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Sameem khan
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यह एक बहुत ही खूबसूरत और शक्तिशाली दुआ है जो नमाज़ में सजदे के दौरान पढ़ी जाती है。हिंदी में उच्चारण:"अल्लाहुम्मग़फिर ली ज़न्बी कुल्लहू"
हिंदी अर्थ:"ऐ अल्लाह! मेरे सारे गुनाह माफ कर दे।"अक्सर इस दुआ को पूरा इस तरह पढ़ा जाता है (जैसा कि हदीस में आया है) :
अरबी: اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ، دِقَّهُ وَجِلَّهُ، وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ، وَعَلَانِيَتَهُ وَسِرَّهُ
हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मग़फिर ली ज़न्बी कुल्लहू, दि-क्क़हू व जिल-लहू, व अव्वलहू व आख़िरहू, व अला-निय-तहू व सिर-रहू।
हिंदी अर्थ: "ऐ अल्लाह! मेरे सारे गुनाह माफ कर दे; छोटे और बड़े, पहले और बाद के, खुले हुए और छुपे हुए।"
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ
اے اللہ ! میرے تمام گناہ معاف فرما دے۔
O Allah, forgive all my sins
دِقَهُ وَجِلَّهُ
چھوٹے اور بڑے
Small and great
وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ
پہلے اور پچھلے
The first and the last
وَعَلَانِيَتَهُ وَسِرَّهُ
ظاہر اور چھپے ہوئی
Open and secret sins
__________*****________
एक बहुत ही प्यारी दुआ है जो नमाज़ के दौरान रुकू में पढ़ी जाती है।
इसका हिंदी में अर्थ है: "ऐ अल्लाह, मैंने तेरे ही लिए रुकू किया।"
यह पूरी दुआ इस प्रकार है:
अरबी में:
اللَّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، وَلَكَ أَسْلَمْتُ، خَشَعَ لَكَ سَمْعِي، وَبَصَرِي، وَمُخِّي، وَعَظْمِي، وَعَصَبِي
اللَّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، وَلَكَ أَسْلَمْتُ، خَشَعَ لَكَ سَمْعِي، وَبَصَرِي، وَمُخِّي، وَعَظْمِي، وَعَصَبِي
हिंदी उच्चारण (Transliteration):
अल्लाहुम्मा लका रका'तु, वबिका आमन्तु, वलका अस्लम्तु, खश'अ लका सम्'ई, व बसरी, व मुक्सी, व अज्मी, व असबी।
अल्लाहुम्मा लका रका'तु, वबिका आमन्तु, वलका अस्लम्तु, खश'अ लका सम्'ई, व बसरी, व मुक्सी, व अज्मी, व असबी।
हिंदी में अनुवाद (Translation):
"ऐ अल्लाह, मैंने तेरे ही लिए रुकू किया, तुझ पर ही ईमान लाया और मैंने तुझे ही अपना सिर झुकाया (इस्लाम क़ुबूल किया)। मेरे कान, मेरी आँखें, मेरा दिमाग़ (मस्तिष्क), मेरी हड्डियाँ और मेरी नसें सब तुझ ही के आगे झुक गई हैं।"
"ऐ अल्लाह, मैंने तेरे ही लिए रुकू किया, तुझ पर ही ईमान लाया और मैंने तुझे ही अपना सिर झुकाया (इस्लाम क़ुबूल किया)। मेरे कान, मेरी आँखें, मेरा दिमाग़ (मस्तिष्क), मेरी हड्डियाँ और मेरी नसें सब तुझ ही के आगे झुक गई हैं।"
اللَّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُ
اے اللہ ! میں نے تیرے ہی لیے رکوع کیا ہے۔
O Allah, I have bowed (in Rukü') to You
وَبِكَ آمَنْتُ
اور میں تجھ پر ایمان لایا ہوں۔
And I have believed in You.
وَلَكَ أَسْلَمْتُ
اور میں نے اپنے آپ کو تیرے سپرد کر دیا ہے۔
And I have submitted myself to You.
خَشَعَ لَكَ سَبْعِي وَبَصَرِي
ہو گئی ہے۔ تیری سماعت اور میری بینائی تیرے لیے عاجز و فروتن ہوگا
My hearing and my sight have humbled themselves before You.
وَمُنِّي وَعَظْمِي وَعَصَبِي
اور میرے اعصاب میرا دماغ، میری ہڈیاں اور میر سب تیرے لیے عاجز ہوتے ہیں۔
And my brain, my bones, and my nerves (sinews) have humbled themselves before You
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