अपनी जाए नमाज़ पर बैठा रहा है। मैंने तुम्हें क्यों जमा किया है? लोगन ने कहा अल्लाह और इस का रसूल ही बेहतर हैं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "कसम अल्लाह की मैंने तुम्हें तरघीब ओ तारीब (वाज़ ओ नसीहत) के लिए इकथा नहीं किया है, लिए जामा किया है के तमीम दारी जो इसै है कि मैं इसै था वो है दखिल हो चुका है ने मुझे मसीह दज्जल के बरे में वैसा ही खबर दी जैसा मैं तुम्हें दिया करता हूं।
इस ने कहा है के वो लाखम और जजम कबीले के 30 आदमियों के साथ बड़ी जहां में सवार था के महिना भर बाहरी मौजियां इन की कश्ती से खेलती रही हट्टा के में कहीं कहीं कहीं पर एक लगा जा सवार हो कर जजीरे में जा सीधे जहान में घने बालों वाला ऐसा जंवर मिला जिस के चांद या दम की शनाख्त न मुमकिन थी। उन लोगों को पुचा के तू कौन है? जंवर ने कहा के मैं जासूस हूं, उन्होन कहा किस का जासूस? इस ने कहा के शक की तरफ चलो जो "हिरण" में तुम्हारे खबर का मुश्ताक है। तमीम (आरए) ने कहा के जब जनवर ने शेखों का नाम लिया तो हम डरे के कहीं ये शैतान न हो।
तमीम (आरए) ने कहा के फिर हम तैज तैज चलते हुए हिरण (सुनसान जग) में दखिल हुए तो वहां हम ने इतना बड़ा इंसान देखा के वैसा कदवर मगर जकरा हुआ आदमी कभी न देखा था। इस के दो हाथ बगीचे के पीछे और पौन तख्तों के साथ मजबूर लोहे से बंद हुए हैं।
हम ने कहा कम्बख्त! तू कौन है? क्या ने कहा के मेरी खबर तो हसील कर ही लोगे ये बताओ के तुम कौन हो? लोगों ने कहा के हम अहले अरब है और एक समंदरी जहां में महान ए सफर वे के समंदर में तुग्यानी आ गया जिस की वजह से माहा भर हमारा जहां मोजोन का शिकार रहा फिर हम में जजरे पोहन के हैं जज़ीरे में दखिल हुए तुम हमें (ये) जंवर मिला जिस के बालो की कसरत की वजा से चांद या धक्का मलूम नहीं होते थे हम ने से पुचा कमबख्त तू कौन है? तू इस ने कहा: मैं जासूस हूं तुम हिरण में मुजूद आदमी की तरफ चलो वो तुम्हारी खबर का बड़ा मुश्ताक है तो हम जल्दी से तुम्हारे तारफ चले आए और हम तो (जानवर) को शैतान समाधान हैं।
दज्जाल ने कहा के मुझे बेसन (शाम) के नखलिस्तान की खबर दो? हम ने कहा की कौनसी खबर मतलूब है? क्या ने कहा के क्या वो फल लता है? हम ने कहा है। इस ने कहा अनकरीब वो फलदार नहीं रहेगा। अच्छा मुझे बहार-ए-तबरिया की खबर दो? क्या मैं पानी रावन दावा है? हम ने कहा हां बहुत रावन दीवान है। इस ने कहा के अनरीब वो खुश हो जाएगा। क्या ने कहा मुझे ज़घर (शाम) के चश्मे के मुतालिक बताओ क्या मैं पानी मुजूद है और क्या लोग के पानी से खेत बारी करते हैं? हम ने कहा है में पानी भी मुजूद है और लोग के पानी से खेत बारी कर रहे हैं। क्या ने कहा के मुझे अरब के नबी की खबर दो? हम ने कहा के वो मक्का से हिजरत कर के यासरब (मदीना) जा पोहंचा है। इस ने कहा क्या अहले अरब ने से लड़ी की है? हम ने कहा है। क्या ने कहा फिर नतीजा क्या रहा? हम ने कहा के वो नबी अपने गिर्द ओ पैसे में ग़ालिब आ गया है। क्या ने कहा क्या ऐसा हो चुका है? हम ने कहा है। इस ने कहा के लोगों के लिए है की इतनी ही बेहतर है। और मेरे मुतालिक सुनो मैं मसीह दज्जल हूं, कई मुझे खुरूज की इजाजत दी जाएगी और मैं 40 दिनों में पूरी रू-ए-जमीन को फतह कर लूंगा अलबत मक्का और तैयबा (मदीना) मुझे पर हराम है मैं है रुख करूँ तो वहन तलवार लहरे फरिश्ते मुझे रोक देंगे जो वहन पहरे पर मुकरार होंगे।
हज़ूर नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपना आस मिम्बर पर 3 मरतबा तकरेते हुवे फरमाया: “याही तैयबा (मदीना) है। (और वो दज्जाल है) क्या मैं तुम्हारे इस के बारे में बताता नहीं था?” लोगों ने कहा क्यों नहीं। फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया के "मुझे तमीम की बात तो अच्छी लगी के ये मेरी है खबर के मुशाबे है जो मैं तुम्हें दज्जाल और मक्का ओ मदीना के बारे में बताता था।"
खबरदार! वो (दज्जल) दरिया-ए-शाम में या दरिया-ए-यमन में है? नहीं बच्चे वो मशरिक की तरह हे, वो मशरिक की तरफ हे, वो मशरिक की तरफ है और आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मशरिक की तरफ अपने हाथ से भी इशारा फरमाया।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 119-2942
सुनन अबू दाऊद 4325
जेम तिर्मिज़ी २२५३
सुनन निसाई 3547
सुनन इब्ने माजा 2045
7. क्या नबी करीम (ﷺ) ने दज्जाल को देखा था?
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन अब्बास (आरए) से मैरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया शब ए मैराज में मैंने मूसा ए.एस को देखा वो गंडूमी रंगत, दरज़ क़द, और घुंघराले बालन वाले। ऐसा लगता था जैसे कबीला शानोवाह का कोई शक हो और मैंने इसा ए.एस को देखा जो दर्म्याणय कद, मायाने जिस्म, सुरख ओ साफैद रंगत और सीधे बालो वाले वे। मैंने जहांम के दरोघे को भी देखा और दज्जाल को भी देखा। आयात को (देखा) जो अल्लाह तआला ने मुझे दिखाई थी (सूरह सजदा में इसी का ज़िक्र है) में मिंजुमला। लिहाज़ा आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इन से मुलक़त के बारे में किसी किसी क़िस्म का शक ओ शुभा न करे।”
सहीह बुखारी; किताब बड़ा अल हल्क 3239
8. दज्जाल की शोबदे बाजियां
हदीस: हज़रत नवास बिन समन से मैरवी है के एक सूबा नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दज्जाल का तज़कारा किया तो उसे हकीर और इस के फ़िटनी को अज़ीम कहा (या कभी ऊंचा और कभी की) हट के बात गुमान हुआ के शायद दज्जल इन दरख्तों के झंड में आ गया हो फिर हम बवक्त शाम आप की तरफ गए तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पुचा क्या माजरा है? हम ने अरज़ किया के आप ने दज्जाल के बारे में अच्छी तरह आगह किया था और हम समझ के शायद वो इसि नखलिस्तान में है।
आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “मुझे दज्जाल से बरह कर फिटनो का तुम पर अन्देशा हो सकता है? अगर दज्जल मेरे जेटी जी निकला तू मैं के दरमियान रुकावत बन कर तुमे हैं के शर्र से बचा लूंगा और अगर वो मेरे बाद जहीर हुआ तो तुम में से हर एक शक्स बजात ए खुद एक हर एक शक्स बाजत ए खुद एक खिलाड़ी है जो एक खिलाफ है। पर मेरा खलीफा और निगहबान होगा। दज्जाल एक घुंघराले बालों वाला नौजवान है जिस की एक आंख उबरी होगी और वो अब्दुल उज्जा (काफिर) के मुशाभे होगा लिहाजा जो शक भी तुम में से दज्जल को देखे वो सूरह अल कहैफ तिल की। दज्जाल शाम और इराक के दरमायण रैघिस्तानी रास्ते से खरिज होगा और दिन बनेगा फिसाद बरपा करेगा।
ऐ अल्लाह के बंदो! ईमान पर सबित कदम रहना। साहबा (आरए) ने पुचा के दज्जाल कितना अरसा जमीन पर कयाम करेगा? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: 40 दिन जिन में से एक दिन एक साल के बराबर, एक दिन माह बराबर, एक दिन हफ्ते के बराबर होगा। फिर बाकी दिन आम दिनो जैसे होंगे। (यानी एक साल 2 माह और 2 हफ्ते)।
साहबा (R.A) ने अरज़ किया या रसूलअल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! जो दिन साल बराबर होगा मैं हम नमाज कैसे अदा करेंगे? क्या एक वह दिन की नमाज़ें हमें काफ़ी होंगी? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: नहीं बालक तुम है (साल) का (आम दिनो के साथ) अंदाज कर लेना।
साहबा (R.A) ने अरज़ किया या रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की चाल ढल कैसी होगी? फरमाया: बारिश की तरह जिसे हवा पीछे से ढकेलती है। फिर वो एक क़ोम के पास जा के होंगे कुफ्र की दावत देंगे जैसे वो कबूल कर लेंगे तो आसमान को हुकम दूंगा और आसमान बरसेगा फिर वो ज़मीन को हुकम देगा तो ज़मीन जे फिर जाने पर , थून पहले से कुशादा और कूखियां खूबसूरत फूल होंगे।
फिर दज्जाल एक क़ोम के पास आ कर इसे कुफ्र की दावत दूंगा मगर वो कर दूंगा तो दज्जल इन से पलट जाएगा और वो लोग कहत और खुश साली का शिकार हो जाएगा लेकिन कुछ मेरे हाथ में होगा दज्जल बंजार और विरान जमीन पर निकलेगा और इसे हुकम देगा, ऐ जमीन अपने खजानों निकल दे तो जमीन के खानाजे है के पास है तारह जमा हो जाएंगे जिस तरह शेहद की मखियां मलका माखी है।
फिर दज्जाल एक जवान को बुला कर इस के 2 टुकरे कर डालेगा जिस तरह निशान दो ले लिया फिर वही पुकारेगा तो वो जवान चमकते धमकते और हैश बसश चेहरे के साथ (जिंदा हो जाएगा।) हिम्मत आसन अल्लाह तआला मशरिक की तरह शहर देमिश्क में सफ़ेद मीनारे के पास ज़र्द कापरोन में मालबोस हज़रत ईसा इब्ने मरियम ए.एस.
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन; बाब ज़िकर अल दज्जाल 110, 2937
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (आरए) फरमाते है के मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुना के "जब दज्जाल खुरूज करेगा तो के साथ पानी (जन्नत) और आग (जहाँनम) होगा वही लोग आग लगेगा। है और जिसे लोग पानी समझेंगे वो डरसकीकत जलाने वाली आग है अगर तुम में से किसी को का सामना हो तो वो में दखिल हो जो आग देखता है क्यों के वो दारसाल ठंडा पानी है।”
सही बुखारी किताब अहदीस अल अंबिया ३४५०
हदीस: हज़रत मुग़ीरा बिन शोबा (आरए) फिरते हैं के दज्जाल के बारे में जिस क़दर समाधान में नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से पुछे है और किसी ने मुजे (तू) आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तुम्हारे इस से क्या खतरा है? मैंने अरज़ किया के लोग कहते हैं के पास रोटेशन का पहाड़ और पानी की नहीं होगी? फरमाया के वो अल्लाह ताला पर इस से भी (काई दरजा) आसन है।”
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7122
हदीस: हज़रत अबू सईद (र.अ.) से मरवी है के एक दिन रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हम दज्जाल के मुतालिक एक तवील हदीस सुनाई। हज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की हदीस में ये भी था के दज्जल आएगा और इस के लिए न मुमकिन होगा के वो मदीना के घर (रस्तों) में दखिल हो खातिर चुनचे वो मदीना मुनव्रा के ज़रीब पर होगा। फिर इस दिन के पास एक मर्द है जो मोमिन जाएगा जो अफजल तारेन लोगों में से होगा और वो दज्जल से कहेगा के मैं शहादत देता हूं के तू वही दज्जाल है जिस के बरे में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) थी।
दज्जाल (लोगन) से कहेगा के अगर मैं इस शाखा को कताल कर दूं और फिर जिंदा कर देखता हूं तो क्या फिर भी तुम्हारे मेरे (रब होने के) मुआमले मुझे शक होगा? लोग कहेंगे नहीं। चुना वो इस शक्स को कताल कर देगा और फिर जिंदा कर देगा। अब वो शक कहेगा के वल्लाह मुझे तेरे बारे में पहले इतनी बसेरात न थी जितनी अब आ पड़ी है (कुंजी तू वकाई दज्जाल है) पर दज्जाल फिर इसे ऐसा करना होगा लेकिन मारबा वो इसे है।”
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7132
9. दज्जाल दुनिया का सब से बड़ा फिटना
हदीस: हज़रत इमरान बिन हसीन (आरए) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से मैंने सुना के "पैदाइश ए आदम ए.एस से ता कयामत दज्जाल से बड़ा कोई मुआमला (फ़ितना) नहीं है।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2946
हदीस: एक रिवायत में है के: "पैदाइश-ए-आदम ए.एस से वकू ए कयामत तक फिटना-ए-दज्जल से बड़ा कोई फिटना नहीं।"
मसनद अहमद 29/4
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (आरए) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास दज्जाल का ज़िक्र किया गया तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “फ़ित्ना दज्जाल की बनिस्बत तुम्हरे फ़त्ना दज्जाल की बनिस्बत तुम्हरे (के तुम जरूरी बह्मी फिटना ओ फिसाद बरपा करो गे) गुजरात लोगन में से जो कोई इस फिटने से महफोज रहा वो दरसाल महफोज है और आज तक दुनिया में जो कोई छोटा या बड़ा फिटना रोनुमा होता है वो दज्जाल से। "
मसनद अहमद 482/5
मजमा अल जावेद ६४६/७
हदीस: हज़रत अनस (र.अ.) से मैरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “जो भी नबी माबूस हुआ है ने अपनी उम्मत को काने कज़ाब (दज्जल) से जरूर दरया है। खबरदार! वो काना है और तुम्हारा रब काना नहीं है और इस की आंखों के डरमायण काफिर लिखा होगा।"
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7131
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाब बिन हवाला (आरए) से मैरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “जो शक्स ३ (हदसात के) मवाक़ों पर महफ़ोज़ रहा वो निजात पा गया। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने ये बात 3 बार दुहराई। (फिर फरमाया)।
(१) मेरी मौत, (२) दज्जल, (३) और दीन ए हक पर क़ायम फ़याज़ खलीफ़ा का क़तल।
मसनद अहमद १५३/४
इब्ने अबी साईबा ६४९/८
हाकिम १०८/३
हदीस: हज़रत समरा (आरए) से मैरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “अल्लाह की कसम कयामत कयम नहीं होगी हट्टा के ३० झूठे निकले और सब से आखिरी में ( किन का सरदार) की ब्यान आंख ऐबदार होगी।”
मसनद अहमद 22/5
सुनन अल कुबरा; किताब उल सलात उल खुशूफ 339/3
मजमा अल जावेद 448/2
हदीस: हज़रत सफ़ीना जो आन्हज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ग़ुलाम वे बयान करते हैं के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें ख़ुतबा दिया तो फरमाया: आंखों से काना होगा जबके आंखें पर गोश्त ऊंचा होगा और दो आंखों के डरमायण काफिर लिखा होगा।
जब वो खुरूज करेगा तो के साथ 2 वाडिय़ां होगी एक जन्नत और दूसरी आग होगी की आग तो जन्नत होगी लेकिन की जन्नत आग होगी। इस के साथ 2 फरिश्ते होंगे जो 2 नाबियन के रूप में होंगे अगर मैं चाहों तो के और में के आबा के नाम भी बता सकता हूं। एक है (दज्जल) के दिन तारफ और दूसरा बनाने वाली और ये आजमिश के लिए होंगे।
दज्जाल कहेगा। (लोगो!) क्या मैं तुम्हारा रब नहीं? क्या मैं तुम्हें जिंदा नहीं करता, मौत नहीं देता? तू एक फरिश्ता कहेगा तू झूठ बोलता है मगर है (फ्रिशते) की बात दूसरे फरिश्ते के सिवा और कोई नहीं सुनेगा और है का साथी फरिश्ता जवाब में कहेगा हां तेरी बात सची बात है, रब ये झूठा लोग है सुनेंगे तो ये समझेंगे के शायद ये दज्जाल को सच्चा कह रहा है (हलंके दूसरा फरिश्ता पहले फरिश्ते की बात है, के दज्जाल झूठा है, की तस्दीक कर रहा था) और ये आजम होगा।
फिर दज्जाल मदीना की तराफ बरेगा मगर इस मदीना में दखले की इजाजत नहीं मिलेगा तो वो कहेगा ये फुलां आदमी (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बस्ती है फिर वो शाम के तराफ चला par) दज्जाल को ईसा (एसा एएस के हाथन) हलक करेंगे।
मसनद अहमद 281/5
अल मौजम अल कबीर 6445
मजमा अल जावेद ६५४/७
हदीस: हज़रत समरा बिन जुंदाब (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल निकलने वाला है, इस की आंखें आंख कानी होगी जिस पर सख्त लोथरा होगा और बर को तंदुरुस्त कर दूंगा, मुर्दे को जिंदा कर दूंगा और लोगों से कहेगा के मैं तुम्हारा रब हूं।
जिस शक्स ने इकरार किया के तू मेरा रब है वो तो फिटने में मुबताला हुआ और जिस शक्स ने कहा का मेरा रब अल्लाह है हट्टा के पर जान कुर्बान कर गया तो वो दज्जल के फिट से बचा लिया और कोई और है ना कोई आजब है। जब तक अल्लाह की मर्ज़ी होगी दज्जल ज़मीन पर रहेगा फ़िर हज़रत ईसा बिन मरियम एएस नज़िल होंगे जो मगरिब की तरफ से आएंगे मुहम्मद करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की तस्दीक करेंगे और इनके दीन (इस्लाम) पर क़याम करेंगे और इनके दीन (इस्लाम) क़यामत क़यम होंगे।
मसनद अहमद 19/5
मौजम अल कबीर 6918
मजमा अल जावेद ६४८/७
10. दज्जाल की जन्नत और जहन्नुम
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (आरए) फरमाते है के में ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुना के "जब दज्जाल खुरूज करेगा तो के साथ पानी (जन्नत) और आग (जहानम) होगा जो मिलेगा लोग पानी है और जिस तरह से लोग पानी समझेंगे वो डर्कीकत जलाने वाली आग है अगर तुम में से किसी को का सामना हो तू वो में दखिल हो जो आग दिखलाई देता है क्यों के वो दारसाल ठंडा पानी है।
सही बुखारी किताब अहदीस अल अंबिया ३४५०
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (R.A) से मरवी है के लोग रसूल करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से खैर के बरय में सॉल किया करते हैं वे जबके में शार के मुतालिक पुचा करता था…. आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया के फिर दज्जाल निकले गा इस के साथ एक नहीं और एक आग होगा। जो शक की आग में दखिल होवा है के लिए अजर ओ सवाब वजीब हो गया और इस के गुनाह माफ कर दिए गए और जो शक है कि नहीं में दखिल हुआ पर गुनाह लाड दिए गए और का अजर मीता दिया गया है।
मसनद अहमद 9/5
हाकिम 479/4
इब्ने हिब्बन 209/15
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (R.A) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “दज्जल बानें आँख से काना है, घनय बालन वाला है। इस के साथ एक जन्नत और एक आग (जहांम) होगी पास की आग तू (दरसाल) जन्नत है और की जन्नत (फिलहकीकत) आग है।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2934
11. दज्जाल से बचने के लिए लोग पहाड़ पर पाना लेंगे
हदीस: हज़रत उम्मे शारिक (आरए) से मरवी है के ओन्हो ने नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सुना के "लोग दज्जल से बचने के लिए पहाड़ों में चुप जाने गए। उम्मे शरीफ़ (रा) कहने लगे या रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)! क्या दिन अहले अरब कहां होंगे? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया के "वो इस दिन बोहत कम होंगे।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2945
12. दज्जाल मशरिक की तराफ खुरासन से निकलेगा
हदीस: हज़रत फ़ातिमा बिन्त क़ैस से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “ख़बरदार! वो (दज्जल) शाम या यमन के समंदर में है। नहीं बच्चे वो मशरिक की तरफ हे, वो तू मशरिक की तरफ हे, वो तू मशरिक की तरफ है। और आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने हाथ से मशरिक की तरफ इशारा भी किया।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2942
हदीस: हज़रत अबू बकर सेदिक (र.अ.) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें हदीस बयान फरमाई के दज्जाल मशरिक की तराफ से एक ऐसे ज़मीन से नमोदर होगा जिसे जैसा है खुरासान कहा है। है (दज्जल) की जोड़ी करने वाली कुछ ऐसे कौमेन होंगे जिन के चेहरे कूटी हुए (या मोती) ढालों की तरह (चपटे) होंगे।”
सुनन तिर्मिज़ी; किताब उल फ़ितन 2237
इब्ने माजा 4123
हदीस: हज़रत अनस (र.ए.) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल अस्भान के (इलाक) याहुदा से खुरूज करेगा और इस के साथ 70 हजार याहुदी होंगे।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2944
हदीस: हज़रत अनस (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "असभान के 70 हज़ार याहूदी दज्जाल की फरमानबरदारी करेंगे जिन पर सबज़ (या सयाह) चालें होंगी।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2944
हदीस: हज़रत नवास बिन समन (आरए) फरमाते हैं "एक सुबा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दज्जाल का ज़िक्र किया ... ...
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
मज़कूरा रिवायत में बजहिर इख़तलाफ़ ओ ताज़ा मलूम होता है के दज्जाल शाम और इराक के डरमायण से निकलेगा या मशरिक से या खुरासन वगैरा से। इस की तफ़सील इंशा अल्लाह "नोट" में आएगी।
13. जिन लोगों का पसंद (पसंदीदा) नेता दज्जाल होगा!
हदीस: हज़रत अनस (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "असबहन (असफ़हान) के 70 हज़ार याहूदी दज्जाल की परवी करेंगे जिन पर सयाह (या सब्ज़े)।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2944
हदीस: हज़रत अबू बकर साइडिक (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें हदीस ब्यान फरमाई के "दज्जल एक मशरकी इलके से खुरूज करेगा जिसे खुरासन (मुजूदा आ अफगानिस्तान) . है (दज्जल) की परवी कुछ ऐसे कोआमीन करेंगे जिन के चेहरे कूटी हुई ढालों की तरह अध्याय (या ताह बा ताह डालों जैसे मोटे) होंगे।”
हाफिज इब्ने कसीर फार्मते हैं के इस से मुराद तुर्क (तुर्कमस्तानी) लोग हैं। [अल निहया 117/1]
हदीस: हज़रत अनस बिन मलिक (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “मक्का और मदीना के सिवा हर शहर को दज्जाल रौंद डालेगा। इन (मक्का ओ मदीना) की हर गली पर सफ बस्ता फरिश्ते खरे होंगे जो इन की हिफाजत करेंगे फिर मदीना की जमीन 3 मरतबा कनपेगी जिस से एक काफिर और मुनाफिक को अल्लाह ता'आला में से बाहर निकलेगा। ) देगा।"
सही बुखारी किताब फजैल अल मदीना १८८१
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)
मजमा अल जावेद 224/7
अल मुअजम अल कबीर ३०७/२
14. दज्जाल खुदाई का दावा करेगाre
हदीस: हज़रत समरा बिन जुंदाब (आरए) से मरवी है के अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "अल्लाह की क़सम क़यामत क़याम नहीं होगी यहाँ तक के 30 क़ज़ाब निकलेंगे, सब से ठीक में काना आंख कान होगी। वो ज़म (बतिल) में मुबताला होगा के वो अल्लाह है लिहाज़ा जिस शक्स ने पर ईमान ला कर है की तस्दीक और तबादरी की इसे है के अमल सालेह का कोई फैदा नहीं पोहनचेगा और जिस शक्स ने एक इस कुफ्र किया है झुटलया तू इस से है के अमल का बिलकुल मुहाजा नहीं होगा।”
मसनद अहमद 22/5
मजमा अल जावेद ४४८/२
सुनन अल कुबरा 339/3
हदीस: अबू कालाबा फरमाते है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के किसी सहाबी ने हमें हदीस बयानों के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “(ऐ सहाबा र!) ) निकलेगा इज का सर पिचली जानी से गंज पान का शिकार होगा वो कहेगा के मैं तुम्हारा रब हूं। जिस शक्स ने कहा के तू झूठा है हमारा रब नहीं बालक हमारा रब तो अल्लाह है इसी पर हम तवाकल करते हैं इसी की तरफ रुजू करते हैं और अल्लाह ताआला से तेरी पाना मांगते है तो वो यही कुछ नुक्कसन नहीं है। ।"
मसनद अहमद 509/5
हाकिम; किताब उल फ़ितन 554/4
मजमा अल जावेद; किताब अल फ़ितन 658/7
हदीस: हज़रत नवास बिन समन (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने एक सूबा दज्जल का ज़िक्र किया…। “दज्जल एक क़ोम के पास आएगा और वे (अपनी रबोबियत पर ईमान लाने की) दावत दूंगा तो लोग इमान ले आएंगे और इस के मती फरमान हो जाएंगे। दज्जाल आसमान को हुकम दूंगा तो वो बारिश बरसेगा और जमीन को हुकम दूंगा तो वो नबतात उगाएगा।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
हदीस: हज़रत अबू सईद (र.अ.) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने एक दिन दज्जाल के बरय में तवील हदीस सुनाई। जिस में ये था (के एक आदमी को दज्जाल के फौजी पक्का कर कहेंगे क्या तू हमारे रब को मानता है? आदमी जवाब दूंगा) मैं गवाही देता हूं के तू वही दज्जाल (कजाब) है जिस के बारे में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें हदीस सुनाई थी। दज्जाल (लोगन) से कहेगा, क्या ख्याल है अगर में क्या कताल कर के जिंदा कर दूं तो मेरे (रब होने के) मुतालिक कोई शक रहेगा? लोग कहेंगे नहीं तो दज्जल इसे कातल करेगा फिर जिंदा करेगा तो वो जिंदा हो कर कहेगा अल्लाह की कसम मुझे तू पहले से ज़ियादा याक़ीन हो गया के तू ही दज्जल है। दज्जाल दुबारा इसे कताल करना चाहेगा मगर कताल न कर देगा।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2938
15. दज्जाल से बचने का तारिका
हदीस: हज़रत इमरान बिन हसीन (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "जो शक्स दज्जल के (खुरूज के) मुतालिक का सुनने वो से दूर रहे बिलाशूबा आदमी अपने लेने ईमान पर थे साथ है के पास जाएगा तो इस के अजीब ओ गरीब शोबडे देखते देखते हैं का जोड़ा बन जाएगा।”
मसनद अहमद 577/4
अबू दाऊद किताब उल मलहिम 4319
हाकिम ५७६/४
हदीस: एक रिवायत में है के आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने 3 मरतबा फरमाया: "दज्जल से दूर रहना क्यों के जब आदमी है के पास जाएगा तो इस के शोबदे देख कर की तस्दीक कर देगा।"
मसनद अहमद 589/4
हदीस: हज़रत अबू दर्दा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "जिस शक्स ने सूरह अल कहफ़ की इब्तदाई 10 आयत हिफ़ाज़ कर लीन तू वो दज्जल के फिटने से ।"
सहीह मुस्लिम; किताब सलात अल मुसाफिरीन 809
अबू दाऊद किताब उल मलहिम 4323
मसनद अहमद 499/6
हदीस: हज़रत नवास बिन समन से मरवी है के एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दज्जाल का तज़कारा फरमाया… .. मुशाभत दे सकता हूं और जो शक तुम में से दज्जाल का सामना करे वो सूरह अल कहफ की इब्तदई आयत की तिलावत करे।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
۞ हदीस: हज़रत हाशाम बिन अमीर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया:…….. “जिस शक्स ने (दज्जल से) कहा, तू मेरा रब है वो तो फिट से दोचार हुआ और जिस शाखा ने कहा तू झूठा है। मेरा रब तो अल्लाह है और मैं इसि पर भरोसा करता हूं तो दज्जल इसे कोई नुक्सान नहीं पोहंचा पैदा करेगा" या आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया के "इससे फिटना नुक्सान नहीं दूंगा।"
मसनद अहमद 28/4
हकीम किताब उल फ़ितन ५५४/४
अब्दुल रजाक 395/11
16. दज्जाल की बेबसी की नज़र:
१६.१ अपने मथे पर लिखा काफिर (काफ, फा, रा) न मीता सेगा
हदीस: हज़रत अनस (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "हर नबी ने अपनी उम्मत को काने और झूठे (दज्जल) से दरया है, खबरदार वो काना है। है (दज्जल) की आंखों के दरमायण काफिर लिखा होगा।"
सहीहो बुखारी; किताब उल फ़ितन 7131
हदीस: एक रिवायत में है के आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "इस की दो आँखों के दर्मयान काफिर लिखा होगा फिर आप ने हिज्जा कर के बताया (काफ, फा, रा) जिस तरह से हरगा।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2933
16.2 दज्जाल की दो आंखें ऐबदार होंगी
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर (आरए) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल की दहनी आंख कान होगी गोया वो अंगूर का (उभरा हुआ) दाना है।"
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7123
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (R.A) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल बानें आंख से काना है।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2934
(बज़हीर दोनो हदीसियन एक दूसरे के मुतज़ाद मलूम होती है लेकिन अल्लाह कभी ओस की ब्यान आंख कानी बना दूंगा और कभी दहनी। ये उस ओएस की बेबसी की नज़र होगी।)
16.3 मक्का और मदीना में दखिल नहीं हो सकताho
۞ हदीस: हज़रत फ़ातिमा बिन्त क़ैस (आरए) से मरवी है के दज्जल के बारे में तवील हदीस है जिस में (दज्जल कहता है के) "मैं 40 दिनो में सारी ज़मीन रौंद डालोंगा अलबता मक्का और मदीना दो हरम दोनो जब कभी में मुझमें से किसी एक की तरफ दखिल होने का इरडा लेकर निकलूंगा तो तलवार लहरता हुआ फरिश्ता मेरा इस्तकबल करेगा जो मुझे में (में दखिल होने) से रोकेगा और इन (दोनो शहरस्तेय पर हर बार)
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2942
16.4 कटल नहीं कर पायेगा
हदीस: हज़रत अबू सईद (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया दज्जाल के खुरूज के वक्त एक मोमिन शक्स की तरह निकलेगा जिसे हम दज्जल के पकौजी पाचेंग करेंगे। है? मगर इसके लिए पर वो इसे कताल करना होगा तो में से बाज कहेंगे क्या तुम्हारे रब (दज्जल) ने किसी को कटल करने से मन नहीं किया! तू वो इसे दज्जाल के पास ले जाएंगे। जब वो मोमिन दज्जाल को देखेंगे तो कहेगा लोगो! याही वो दज्जाल है जिस के फिट से हमें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मुतनाबा फरमाया था। दज्जाल इज का पैत और पुशत लंबी कर के अपने फौजों से क्या खोब पिता करवाएगा और कहेगा अब ईमान लता है? तू वो मोमिन कहेगा के तू झूठा मसीह है।
दज्जल इस के सर से पांव तक आरी से 2 टुकरे करवा दूंगा और इन के दरमायण तहलेगा फिर कहेगा: उठ तू वो मोमिन (जिंदा) उठ खड़ा होगा।
दज्जाल फिर पूछेगा हां! अब मुझे पर ईमान लता है? तू वो मोमिन कहेगा के अब तू मुझे पक्का याक़ीन हो गया के तू दज्जाल है और लोगन से कहेगा, लोगो! ये मेरे बाद किसी पर मुसलत नहीं हो पायेगा तो दज्जल इसे ज़िबा करने के लिए पकाएगा मगर है (मोमिन) का गला हंसली (की हदी) तक तनबे का बन जाएगा और दज्जल इसे करेगा तो ऐसा कर सकता है . लोग समझेंगे के इस ने आग में फेंक दिया है हलंके इसे जन्नत में डाला जाएगा। अल्लाह रब उल आलमीन की निगाह में ये मोमिन सब से बड़ा शहीद होगा।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2938
16.5 दज्जाल सचे और मुखलिस मुसलमान को नुक्सान नहीं पोहंचा जाएगा
۞ हदीस: हज़रत हिशाम (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "जिस शक्स ने दज्जाल (की रबोबियत से इनकर अल्लाह करता है) से कहा के तू झूठा है मेरा जी रब पर में तवाकल करता हूं (रब्बी अल्लाह अलैहे तवाकलत) तो दज्जाल इसे कुछ नुक्सान नहीं पोहंचा जाएगा।”
हाकिम; किताब उल फ़ितन वाल ममलाहिम ५५४/४
मसनद अहमद 421/5
मजमा अल जावेद ६५८/७
17. दज्जाल के फिट से अल्लाह की पना
हदीस: हज़रत आयशा (आरए) से मरवी है के "अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपनी नमाज़ में दज्जाल के फ़िटनी से पाना मंगा कर्ता वे।"
सहीह बुखारी; किताब उल अज़ान 833
हदीस: हज़रत आयशा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपनी नमाज़ में ये दुआ परहा करते हैं वे (बाज़ रिवायत में है के तराह पनाह मंगा करते हैं) पनाह मांगता हूं, और मसीह दज्जल के फिट से तेरी पाना मांगा हूं, और जिंदगी के फिट से, और मौत के फिटनो से तेरी पाना मांगा हूं, ऐ अल्लाह मैं गुन्नाह और कर्ज से तेरी पाना मांगा हूं।
सहीह बुखारी; किताब उल अज़ान 832
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (र.अ.) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “जब तुम आखिरी तशहूद (परह कर) दूर हो जाओ तो 4 चीजों से अल्लाह की पाना मंगा करो। (१) क़ब्र के अज़ब से, (२) जहाँम के अज़ब से, (३) ज़िंदगी और मौत के फ़िटनो से
और (4) मसीह दज्जाल के शर्र से।
सहीह मुस्लिम; किताब उल मस्जिद 588
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (आरए) से मरवी है के बिलासुबा नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) नमाज़ के आखिर में (बाज़ रिवायत के मुताबिक तशहद के आखिर में) 4 चीज़ों से पाना मंगा करते हैं। "(१) इलाही मैं अज़ाब ए क़बार से, (२) अज़ाब ए जहांम से, (३) जहरी ओ बाती फिटनो से
और (4) अंधे, काने, झूठे (मसीह दज्जल) से तेरी पाना मैंगा हूं।"
मसनद अहमद 301/1
18. बरगाह ए इलाही में दज्जाल की हदीस "परका" बराबर भी नहीं
हदीस: हज़रत मुग़ीरा बिन शोबा (आरए) फिरते हैं के दज्जाल के बारे में ज़िना नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से मैंने पुचा है इतना किसी ने नहीं पुचा और अहज़रत (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) क्या नुक्सान पोहनचेगा? मैंने अरज़ किया के लोग कहते हैं के इस के साथ रोटेशन का पहाड़ और पानी का दरिया होगा। फरमाया: के वो अल्लाह पर है से भी ज़िदा आसन है। (यानी क़ुदरत इलाही के मुक़बले में दज्जाल की क्या हसरत? और दज्जाल को भी अल्लाह ताआला ही ये ढील दी होगी ता के लोगों की आजमिश हो।)
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7122
19. दज्जाल कितने दिन जमीन पर फिरेगा
हदीस: हज़रत नवास बिन समन से मरवी है के एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने दज्जाल का तज़किरा किया……. हम ने कहा: या रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दज्जाल कितना अरसा थेरेगा? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमायाः 40 दिन। एक दिन साल बराबर होगा, दूसरा माह बराबर, तीसरा हफ्ता बराबर होगा और फिर बाकी आया आम दिनों के बराबर होंगे (यानी एक साल 2 माह और 2 हफ्ते)। हम ने कहा या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! जो दिन साल के बराबर होगा क्या हम में एक दिन की है (5) नमाज़ कफी होगी? (या पुरे साल की परहना होंगे) आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: नहीं (5 नहीं) बालक है दिन का (साल के बराबर) अंदाज़ कर लेना (और साल भर की नमाज़ें औरज़ाय के साथ अदा करते रहना।)
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन उमरो (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "मेरी उम्मत में दज्जाल निकलेगा और 40 (तक) रहेगा।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2940
हदीस: अब्दुल्ला रावी फरमाते है के "मैं नहीं जनता के 40 दिन है या 40 साल है या 40 रातें है या 40 माहेने हैं।"
हदीस: एक रिवायत में है के "दज्जल 40 दिन तक ज़मीन पर फिरेगा।"
मसनद अहमद 541/5
मजमा अल जवायद 659/7
फतह अल बारी 112/13
20. दज्जाल मक्का और मदीना में दखिल नहीं हो सकता
हदीस: हज़रत फ़ातिमा बिन्त क़ैस (आरए) से मरवी है के……. मैं तुम्हारे अपने मुतालिक अगाह करता हूं। मैं मसीह दज्जल हूं और अनगिनत मुझे खुरूज की इजाजत दी जाएगी तो मैं निकलूंगा और जमीन पर चलूंगा और मैं मक्का ओ मदीना के सिवा हर बस्ती (शहर) को 40 रातों में मैं करूंगा . जब कभी मैं में से किसी एक की तरफ दखिल होने के इराडे से निकलूंगा तो तलवार लहराता हुआ फ्रिजा मेरा इस्तकबल करेगा जो मुझे में (मैं दखिल होने) से मन करेगा और इन (2 शाहरों) के लिए जो हर में होगा। हिफ़ाज़त करेंगे।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2942
और हदीस: हज़रत अनस बिन मलिक (आरए) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल मदिनी तक आएगा तो यहां फरिश्तों को इस की हिफाजत पर मामूर पायेगा नाज चुना है ना वह ताऊन।"
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7134
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (R.A) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “दज्जल मशरिक की तरह से ख़रीज होगा और मदीना का रुख करेगा। यहां तक के जब वो औहद (पहाड़) के पास पोहनचेगा तो फरिश्ते इसका रुख मुल्क शाम की तरह फिर देंगे और शाम में ही ये (दज्जल) हलक होगा।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल हज 1380
हदीस: अब्दुल्ला बिन शफीक (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने लोगों को खुतबा देते हुए फरमाया: “खलासी वाला दिन, तुम्हें क्या मालूम खलासी वाला दिन कौनसा है? ३ कि मरतबा ये जुमला दुहराया फिर फरमाया: दज्जल निकलेगा और औहद पहाड़ पर चार कर मदिन की तरफ देखेंगे तो अपने साथियो से पूछेगा के क्या तुम ये साफद महल देख रहे हो ये अहमद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तू हर रास्ते पर तलवार सोनते हुए फरिश्ते को मिलेगा फिर वो (मदीना के क़रीब) दालाली ज़मीन पर पढ़ाओ करेगा। मदीना 3 मरतबा हरकत (जलजला) पेड करेगा जिस के नतेजे में हर मुनाफिक, मुनाफिका और फासिक दज्जल की तरफ निकल जाएगा। पास यही है (तुम अल खालस) खलासी वाला दिन।
मसनद अहमद 455/4
हकीम किताब उल फ़ितन 474/4
मजमा अल जावेद 661/3
21. दज्जल बैतुल्लाह और बैतुल मकदास में देख नहीं हो सकता
हदीस: हज़रत समरा बिन जंदाब (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "अल्लाह की कसम! क़यामत है वक़्त तक क़याम नहीं होगी हत्ते के 30 झूठे ज़ाहिर होंगे जिन में सब से आखिरी काना दज्जाल होगा जिस की आंखें कान होगी... बैतुल मकदास में (मोजोद) मुसल्मानो का मुहसरा करेगा तो (मुसलमानो) को छायांकित जलालों का सामना होगा बिलाखिर अल्लाह ता'आला दज्जाल और इस के लश्कर को तबह ओ बरबाद कर देगा।"
मसनद अहमद 22/5
सुनन अल कुबरा 339/2
अबू याला 325/2
22 दज्जाल के लिए सब से सच लोग कौन से सबित होंगे?
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (र.अ.) फरमाते हैं के 3 बतों की वाजा से जो में ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से सुनी हैं, मैं बनो तमीम से हमें मुहब्बत करता हूं। नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इन के बारे में फरमाया था के ये लोग दज्जाल के मुक़बले में मेरी उम्मत में सब से ज़िदा सख़्त मुख़लीफ़ सबित होंगे। फिर (अबू हुरैरा (आरए) ने) कहा के बनो तमीम के यहां से जकात का माल आया तो नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया के हमारे क़ोम की ज़कात है। बनो तमीम की एक औरत क़ैद हो कर हज़रत आएशा (र.अ.) के पास (ग़ुलाम) थी तू नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने में से फरमाया इसे आज़ाद कर दो ये हज़रत इस्माइल ए.एस की औलाद में से है।
सहीह बुखारी; किताब उल अताक 2543
हदीस: एक रिवायत में है के (एक मरतबा) बनो तमीम वालों की जकात में तकीर हुई तो एक आदमी ने (तंजान) कहा के ये बनो तमीम वाले तो जकात बजने में स्थिरता कर देते हैं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इस की बात सुनी तो फरमाया: "बनो तमीम तो मेरी बड़ी प्यारी क़ोम है के बारे में हमेश अच्छी बात ही किया करो ये लोग (से लंबे लोगों के लिए लोगों ने कभी नहीं देखा है) ) वाले सबित होंगे।"
मसनद अहमद 230/4
मजमा अल जवायद 16/10
23. दज्जाल और इस के लश्कर की हलाकात
हदीस: हज़रत नफे बिन उत्बा (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: तुम (मुसलमान) अहले अरब से लड़ोगे और अल्लाह तआला तुम फतह से नवाजेगा फिर तुम फारिस (ईरान) से लड़ोगे और अल्लाह तआला तुम फतह और फरमाएगा फिर तुम अहले रूम से लड़ोगी और अल्लाह तआला तुम फतह से हमकानार करेगा फिर तुम दज्जल से लड़ोगे और अल्लाह तआला तुम इस पर फतह और करेगा।"
हज़रत नफे फरमाते है के "जबर! हमारे ख्याल में दज्जाल रूम की फतह से पहले नहीं निकला सकता।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2900
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "दज्जल मरकाना (मदीना के क़रीब एक वादी) की डालदली ज़मीन पर पढ़ाओ करेगा तो इसमें से तराफ़ और जाएगी हट्टा के आदमी अपनी बीवी, मां, बेटी, बहन, चाची (फूफी वगैरा) के पास जाएगा और वे रस्सी के साथ बंद दूंगा के वो दज्जाल के पास ना जा पोहनचें। में फिर अल्लाह तआला मुसल्मानो को दज्जल पर मुसलत कर दूंगा और मुसलमान दज्जल और इस के लश्कर को कताल करेंगे यहां तक के अगर कोई याहूदी दरख्त या पत्थर की ऊट में चुपेगा तो वह होगा शकर ओ है इसे कताल करो।
मसनद अहमद 91/2
अल मौजम अल कबीर 307/67
मजमा अल जावेद ६६४/७
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: क़यामत क़याम नहीं होगी हट्टा के मुसल्मान याहुदियों से जंग करेंगे और इनहे कत्ल करेंगें पता होगा कि फिर क्या करेंगे ले गा तू वो दरखत और पत्थर पुकार उठे गा, ऐ मुसलमान! ऐ अल्लाह के बंदे! यहां आ, याहूदी मेरी ओट में है इस कटल कर दाल, अलबता घरकाड़ (कांटे दार दारखत कीकर जैसा) नामी दरख्त (ना बोले गा) क्यों के ये यहां का दरखत है।
सहीह बुखारी; किताब उल जिहाद 2925
हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन मसूद (आरए) फरमाते है के (मुसलमान रोमियोन से खुराइज जंग करेंगे और फतह हसील करेंगे अभी मल ए घनीमत तकसीम कर रहे होंगे के) एक फरयाद्रस (जोर से गालने वाला) ऐ गा और कहां के अहले ओ अयाल में जहीर हो चुका है तू वो सब कुछ वही फंक कर (इस की तरह) मुतवाजा होंगे और 10 शाहसवारों को खबर लेने के लिए रवाना कर देंगे। अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: में (शहसवरों) के नाम में, के अबो अजदाद के नाम और में के घोरों के रंग से बखुबी आगा होन और ये दिन रोये जमीं पर सब से भान हैं।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन २८९९
۞ हदीस: हज़रत अब्दुल्ला बिन मसूद (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: मिराज की रात मेरी मुलाकत हज़रत इब्राहीम, मूसा और ईसा अलैहिम असलम से हज़ तो कयामत की बात चल निकली आस की तरह मुआमला कर दिया तू ओंहो ने कहा के मुजे है (कयामत के वकू) का इल्म नहीं। फिर बात मूसा ए.एस की तराफ पोहंची तू ओंहो ने भी लैलमी का मुजहरा किया। बात पोहंची तू ओन्हो ने कहा के कयामत के अनुसार फिर एसा के अनुसार वकू का खतमी इल्म अल्लाह तआला के सिवा (हम में से) किसी को नहीं अल्ताबता अल्लाह तआला ने जो मेरे साथ (दुनिया में दोबारा बजेने का) वादा फरमाया है वो ये है के दज्जल निकले गा और मेरे पास 2 चरण होंगे तू जब वो मुझे देखा गा तू है तारह पिघले गा जिस तरह देखता है। अल्लाह तआला इसै हलक फरमा देंगे यहां तक के शजर ओ हजार पुकार उठेंगे के मेरे नेचे काफिर है इदर आओ और इसे मार डालो। इस तरह अल्लाह तआला इन (सब) को हलक कर देंगे।
मसनद अहमद 469/1
इब्ने माजा ४१३२
हाकिम ५३४/४
हदीस: हज़रत नवास बिन समन (आरए) से मरवी है के एक सूबा अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)
ने दज्जाल का तज़कारा फरमाया…… “वो घुंघराले बालों वाला नोजवां है। इस की एक आंख फूली हुई है गोया मैं इसे अब्दुल उज्जा बिन कतर (काफिर) के मुशाभा कह सकता हूं। तुम में से जिस शाखाओं का इस से सामना हो वो है पर सूरह कहफ की इब्तदई आयत परहे…। दज्जल एक क़ोम के पास ऐ गा और इनहे (अपनी रबोबियत प्रति) इमान लाने की दावत दिन गा वो प्रति ईमान ले आईन गी तू दज्जल आसमान को हुकम दिन गा और असम्बारिश नज़िल करे गा फ़िर नबवत वो है उगाये जी…. वो एक बंजार ज़मीन को हुकम दिन गा के वो अपने ख़ज़ाने निकल दिन तू वो ख़ज़ाने निकल कर है ताराह दज्जल के पेचे जाने जिस तरह (शहीद की) माखियां अपनी मलका की तरफ जाति। फिर वो एक तनोमंद नोजवां को बुलाए गा और तलवार के साथ है के 2 टुकरे कर के कटल कर दिन गा फिर उसे आवाज दूंगा तो वो (जिंदा हो कर) हैश बशाश चेहरा के साथ की तरफ पलटेगा। इसि आसन अल्लाह तआला हज़रत ईसा ए.एस. को नज़िल फरमा देंगे…. जिस काफिर तक हज़रत ईसा ए.एस. की सांस पोहनचेगी वो कतल हो जाएगा और में की नज़र जहां तक पोहनचेगी और वो दज्जाल को तलाश करेगा, मुक़म लड्डल पर है।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
24. खुरुज-ए-दज्जल के बारे में अहम् नसीहतें
(१) खुरूज दज्जल आलमत कयामत में से एक बोहत बड़ी आलमत है जिस का जहूर तहल वकिया नहीं होवा।
(२) हज़रत ईसा ए.एस. की तरह दज्जल को भी मसीह कहा गया। हज़रत ईसा एएस तू इस लिए हैं, आपके हाथ फिरने से बीमर तंदुरूस्त हो जाते हैं वे अलबता दज्जाल को इस लिए हैं कि एक आंख कानी होगी या 40 दज्जल को इस पर गंभीर है। दंडनता फिरेगा.
(३) हज़रत ईसा ए.एस को मसीह अल हुदा और दज्जाल को मसीह अल ज़लाला कहा जाता है क्यों के ये लोगन को अपने शोबदों से गुमरा करेगा।
✦ (4) दज्जल, दजल से है जिस के मानी खलत मलत करना और दज्जाल को दज्जल इस लिए कहा गया है के वो हक को बात के साथ साथ खराब कर के लोगों को धोखा देगा, इसी बिना कह दिया जाता है।
(5) कयामत से पहले कमो बैश 30 दज्जल और कज़ाब ज़हीर होंगे जिन में से कुछ तू तारीख में दजल ओ फरैब के सहेरे साजा कर रक़म हो छुके है जबके कुछ ला महल अभी जहीर होंगे कभी होगा
(६) दज्जाल बड़े घुस्से से खुरोज़ करेगा मगर इज़ान ए इलाही के बगैर इस का खुरोज़ मुमकिन नहीं है।
(7) दज्जाल ज़िंदा है जिस की जाये वक़ू अल्लाह अलीम उल ग़ैब के सिवा कोई नहीं जनता। गो के जुगराफिया महिरीन ने कुर्रा अर्जी का छप्पा छप्पा चान कर शाहरों मुल्कों और बर'अजमो की सूरत में है की हदूद मुताएं कर राखी है मगर इन के इल्म ओ नजर में कहीं सही नहीं है जबे है जो ज़िंदा होने के साथ कुर्रा अर्ज़ी पर किसी जजीरे में लोहे की जंजीरों से क़ैद है जैसा के हज़रत तमीम दारी (आरए) और देगर लोगों ने किसी जजीरे में से मुलक़त की और नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की ना सिरफ तस्दीक फरमाई बालक तम सहाबा करम (आरए) को जमा कर के मुलकत का अजीब ओ गरीब वकिया खुद में के गोश फरमाया। बहर सूरत अल्लाह तआला के इल्म ओ क़ुदरत के मुक़बले में हम इंसानों के इल्म ओ मुताले को तरजीह नहीं दे सके जिस से क़ुदरत इलाही का अबताल ओ इंकर लाज़िम आए।
(8) दज्जाल एक आदमी है जो नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को शब ए मेराज और ख़्वाब में दिखलाया।
(९) दज्जाल के मथे पर काफिर लिखा होगा जिस को हर शाखा बा आसनी परहेगा खूवाह वो अनपढ़ ही क्यों ना हो।
(10) दज्जाल के शोबदों में ये भी शमील है के कभी वो अपनी रंगत सुरख और कभी साफ कर के जाहिर करेगा। और कभी अपनी ब्यान आंख कनि और कभी दयिन आंख कनि जहीर करेगा। अल्बाटा इस की दोनो आंखें कभी एक साथ एक नहीं हो सकती है।
✦ (11) दज्जाल के पास जो भी तकत होगी वो सब अल्लाह की तरफ से आजमिश के लिए होगी। वर्ना दज्जाल की हदीस अल्लाह के सामने मचार के पार के बराबर भी नहीं।
(१२) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) खुद भी दज्जाल के फिटने से पाना मांगते वे और लोगन को भी दज्जाल के फिट से पाना मांगे की तलकीन करते थे।
(१३) दज्जाल की बाज़ारी नज़र आने वाली जन्नत दरहक़ीक़त जहाँम होगी और उस की जहानम असल में जन्नत होगी। जिस को वो आग में फंकेगा वो जल जाए गा लेकिन फिल्हकीकत अल्लाह की आग (जहानम) से महफोज हो जाएगा। और दज्जल प्रति ईमान ला कर की जन्नत में दखिल होने वाला अल्लाह की तय करदा असली जन्नत से महरूम हो जाएगा।
(१४) बाज अहदीस में खुरोज़ दज्जल का मुक़म खुरासान, बाज़ में मशरिक, बाज़ में आसबहन, बाज में शाम और इराक का डरमायनी रास्ता ज़िकर किया गया है।
(15) इमाम कुरतुबी आरएच फार्मते है के: बाज़ अहदीस में है के वो खुरासन से आएगा जबके बाज़ में है, तबबीक इस तरह है के इसकी खुरूज की इबताड़ा खुरासन जैसा है। रुख करेगा जिस के लिए शाम और इराक का दरमायनी इलका इस्तमाल करेगा।
(16) ये इलाक़े मशरिक की तराफ़ी
है। सबित हुआ के दज्जाल मशरिक की तरह खुरासन के इलाके आसबहन के मुहल्ले याहुदा से खरिज होगा और हिजाब की तराफ शाम और इराक का डरमायनी रेगस्तानी इलके का सफर करेगा।
(17) दज्जाल के फिट से महफोज रहने के लिए नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की कहानी पर अमल करना चाहिए।
(18) दज्जाल से दूर रहना।
(19) फ़ितना दज्जाल से अल्लाह तआला की पाना मंगना।
(20) सूरह कहफ की इब्तदई या आखिरी आयत की तिलवत करना
(२१) दज्जल ४० दिनो में सारी ज़मीन पर ग़लबा हैसील कर लेगा लेकिन मक्का और मदीना इस के शर से महफ़ोज़ रहेंगे इस लिए अगर हो तो ऐसे वक्त में मक्का या मदीना की सकूनत हसील की जाये।
(22) फ़िटना दज्जाल की लापता में आने वाले सब से ज़ियादा याहुदी फ़िर आजमी, तुर्की, जाहिल औरतें और मुनाफ़िक़ ओ काफ़िर होंगे।
(२३) हज़रत ईसा ए.एस जो दोबारा नज़िल हो छुके होंगे अपने साथी मुसलमानों के साथ मिल कर दज्जल और इस के लश्कर से जंग करेंगे। जंग ए अज़ीम में दज्जल मुक़म-ए-लुद्द पर हज़रत एसा ए.एस. के हाथों हलक होगा।
ईसा अलैही सलाम का नुज़ूल (यीशु मसीह का आगमन) / Isa Alaihi Salam ka Nuzool (Arrival of Jesus Christ)
74.1 नुज़ूल ईसा अलैहे सलाम कुरान मजीद की रोशनी में
हदीस: इरशाद बारी ताला है: "वो (ईसा ए.एस) भी सिरफ बंदा ही है जिस पर हम ने एहसान किया और इसे बनी इज़राइल के लिए निशानी बनाया। अगर हम चाहते तो तुम्हारे जग फरिश्तों को जमीन का जानशीन कर देते और याकीनन वो (ईसा ए.एस) कयामत की निशानी हैं। तू लोगो में शक ना करो।”
सूरह अल ज़ुखरफ़ 59-61
हदीस: रास अल मुफ़सरीन अब्दुल्ला बिन अब्बास (आरए) मज़कोरा आयत की तफ़सीर में फरमाते हैं: बिलशुबा वो क़यामत की आलमत है। यानी हज़रत ईसा इब्ने मरियम ए.एस क़यामत से पहले ज़हीर होंगे।
मसनद अहमद 329/4
📕 इब्ने हिब्बन २२८/१५
और इन (याहूदियों) के इस क़ॉल की वजह से के हम ने अल्लाह के रसूल मसीह ईसा बिन मरियम (एएस) को क़तल कर दिया (अल्लाह ने को मालून कर दिया)। हलंके ना तो उन्हो ने इसे कताल किया न सूली चरहाया बाल्के इन के लिए वैसी सूरत बना दी गई थी।
बिलाशुबा ईसा एएस के मुतालिक इख़तलाफ़ करने वाले शक ओ शुभ में है, ये तकमीनी बातें के सिवा कोई याकीनी इल्म नहीं और ये याक़ीनी अल्लाह (बात) है के उन्हो ने इसे कतल नहीं तफ़ही किया है अल्लाह तआला बड़ा ज़बरदस्त और पूरी हिकमतों वाला है। अहले किताब में से कोई भी ऐसा नहीं बचेगा जो हज़रत ईसा ए.एस की वफ़ात से पहले उन पर ईमान लिए और वो रोज़ ए क़यामत उन पर गवाह होंगे।❞
सूरह निसा 4:107-109
७४.२ नुज़ूल मसीह अलैहे सलाम अहदीस की रोशनी में
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: क़यामत क़याम नहीं होगी हट्टा के तुम्हारे दरमायण हज़रत इसा बिन मरियम ए.एस हकीम और आदिल होंगकर। वो सालीब को तो डालिएन जी, ख़ानज़ीर को क़त्ल करेंगे, जिज़िये (और जंग) का ख़तमा करेंगे और फिर माल बकसरत होगा हट्टा के इसे कबूल करने वाला कोई नहीं होगा।
सहीह बुखारी; किताब उल मुजालिम 2476
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “तुम्हारे नसीब कैसे (अच्छे) होंगे जब तुम्हारे दर्मयान इसा बिन मरियम एएस नज़िल होंगे और तुम्हारा इम्तहान होंगे) तुम में से होगा। (यानी इमाम महदी आरएच)।"
सहीह बुखारी; किताब अहदीस अल अंबिया 3449
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया: क़सम है इस ज़ात की जिस के हाथ में मेरी जान हे, ज़रूर उतरिएन गी मरयम जैसा बना इब्ने फिर वो सालीब तोरियन जी, खानज़ीर को कताल करेंगे, जजिए को मोकूफ कर देंगे फिर माल ओ डोलत की कसरत होगी हट्टा के इसे कोई लेने वाला नहीं होगा और (हलत ये होगा के) एक बहुत दुसनिया कर देगा होगा फिर हज़रत अबू हुरैरा (आरए) ने फरमाया के अगर चाहो तू ये आयत पर कर देख लो।
“और अहले किताब में से कोई भी ऐसा नहीं बचेगा जो हज़रत ईसा ए.एस. प्रति ईमान न लाए में की मौत से पहले।”
सहीह बुखारी; किताब अहदीस अल अंबिया 3448
74.3 सिफ़त ओ मुक़ाम ए नज़ूल ए ईसा अलैहे सलाम Sal
हदीस: हज़रत नवास बिन समन (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: फ़िर अल्लाह तआला हज़रत (ईसा) मसीह इब्ने मरियम ऐज़ को बेझ देंगे और वो देमिश्क़ उनके से के में साफैद मीनार के पास जर्द रंग के 2 कपड़ों में मालबोस 2 फ्रिजों के बजून प्रति अपने हाथ रखे हुए उतरेंगे। जब वो सर झुकें गी तू ऐसा महसूस होगा के कतरे तपक रहे हैं और जब सर उठाये तू मोती की तरह कतरे ढलते नजर आए गी। इन की बिना की हवा जिस काफिर तक पोहनचायेंगे वो जिंदा न बचेगा जब के बिना में निगाह तक पोहनेंगे फिर इब्ने मरियम ए.दज्जाल का पता करेंगे और लुड के दरवाजे पर इसे जा पकरेंगे और करेंगे।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
७४.४ वक्त नजूल इसा अलैहे सलाम
हदीस: हज़रत जबर बिन अब्दुल्ला से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "मेरी उम्मत से एक गिरोह क़यामत तक हक पर ग़ालिब रह कर लता रहेगा फ़िर ईसा एएस नज़िल मुसलमानो इन (मुसलमान होंगे) (महदी आरएच) कहेगा के आए नमाज पढे। वो (ईसा ए.एस) इंकर करेंगे और कहेंगे के अमीर तुम में से ही होगा। ये अल्लाह तआला की उम्मत पर नवाजिश है।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल ईमान 395
हदीस: हज़रत उस्मान (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: इसा इब्ने मरियम ए.एस फजर के वक्त आएंगे तो मुसल्मानो का अमीर कहेगा: ऐ रूहुल्लाह! आए नमाज पढाये तो ईसा ए.एस कहांगे है उम्मत के अफराद ही एक दसरे पर अमीर है फिर में का अमीर (इमाम महदी रह) इमामत करेंगे।
मसनद अहमद २९५/४
हाकिम; किताब उल फ़ितन 524/4
📕 इब्ने अबी शैबा 650/8
एक रिवायत में है के "जब वो (हजरत ईसा ए.एस) सूबा की नमाज अदा कर लेंगे तो दज्जाल की तरफ निकलेंगे।"
मसनद अहमद 466/3
मजमा अल जावेद 659/7
७४.५ अलमात ए ईसा अलैही सलाम Sal
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"मैं सोया हुआ (खुवाब में) कबा का तवाफ कर रहा था के एक साहिब जो गंडम गुंडे वे और में के सर के बाल सीधे वे के गोया में से पानी तपक रहा है (पर मेरी नजर पड़ी तो) मैंने पूछा है ? लोगों ने कहा: ये ईसा इब्ने मरियम अलैहे सलाम हैं।"
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7168
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"मेरे और इन (ईसा एएस) के डरमायण कोई नबी नहीं और बेशक वो नाज़िल होने वाले है लिहाज़ा जब तुम में देखो तू पहचान कर लेना के वो एक माया क़द आदमी है, रंग मयेल सुरखी है, 2 कपड़े साफ़ है होंगे, सर के बाल ऐसे है के गोया में से पानी तप रहा है हलंके वो भीगे हुए ना होंगे, वो दीन इस्लाम प्रति लोग से जंग करेंगे, अल्लाह ताआला इन के जमाने में इस्लाम के सिवा तमम अदयान का होगा और फार्मा वो मसीह दज्जाल को क़तल करेंगे फ़िर ज़मीन प्रति उसकी तरफ़ अमन ओ अमान का दोरा होगा।”
मसनद अहमद 535/6
📕 अबू दाऊद 4324
अब्दुल रजाक 401/11
74.6 हज़रत ईसा अलैही सलाम दीन-ए-इस्लाम गालिब कर देंगेb
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया:
"फिर वो (ईसा ए.एस) सलीब तोडेंगे, ख़ानज़ीर को क़तल करेंगे, जजिया ख़तम कर देंगे (यानी इस्लाम या जंग) तमाम अदयान मोआतल कर देंगे हट्टा के अल्लाह तआला इस्लाम के सिवा तमाम मिलातों का फरमा देंगे।"
मसनद अहमद 535/2
सुनन अबू दाऊद 4324
अब्दुल रजाक 401/11
७४.७ हज़रत ईसा अलैहे सलाम हज और उमराह करेंगे ka
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"जात की कसम है! जिस के हाथ में मेरी जान है हज़रत ईसा ए.एस रूहा की घाटी से हज्ज या उमर या दोनो के लिए तलबिया पुकारेंगे।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल हज 1275
74.8 ईसा अलैहि सलाम के नाम रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का पैगम
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया:
"मुजे उम्मेद है के अगर मेरी उमर लंबी हुई तू में ईसा इब्ने मरियम ए.एस से मुलकत करुंगा और अगर मुझे मौत ने आ लिया तो तुम में से जो शक्स इन से मुलकत करे वो मेरी तरह से सलाम कहे।"
मजमा अल जावेद; किताब उल फ़ितन 12/8
मसनद अहमद 393/2
मुसनफ इब्ने अबी शायबा ६५४/८
74.9 ईसा अलैही सलाम और अमन ओ अमानी
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"अल्लाह तआला इन के डोर में झूठे मसीह दज्जल को हलाक करेगा और ज़मीन पर अमन ओ अमन क़यम हो जाएगा और शायर, चीते और जाने, भेदिये और बकरीन सब एक साथ एक साथ एक साथ नुक्सान नहीं पोहंचायेगा।"
मसनद अहमद 576/2
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "इसा इब्ने मरियम एएस हकीम और आदिल बन कर नज़िल होंगे, सलीब को तोड देंगे, ख़ानज़ीर को, क़तल को बड़े में, तलवारें दारंतियां होंगी, हर ज़हर आलू चीज़ का ज़हर ख़तम हो जाएगा, आसमान अपना रिज़्क उतरेगा, ज़मीन अपना नबतात उगाएगा हट्टा के बच्चा आज़ाद से खेलेगा मगर वो नुस्खन होगा , शेर गया के साथ चलेगा मगर इसे नुक्सान नहीं पोहंचायेगा।”
मसनद अहमद 638/2
इब्ने माजा 4129
सुनन तिर्मिज़ी २२३३
हदीस: एक रिवायत में है के: जवान इतनी को चोर दिया जाएगा मगर इसे मुश्किल करने की कोशिश नहीं की जाएगी, कीना, हसद और बुग़ज़ का ख़तमा हो जाएगा गा और माल की दवा दी कोई होगा।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2940
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया:
"फिर अल्लाह तआला" ईसा इब्ने मरियम एएस को नाज़िल फ़र्मा देगा गोया के वो उरवा बिन मसूद (आरए) (साहबी) है और वो दज्जाल को तलाश कर के हलक करेंगे फ़िर लोग 7 साल तक ज़मीन पर (ज़िंदा) रहिए और और 2 बंदों के डरमायण भी अदावत नहीं होगी।”
मसनद अहमद ६५३/२
हदीस: हज़रत नवास बिन समन (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"……. फ़िर अल्लाह के नबी हज़रत ईसा ए.एस. और इन के साथी अल्लाह तआला से दुआ करेंगे तो अल्लाह ताआला इन की गार्डनो में कीदे पेदा कर के वे आन वहीद में एक नफ्स की मौत की तरह हलक कर देंगे फिर अल्लाह के नबी हज़रत ईसा ए.एस. और इन के साथी ज़मीन पर उतरेंगे मगर ज़मीन में हर जगह इन की सारंद और बद्बू फैली होगी फिर।
हज़रत ईसा ए.एस. और इन के साथी अल्लाह तआला से दुआ करेंगे तू अल्लाह तआला बख्ती ओंतों की बगीचे के बराबर (चिरयों जैसे) प्रिंडे बेझिं ग्य जो इन वहन से ले जा फेंकेंगे जहान अल्लाह का हुकम होगा फिर अल्लाह तआला बरश बरसेंगे जो मत्ती और खैमे वाले घर में पोहनचेंगे और इस के ज़रीये अल्लाह ता'आला जमीन को तारह पाक साफ कर देंगे जिस तरह कोई हौज या बाग (या खूबसूरत औरत) हो फिर जमीन को हुकम होगा के अपने फल उगा, बरकते निकल, दिन एक अनार पूरी जमात है और कहेगा करेंगे एक गभान ओंटन की दूध काई जमातों के लिए कफी होगा, हमला गए का दूध एक कबीले को किफायत करे गा और बकरी का दूध एक खानदान को कफी होगा, लोग इस हाल में होंगे के अचानक हा तआला एक में होगा एक बघलों के नेचे से असर कीर्ति होंगे गुजरे गे और उसकी मोमिन ओ मुस्लिम को फोट कर दिन जी फिर सिरफ बदतरीन लोग बाकी रह जाएंगे जो गढ़ों की तरह बहाम झगरेगे (या बदकरियां करेंगे) और इन पर कयामत कयामत।
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
मसनद अहमद २४८/४
सुनन अबू दाऊद 4321
74.10 ईसा अलैहे सलाम कितना अरसा ज़मीन पर रहेंगे
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: फ़िर अल्लाह तआला इसा इब्ने मरियम एएस को नज़िल फरमा देंगे गोया के वो उरवा बिन मसूद (सहाबी) ) है और वो दज्जल को दोंध कर कतरें जाने फिर लोग 7 साल तक जिंदा रहिए गी हट्टा के 2 शक्सों के दर्मयान बी अदावत नहीं होगी फिर अल्लाह ताआला शाम की तरह से एक थंडी हवा में जो जो है वह अदमी कर ले जी जिस के दिल में राय बराबर भी खैर या ईमान होगा और अगर कोई शक किसी पहाड़ की सुरंग में भी भूत जाएगा तो ये हवा वहन पोहंच कर है की रूह कबाज कर लेगी।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2940
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:…। "और वो (ईसा ए.एस.) 40 साल तक हैं।"
मसनद अहमद 535/2
📕 अबू दाऊद; किताब उल मलहिम 432
अब्दुल रजाक 401/11
74.11 हज़रत ईसा आहे सलाम की वफ़ात और तज़ीज़ ओ तकफ़ीन
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: फ़िर वो (इसा आस को ज़मीन पर) जितनी डेर अल्लाह ता'आला की मर्ज़ी होगी फिरेंगे फ़िर फ़ौत हो जाएंगे और मुसल्मान में नमाज ए जनाजा अदा कर के इन दफान कर देंगे।
मसनद अहमद 576/2
📕 अबू दाऊद 4324
सिलसिला अल साहेहा २१८२
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया ………। "फिर वो 40 साल तक अकमत करेंगे और फोट हो जाएंगे तू मुसलमान में की नमाज ए जनाजा अदा करेंगे।"
मसनद अहमद 535/2
📕 अबू दाऊद 4324
सिलसिला सहीा २१८२
नोट: नुज़ूल-ए-इसा ए.एस क़यामत की आखिरी चंद एक बड़ी बड़ी निशानियों में से है जिस का वकू तहल ज़हीर नहीं हुआ।
हज़रत ईसा ए.एस. को रूह माँ अल जिस्म ज़िंदा असम पर उठा लिया था और क़यामत से पहले इसी तरह ज़िंदा दोबारा उतरे जाएंगे।
हज़रत ईसा ए.एस. के नुज़ूल के वक़्त तमम इसाई में पर ईमान ला कर इस्लाम क़बूल कर लेंगे और जो इस्लाम क़बूल नहीं करेंगे वो हलाक से दोचार होंगे।
हज़रत ईसा ए.एस. जब आसमान पर उठे वे तो नबी थे लेकिन कयामत से पहले खटीम उल नबीन हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के उम्मती और सहाबी बन कर तशरीफ लेंगे, मुस्तकिल नबी की हसियात से नहीं।
हज़रत ईसा ए.एस. खुरूज ए दज्जल और जुहूर ए मेहंदी आर.एच के बाद नज़िल होंगे।
हज़रत ईसा ए.एस. किसी नमाज़ के वक़्त उतरेंगे और अग़लब गुमान यही है के वो नमाज़ ए फ़ज़र होगी।
हज़रत ईसा ए.एस. 2 फरिश्तों के परों पर अपने बाज़ू राखे डेमिशक की मशरकी जानीब (किसी मस्जिद की) सफ़ेद मीनार के पास उतरेंगे।
हाफिज इब्ने कासिर आर.एच फार्मते है के ये जामिया उम्मवी का साफैद पथरों से तय करदा वो मीनार है जिसे 741 हिजरी में इसाओं के माल से तय किया गया क्यों के उन्हो ने इस शहीद किया था। (बतौर तवन इन से तय करवा गया) और ये हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की नबूवत पर वज़ेह दलील है।
हज़रत ईसा ए.एस इमाम मेहदी की इक्तादा में नमाज अदा करेंगे।
नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी उम्मत की रहनुमाई के लिए हज़रत ईसा ए.एस. की कुछ आलमत बयान फिराई है जिन्हे देख कर हर मुसलमान बालक हर इसाई भी पर ईमान लेगा, चांद एक आलमत ये है।
फ्रिस्टन के सहेरे आसमान से नुजूल करेंगे।
2 ज़ार्ड चैड्रोन में मालबोस होंगी।
सर के बालो से कतरे तपते मलूम होंगे हलंके वो खुश होंगे।
रंग सुरख ओ साफैद के मबीन गुंडामी सा होगा।
क़द्द माया सा होगा।
दज्जाल के 2 टुकरे कर के हलक करेंगे।
रू-ए-जमीन पर अमन ओ अमान और अदल ओ इंसाफ जरी करेंगे।
ख़ानज़ीर क़तल करेंगे जैसे इसाई हलाल समजते हैं।
मुसलमान जो पहले जिहाद कर रहे हैं वो हज़रत ईसा ए.एस के साथ मिल कर भी जिहाद करेंगे।
सलीब तोड़ डालेंगे यानि इसैयत का खटमा कर देंगे क्यों नुजूल ईसा ए.एस दरसल इसाई नजरियत का बटलां है।
जहां तक सांस जाएगी काफिर हलक हो जाएगा और सांस वहां तक पोहनचेगी जहान तक में की नजर पोंचेगी।
हज़रत ईसा ए.एस. के नुज़ूल के बाद कुफ़र और ज़ुल्म का याकसर ख़तमा हो जाएगा। मूजी जंवर और इंसान एक साथ चलें फिरेंगे। कोई किसी को नुक्सान नहीं पोहंचाय गा।
हज़रत ईसा ए.एस हज और उमराह की सादात भी हसील करेंगे।
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हज़रत ईसा ए.एस के नाम हर इस मुसल्मान के ज़रीये सलाम बेझा है जो से शराफ़ ए मुलक़त हसील करे।
हाफिज इब्ने कसीर आर.एच. फार्मते हैं के: ईसा ए.एस. पद से लेकर मौत तक क़ुल 40 साल तक ज़मीन पर इक़मत करेंगे जिन में से 33 साल वो गुज़र कर असम पर उठे जा छुके है और बाकी 7 साल वो कबल अज़ क़यामत नज़ूल के बाद पूरी करेंगे।
ईसा ए.एस. नज़ूल ए सानी के बाद वफ़ात पायेंगे और मुसलमान इन की नमाज़ ए जनाज़ा अदा कर के दफ़न करेंगे।
हज़रत अब्दुल्ला बिन सलाम फरमाते है के हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और हज़रत ईसा ए.एस. की तोरात में ये सिफत मरकूम है के हज़रत ईसा ए.एस नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (की क़बार) होंगे। [सुनन तिर्मिज़ी ३६१७]
याजूज और मजूजू / Yajooj aur Majooj
75.1. याजूज ओ मजूज कुरान मजीद की रोशनी में
इरशाद ए बारी ताला है:
“फिर है (जुलकुरनैन) ने एक और (सफर का) समान किया। यहां तक के 2 दिवारों के दर्मियां पोहंचा तो देखा के में इस तरह कुछ लोग हैं जो बात को समझ नहीं सकते हैं। लॉगऑन ने कहा ज़ुल्कुरनैन में! याजूज और मजूज जमीन में फसाद करते रहते हैं भला हम आपके लिए खारच (का इंतजम) कर दिनों के आप हमारे और इन के दरमियान एक दीवार खाने वाले ज़ुल्कुरनैं ने कहा के खार्च का जो मकदूर अल्लाह ने मुझे बख्शा है वो बोहत अच्छा है। तुम मुझे कुव्वत (बज्जो) से मदद दो। में तुम्हारे और में के दारमायण एक मजबूर ओट बना दूंगा।”
तू तुम लोहे के (बड़े बड़े) तख्ते लाओ (चुनाचे काम जारी कर दिया गया) यहां तक के जब ने दोनो पहाड़ों के दर्मयान (का हिसा) बराबर कर दिया। और कहा के (अब इसे) धोंको। यहां तक के जब को (धोंक धोंक) कर आग कर दिया तो कहा के (अब) मेरे पास तनबा लाओ पर पिघला कर दाल डॉन है।
फिर मुझमें ये क़ुदरत न रही के प्रति चार सकीं और ना ये तक़त रही के मैं नक़ब लगा सके।
बोला के ये मेरे परवरदीगर की महरबानी है। जब मेरे परवर्दीगर का वड़ा आ पोहनचेगा तो इस को (धा कर) हमवार कर देगा और मेरे परवर्दीगर का वादा सच्चा है।
(इस रोज़) हम में को चोर देंगे के (रू-ए-ज़मीन पर फैल कर) एक दूसरे में घुस जाएंगे और सूर फोनका जाएगा तो हम सब को जमा कर लेंगे।”
सूरह अल कहफ १८:९२-९९
यहां तक के यजुज मजूज खोल दिए जाएं और वो हर बुलंदी से दौड रहे हैं।
"और (कयामत का) सच्चा वड़ा करीब आ जाए तो नगहन काफिरों की आंखें खुली की खुली रह जाएं (और कहने लगे के) हाय शामत हम है (हाल) से गफलत में रहे बालक (अपने हक में)।"
सूरह अल अंबिया 21:96-98
७५.२. यजुज मजूज अहदीस की रोशनी में
हदीस: हज़रत ज़ैनब बिन्त जहाँ (आरए) फरमाती है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) एक रोज़ घबरे होवे इन के पास दखिल होवे, आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमा रहा है: तबाही है। करीब आ चुकी हे, आज याजूज मजूज की देवर से इतना खुल गया है आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने अंगोथे और साथ वाली उनगली से एक हलका बना लिया। ये सुन कर हज़रत ज़ैनब (आरए) ने पुचा: ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! तुम क्या हम हलक हो जाएंगे जबके हमारे दरमियान नीक सालेह लोग होंगे? आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: “जब ख़बर हद से तजावुज़ कर जाएगी।
सहीह बुखारी; किताब उल फ़ितन 7135
हदीस: हज़रत हुज़ैफ़ा (र.अ.) से मरवी है के एक दिन हम क़यामत के बारे में गुफ़्तुगु कर रहे हैं वे के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तशरीफ़ लाए और पुचा: क्या गुफ़्तुगु चल रही? लोगन ने कहा: कयामत के बारे में मुजाकरा कर रहे हैं। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "कयामत हरगिज़ क़याम नहीं होगी हट्टा के तुम १० निशानियाँ देख लो तू (इन में से एक) याजूज मजूज का ज़िक्र किया।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2901
75.3. यजुज मजूज की मसरूफियातो
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "बिलाशुबा याजूज मजूज (ज़ुल्कुरनैन बादशाह की तमीर करदा) दीवार को खोते है हट्टा के वो सूरज' कर) देखने के क़ाबिल हो जाते हैं तू में का निगरान कहता है वापस चलो बाकी कल खोदेंगे तू (कल तक) वो दीवार पहले से भी मजबूर हो चुकी होती है (और ये सिलसिला रोज़ जारी है) में हमेशा रहता है की मुद्दत पूरी हो जाएगी और अल्लाह तआला इन चोरने का इरदा कर लेगा तो फिर वो एक दिन इसी तकर तक खोद छुके होंगे तो का निग्रां कहेगा चलो बाकी कल खोदेंगे इंशा अल्लाह (अगर पहले ने चाहा है वो कल खोदेंगे इंशा अल्लाह (अगर पहले ने चाहा है) नहीं कहेंगे) कल जब वो आएंगे तो दीवार इसी तरह होगी जिस तरह खोदी हुई वो चोर कर गए थे। फिर वो इसे खोड़ केएसआर लोगन पीएसआर निकल आएंगे, सारा पानी पी जाएंगे, लोग काला बंद हो जाएंगे तो याजूज मजूज आसमान की तरफ अपने तीर फंकेंगे जिन्हे अल्लाह ता'आला खून अलोदा हालत में नीच सब पर) गालिब आ गए हैं।
नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: इस जात की कसम जिस के हाथ में मेरी जान है जमीन के जंवर में का खून और गोश्त खा कर खून मोटे ताजे हो जाएंगे।
मसनद अहमद 510/2
📕 सुनन तिर्मिज़ी; किताब उल तफ़सीर 3153
सुनन इब्ने माजा ४१३१
७५.४. याजूज मजूज का खुरूजी
हदीस: हज़रत नवास बिन समन (आरए) फरमाते है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: (तवील हदीस) ……… (यानी जब वो दज्जाल और इस के लश्कर के काला क़मा से दूर होंगे ही हुआ) ) के मैं (अल्लाह) अपने ऐसे बंदे निकलने वाला हूं के जिन का मुकाबला कोई नहीं कर सकता है आप मेरे (मुसलमान) बंदों को कोह-ए-तूर पर ले जाने और अल्लाह ता'आला यजूज मजूज को जो निकल जाएगा से डोडे हुवे आएंगे।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
75.5. याजूज मजूज का फिटना फैसला
हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: "फिर वो देवर तोड़ कर लोगन पर निकल आएंगे, सारा पानी पी जाएंगे, लोग काला बंद हो जाएंगे तो वो (याजूज मजूज) अपने तेरे आसमान की तरफ से आएंगे जिन्हे अल्लाह ताआला खून लगा कर पर भी नीचे फंकेगा तो हम कहां जाएंगे है जिस तरह हम अहले जमीन पर गालिब हैं।"
मसनद अहमद 510/2
सुनन तिर्मिज़ी किताब उल तफ़सीर 3153
सुनन इब्ने माजा 4131
हदीस: हज़रत नवास (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “……. फिर अल्लाह ता'आला याजूज मजूज को निकल देंगे और वो हर दूर से बघ्टे हुए आएंगे के अगले अफराद बहीरा तिबरिया से गुजरेंगे तो का सारा पानी पी जाएंगे और कभी कभी वहां जब वहां से वहां से गुजरेंगे। था और हज़रत ईसा एएस और इन के साथी महसूर हो कर रह जाएंगे हट्टा के बेल का सर तुम्हारे मोजोदा 100 दीनार से ज़िदा क़ीमती हो जाएगा।"
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
मसनद अहमद २४८/४
सुनन अबू दाऊद 4321
हदीस: हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “……. डालिएंज हर चीज को तबाह ओ बरबाद कर देंगे, जिस पानी (समंदर या दरिया) से गुजरेंगे इसे पी जाएंगे। फिर लोग मेरे (ईसा ए.एस) के पास शिकायत लेकर आएंगे तो मैं अल्लाह ताला से यजुज मजूज के लिए बद्दुआ करुंगा और अल्लाह ताला सब को हलक कर डालेंगे।
मसनद अहमद 469/1
📕 सुनन इब्ने माजा; किताब उल फ़ितन 4132
हाकिम ५३४/४
75.6. दीवार ए ज़ुल्कुरनैन में सुरखी
हदीस: हज़रत ज़ैनब बिन्त जहाँ (आरए) फरमाती है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया: “अर्बों के लिए शर से तबाही है जो क़रीब आ चुका है। आज याजूज मजूज की दीवार में इतना सुरख हो चुका है आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने अंगूठे और अंगशत शहादत को मिला कर इशारा किया।”
सहीह बुखारी; किताब उल अंबिया 7135
एक रिवायत में है के:
"याजूज मजूज की दिवार में एक दिरहम बराबर सुरख हो चुका है।"
मसनद अहमद 478/6
75.7. याजूज मजूज की शकल ओ सूरतो
हदीस: हज़रत उम्मे हबीबा (आरए) से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "तुम लोग कहते हो के दुश्मन बाकी नहीं रहे हलंकी तुम हमश दुशमानो से क़तल करेंगे के रहेंगे चेहरे छोटे होंगे, आंखें छोटी होंगी, सुरखी मयेल सर के बाल होंगे, हर तेले से दोते हुए आएंगे गोया इन के चेहरे तेह बा तेह (कूटी हुई) ढाल की तरह चैप्टे होंगे।”
मजमा अल जावेद; किताब उल फ़ितन 12570
मसनद अहमद 341/5
७५.८. याजूज मजूज की कसरती
हदीस: हज़रत अबू सईद खुदरी (र.अ.) ने बयान किया के नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: के अल्लाह तआला (क़यामत के दिन) फरमायेगा, ऐ आदम! आदम ए.एस अरज़ कहेंगे मैं इतत के लिए हज़ीर, मुस्तदी हूं, सारी भलाइयां सिरफ तेरे ही हाथ में हैं। अल्लाह तआला फरमायेगा, जहाँ मैं जाने वालों को (लोगन में से अलग) निकल लो।
हज़रत आदम ए.एस.अर्ज करेंगे, ऐ अल्लाह! जहांमियों की तदाद कितनी है? अल्लाह तआला फरमायेगा के हर एक हजार में से 999. इस वक्त (की होल्नाकी और वहशत से) बच्चे बौधे हो जाएंगे और हर हमला और अपना हमाल गिरा देगा है वक्त तुम (खौफ ओ दहशत से) लोगों को देखोगे हलंकी वो बेहोश ना होंगे। लेकिन अल्लाह का अज़ब बड़ा ही सच होगा।
साहबा (आरए) ने अरज़ किया या रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) वो एक शक हम में से कौन होगा? हज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया के तुम बशारत हो वो एक आदमी तुम में से होगा और एक हज़ार दोज़ाखी याजूज मजूज की क़ोम से होंगे फ़िर हज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
“इज़ ज़ात की क़सम जिस के हाथ में मेरी जान है, मुझे उम्मेद है के तुम (उम्मत-ए-मुस्लिमः) तमम जन्नत वालों के 1/4 होंगे। फिर हम ने अल्लाह हु अकबर कहा तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: के मुझे उम्मीद है के तुम तम जन्नत वालों के 1/3 होंगे। फिर हम ने अल्लाह हु अकबर कहा। फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया के मुझे उम्मीद है के तुम जन्नत वालों के आगे होंगे। फिर हम ने अल्लाह हु अकबर कहा तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: के (मेहसर में) तुम लोग तमं इंसानों के मुक़ाबले में इतने होंगे जितने जितने होंगे किसी सुरक्षित जमानत के जिस्म पर एक सया जितने बाल, क्या कह सकते हैं एक सफ़ैद बाल होता है।"
सहीह बुखारी; किताब उल अंबिया 3348
सहीह मुस्लिम; किताब उल ईमान 379
हाकिम 82/4
75.9. याजूज मजूज की हलकातो
हदीस: हज़रत नवास बिन समन से मरवी है के अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया: "... फ़िर अल्लाह के नबी हज़रत ईसा अस और इन के साथी अल्लाह तआला से दुआ करेंगे तो अल्लाह ता" आला इन की गार्डानो में कीद पेडा कर के इन आन वहीद में एक नफ्स की मौत की तरह हलक कर देगा फिर अल्लाह के नबी हज़रत ईसा जैसे और में के साथी ज़मीन पर उतेंगे लेकिन ज़मीन में हर बड़ जागा ईसा आस और इन के साथी अल्लाह तआला से दुआ करेंगे तो अल्लाह तआला बख्ती उनतों की बगीचा बराबर (चिड़ियां जैसे) परिंदे बेझिंगा जो वहां वहन लेजा फेनकेंगे जहां अल्लाह का हुकम होगा फिर अल्लाह तआला बरश बरसायेंगे जो हर मत्ती और हर मैं पोहन वाले और मैं पोहन वाले इस के ज़रीये अल्लाह तआला ज़मीन को तारह पाक साफ कर दूंगा जिस तरह कोई हौज़ या बाग (या ख़ूबसूरत औरत) हो फ़िर ज़मीन को हुकम होगा के अपने फल उगा, बरकतें निकल, पूरी दिन एक होना है के चिल्के से वो साया हसील करेंगे। एक घर उन्नत का दूध काई जमातों के लिए काफ़ी होगा, हमला गया का दूध एक कबीले को किफ़ायत करेगा, और बकरी का दूध एक खंडन को कफी होगा, लोग इस हाल में होंगे के अचानक हा तजाला एक में होगा के नीचे से असर करेंगे गुजरेगी और हर मोमिन ओ मुस्लिम को फूट कर देगा फिर सिरफ बदतरीन लोग बाकी रह जाएंगे जो गढ़ों की तरह बहम झगरेंगे (ये बदकरियां करेंगे) और इन पर कयामत कयम होगी।”
सहीह मुस्लिम; किताब उल फ़ितन 2937
मसनद अहमद २४८/४
सुनन अबू दाऊद 4321
नोट: याजूज मजूज नू ए इंसान और हज़रत आदम ए.एस की औलाद से हैं। इंसान से मावारा कोई और महलूक नहीं।
याजूज मजूज ज़ुल्करनैन बादशाह (539 ईसा पूर्व) के दूर से लेकर आज तक कुर्रा अर्ज़ी पर मुजूद रही है और कबाल अज़ क़यामत बहुकम इलाही लोगन पर खुरोज़ करेंगे।
यजुज मजूज रोज ए अवल से फिसदी रहे हैं और गेंदबाजी खुरूज ये अहले दुनिया पर फितना ओ फसद बरपा कर देंगे गोया फिटना फसाद इन की घुट्टी में पर हुआ है।
यजुज मजूज जिन पहाड़ों के पीछे है में ज़ुल्कुरनैं ने लोहे और तनबे से बंद बंध हुआ है।
याजूज मजूज बिला नघा इस दीवार की खुदाई में मस्रोफ है और उसके शाम इस बिलकुल गिराने के करीब कर के चोर आए हैं मगर बहुकम इलाही वो देवर उसके सुबह पहले से ज़िदा मजबूर हो जाती है। लेकिन कयामत से पहले जब पर के खुरूज का वक्त ऐ गा तू वो देवारों के इंशा अल्लाह कहने की वजा से वैसी रहेगी जैसी वो चोर के गए होंगे।
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जमाने में उन्हो ने उस दीवार में दिरहम बराबर सुरख कर लिया था। क़यामत से पहले जब अल्लाह तआला का हुकम होगा तो याजूज मजूज दीवार तोड़ कर लोगन प्रति खुरोज़ करेंगे।
याजूज मजूज हज़रत ईसा ए.एस. के नज़ूल और दज्जाल के खतमे के बाद खुरूज करेंगे।
दुनिया की कोई जमात याजूज मजूज का मुकाबला नहीं कर सकती है हज़रत ईसा ए.एस भी में के मुक़ाबले से आजिज़ होंगे।
कोई यजूज मजूज की शकल ओ सूरत ऐसे बता गई है जैसे तुर्कों की मजाूर है यानि नंगे आंखें वाली सुरखी मयाल बालन वाले और छोरे चेहरे वे के गोया वो तेह बताई गई है जैसे मजूज क़ार देना द्रस्ट नहीं क्यों के तमां सिफ़ात ओ आलमत मुजूदा एक्वाम ओ मिलाल में से किसी एक पर भी चिस्पन नहीं होती।
याजूज मजूज की तड़द बोहत ज़ियादा है हट्टा के इस का अंदाज़ है बात से लगा जा सकता है के वो आम लोगों से 99% ज़िदा है।
यजूज मजूज सब खैत तबह कर देंगे, समुद्र दरयां और नदी नालों का पानी डकार जाएंगे और हर तरह उधम मचा देंगे।
याजूज मजूज दुनिया पर तबाही फैलने के बाद आसमान की तरफ से चलेंगे जिंहे अल्लाह तआला कोहन लगा कर नीचे डालेंगे तो वो कहांगे।
हमने दुनिया वालों को भी तबह कर दिया और आसमान वालों पर भी ग़लबा पा लिया।
याजूज मजूज का खुरूज हजरत ईसा ए.एस. के बाद होगा और इस से पहले कोई इसमें देख नहीं पाएगा।
हज़रत ईसा ए.एस. की दुआ से ये सब एक बीमरी से आन वहीद में हलक हो जाएंगे।
बहुकम ए इलाही छोटे छोटे परिंदे इन उठा कर किसी नामलूम मुक़म पर ले जाएंगे हलंके इन की लाशें रू-ए-ज़मीन पर इस्क़ादर पैली होंगे के ताल धरने को जग ना होगा।
याजूज मजूज आजमिश के लिए चुकाए गए हैं और में से कोई एक भी इस्लाम कबूल ना करेगा।
याजूज मजूज की हलाकत के बाद दुनिया पर सिरफ और सिर्फ मुसलमान है बाकी रहेंगे फिर मुसलमानो में बादामली, कुफर ओ शिर्क खेलना शुरू होगा तो अल्लाह ताआला नायक लोगन को उठा लेंगे और बुरे लोग करेंगे।
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