10 Muharram Noha 2026 | As| Shahadat Imam Hussain Noha 2026 | Ya Mustafa (saww) Bachalo Nawase Hussain (as) Ko | Ali Akbar Ameen Noha 2026 | Muharram Noha 2026 | Imam Husain Noha 2026 | New Noha Muharram 2026
Kalam Credits !
Title: Ya Mustafa (saww) Bachalo Nawase Hussain (as) Ko
Recited By: Ali Akbar Ameen
Poetry By: Nawab Cholasi
Composition : Ali Moosa Rizvi
Chorus: Rizwan Mirza & Team
Vocals Recorded At: Swarit Digital Studio
Audio Mix & Master: ODS
Director of Photography (DOP): Zahid Ali
Video & Editing: Azadari Chittora
SEO & Creatives: Syed Zaki Raza
Optimization & Digital Partner: RhythmReach
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या मुस्तफा बचाओ नवासे हुसैन को नोहा लिरिक्स
या मुस्तफा बचाओ नवासे हुसैन को
उम्मत सता रही है ये प्यासे हुसैन को,
या मुस्तफा बचाओ नवासे हुसैन को.
उड़ उड़ के भर रही है ये ज़ख्मी बदन में खाक,
होने लगी बदन में चुभन या रसूल-ए-पाक।
तकलीफ़ हो रही है हवा से हुसैन को,
सेहरा में बढ़ रही है तपिश तेज धूप से,
सीने में हो रही है खलिश तेज़ धूप से।
तुम ही छुपाओ अपनी आबा से हुसैन को,
अकबर को रो चूका, अली असगर को रो चूका,
अल-मुख्तासर हुसैन भरे घर को रो चूका।
देता नहीं है कोई दिलासे हुसैन को,
अब तन से सर उतार लो कहता है हर कोई,
तश्ना जिगर को मार लो कहता है हर कोई।
सदमा है जालिमों की सदा से हुसैन को,
नाना कहां हो, अपने नवासे की लो खबर,
बेकस को, बे-वतन को सताते हैं अहल-ए-शर।
मिलते हैं दर्द फ़ौज-ए-जफ़ा से हुसैन को,
ज़ैनब ये दे रही है सदा, वा मुहम्मदा,
घेरे हुए हैं फ़ौज-ए-जफ़ा मुहम्मदा।
क्यों कर बचाऊं आह-ओ-बुका से हुसैन को,
गाजी के गम से झुक गई शब्बीर की कमर,
बिनई साथ ले गया कड़ियाल जवां पिसर।
क्या ग़म मिले हैं दश्त-ए-बाला से हुसैन को,
परदेस में बुला के वतन से ये कलमा-गो,
नाना रुला रहे हैं नवासे को देख लो।
मक़तल में मरते हैं दगा से हुसैन को,
अकबर सिपह-ए-शाम में जब गिर गए हुसैन,
ज़ैनब नवाब दश्त में करने लगी ये बैन।
कैसे छुपाऊं अपनी रिदा से हुसैन को,
Ya Mustafa Bachao Nawase Hussain Ko Noha Lyrics
Ya Mustafa Bachao Nawase Hussain Ko
Ummat Sata Rahi Hai Ye Pyase Hussain Ko,
Ya Mustafa Bachao Nawase Hussain Ko.
Ud Ud Ke Bhar Rahi Hai Ye Zakhmi Badan Mein Khaak,
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