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Posted by
Sameem khan
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Ramzan Mein Marne Walon Ke Sath Ke Sath Kya Hota Hai? | What happens to those who die in ramadan?
doston aaj ki is video mein ham aapko bataenge ki jo log Ramzan ke mahine mein inteqal kar jaate Hain unke Sath Kya Hota Hai? kya unke Sath Kabra mein ajab nahin Hota? kya hua direct Jannat jaate Hain?
Ramzan Mein Marne Walon Ke Sath Ke Sath Kya Hota Hai? | What happens to those who die in ramadan?
अस्सलाम वालेकुम प्यारे दोस्तों खवातीन
हजरात मौत बरहक है कोई भी इंसान मौत से
नहीं भाग सकता कब्र इंसान को दिन में 70
बार याद करती है और कहती है मेरे अंदर आने
से पहले अल्लाह की इबादत और फरमार बदार
करके आना मेरे अंदर सांप बिच्छू और कीड़े
मकोड़े हैं मेरे अंदर तन्हाई हवस और खौफ
है दोस्तों आज की वीडियो में हम बताएंगे
क्या रमजान में मरने वाला सीधा जन्नत में
जा है अगर रोजे की हालत में किसी की मौत
हो जाए तो अल्लाह ताला की तरफ से उसे कौन
सा इनाम दिया जाता है अल्लाह ताला कब्र
में उसके साथ क्या मामला करते हैं बहुत से
लोगों ने सुना है कि रमजान में मरने वाला
सीधा जन्नत में जाता है तो दोस्तों आपसे
गुजारिश है इस वीडियो को एकदम आखिरी तक
जरूर देखें और अपने दोस्तों और भाइयों में
शेयर जरूर कर दें इसके बारे में इस वीडियो
में तफसील से बताया जाएगा इसके साथ-साथ
हम आपको यह भी बताने वाले हैं कि जिन घरों
में रात के खाने के बर्तन नहीं धोए जाते
इन घरों में क्या होता है इन घरों में
कौन-कौन सी बीमारियां और परेशानियां आती
हैं हजरत अली रजि अल्लाह ताला अन के इस
बारे में क्या फरमान है इसके साथ-साथ यह
भी बताया जाएगा कि हजरत अली रजि अल्लाह
ताला अन ने फरमाया खाना खाते वक्त एक गलती
मत करना इसके साथ यह भी बताया जाएगा कि जब
एक सोहर ने शादी की की रात अपनी बीवी को
चार बातें बताई उसने कहा कि यह चार बातें
मुझसे कभी मत करना वह चार बातें कौन सी थी
इसके अलावा रमजान में मरने वाला एक आदमी
का सच्चा वाक्य बताया जाएगा अल्लाह ताला
कुरान पाक में फरमाता है रोजे मेरे लिए है
मैं ही इसका अजर देता हूं अल्लाह के नजदीक
यह दुनिया एक राई के दाने के बराबर भी
हैसियत नहीं रखती इंसान अगर यह बात सोचे
कि अल्लाह के नजदीक यह दुनिया राई के दाने
के बराबर भी हैसियत नहीं रखती तो अल्लाह
के नजदीक रोजे का अजर क्या होगा अल्लाह
ताला ने रोजेदारों के लिए एक अलहदा जन्नत
मख सूस की है जिसमें सिर्फ रोजेदार ही
दाखिल होंगे इस जन्नत के दरवाजे का नाम
रियान है इस दरवाजे से सिर्फ रोजेदार ही
दाखिल होंगे जन्नत के आठ दरवाजे हैं जबकि
जहन्नम के सात दरवाजे हैं यही वजह है कि
अल्लाह की रहमत उसके गजब पर गालिब है
दोस्तों अक्सर लोगों की जेहन में सवाल
पैदा होता है क्या रमजान में मरने वाला
जन्नत में दाखिल होगा उसे अजाब एक कब्र
नहीं होगा यह बात सच है जो आदमी रमजान में
इंतकाल कर जाए जिसकी मौत रमजान में हो जाए
उसे कब्र का हिसाबो किताब नहीं होगा
अल्लाह तबारक ताला मैदान महेशर में इसके
साथ आसानी फरमाए लेकिन इसके साथ-साथ यह भी
है कि वह पांच वक्त का नमाजी हो अल्लाह की
फरमा र बदार करने वाला हो रमजान उल मुबारक
के रोजे रखने वाला हो क्योंकि मुसलमान और
काफिर के दरमियान फर्क नमाज करती है रमजान
के महीने में काफिर भी मरते हैं क्या वह
भी जन्नत में जाएंगे हरगिज नहीं बल्कि
रमजान के महीने में इंतकाल करने वाला जो
जन्नत में जाएगा उसके बारे में सिर्फ एक
ही हदीस मिलती है जिस आदमी की रोजे की
हालत में इंतकाल हो वह सीधा जन्नत में
जाएगा उसकी अफता होजे कौसर की पानी और
जन्नत के फलों से होगी व कयामत तक के लिए
अजाबे कब्र से महफूज होगा सहाबा इकराम भी
रोजे की हालात में इस दुनिया से रुखसत
होने की ख्वाहिश का इजहार करते रहे जो
आदमी रोजे की हालत में इस दुनिया से रुखसत
हुआ उसके लिए ना ही रोज महेशर ना ही
हिसाबो किताब और ना ही कयामत की शक्तियां
होंगी वह आदमी पहले ही अल्लाह की जन्नत
में दाखिल होकर उसकी नेमतों से फैज आब हो
रहा होगा गोया अल्लाह अलाह ताला उसके
जन्नत में जाने का एहतमाम खुद करेंगे
हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का
फरमान है कि जिसको रमजान के एहतमाम के
वक्त मौत आई वह जन्नत में दाखिल होगा और
जिसे अल्फा के दिन यानी नौ जुल हज को हज
पर मौत आई वह भी जन्नत में दाखिल होगा और
जिसकी मौत सदका देने की हालत में आई वह भी
जन्नत में दाखिल होगा रोजे की हालत में
फौत होने वाले के लिए एक और बहुत बड़ी
खुशखबरी है हजरत आयशा सादिका से रिवायत है
कि हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का
फरमान है कि जिसको रोजे की हालत में
इंतकाल हुआ उसको कयामत तक के रोजों का
सवाब मिलता रहेगा अल्लाहू अकबर यह किस कदर
खुश बख्ती की अलामत है हुजूर अकरम
सल्लल्लाहु अलैहि सल्लम ने फिर फरमाया यह
रमजान तुम्हारे पास आ गया इसमें जन्नत के
दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के
दरवाजे को बंद कर दिए जाते हैं सयान को
कैद कर दिया जाता है महरूम है वह शख्स
जिसने रमजान को पाया और उसकी मगफिरत ना
हुई अगर उसकी रमजान में मगफिरत ना हुई तो
कब होगी हजरत अंस बिन मालक से रिवायत है
कि जब रमजान के महीने में मुर्दों से
अजाबे कब्र हटा लिया जाता है आप
सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया
जब माहे रमजान की पहली रात होती है
शैतानों और सरकस जिन्हो को बेड़ियां पहना
दी जाती है और जहन्नम के दरवाजे को बंद कर
दिए जाते हैं इनमें से कोई भी दरवाजा खोला
नहीं जाता एक और जगह आप सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम ने फरमाया पांच नमाज और एक जुम्मा
से लेकर दूसरा जुम्मा पढ़ना और एक रमजान
से लेकर दूसरे रमजान के रोजे रखना इनके
दरमियान वाक्य होने वाले गुनाहों के लिए
यह कुंवारा बन जाते हैं जब तक कि इंसान
गुनाह कबीरा ना करें एक दफा हुजूर अकरम
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मेंबर के एक
दर्जे पर आमीन कहा फिर दूसरे पर फिर तीसरे
पर आमीन कहा सहाबा इकराम ने पूछा या रसूल
अल्लाह यह क्या मामला था आप सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम ने फरमाया जिब्रील अमीन मेरे
पास आए इन्होंने कहा जिसने रमजान के रोजे
पाए वे बख्शा ना गया वह बदकिस्मत हो गया
मैंने कहा आमीन जब दूसरे दर्जे पर चढ़ा तो
इन्होंने कहा कि जिसके सामने आपका नाम
लिया जाए उसने दरूदे पाक ना पढ़ा वह भी
बदकिस्मत हो गया मैंने कहा आमीन फिर तीसरे
दर्जे पर चढ़ा तो इन्होंने कहा जिसने
मां-बाप या दोनों में से एक को बुढ़ापे
में पाया वह उनकी खिदमत करके जन्नत में ना
गया वह भी बदकिस्मत है मैंने कहा आमीन
हजरत अली रज अल्लाह ताला अन ने फरमाया कि
खाना खाते वक्त एक गलती मत करना ऐसा हजरत
अली रजि अल्लाह ताला अनहुक
फरमाया दोस्तों एक आदमी हजरत अली रजि
अल्लाह ताला अन्हू के पास आकर कहने लगा या
अली में रखी चीजों को भूल जाता हूं अगर
मैंने किसी से कोई बात की हो वह भी मुझे
याद नहीं रहती मेरी याददाश्त कमजोर है मैं
इस वजह से बहुत परेशान हूं हजरत अली रजी
अल्लाह ताला अन ने उस आदमी से
फरमाया मेरे भाई तुम्हारा चेहरा यह बता
रहा
तुम खाना ठंडा करके नहीं खाते तुम खाना
गर्म खाते हो मेरे भाई याद रखना जो आदमी
खाने को गर्म गर्म खाता है उसका दिमाग
कमजोर होना शुरू हो जाता है फिर वह
आहिस्ता आहिस्ता बातों को भूलने लगता है
वह तरह-तरह की दिमागी बीमारियों में मुकत
हो जाता है वह हजरत अली रजि अल्लाह ताला
अन से पूछने लगा या अली फिर बताओ मैं किस
तरह खाना खाऊं आप रजि अल्लाह ताला अन ने
ने फरमाया खाने को बैठकर खाया करो खाने को
आहिस्ता आहिस्ता चबा चबा कर खाया करो खाना
खाने से पहले पानी पिया करो खाना खाते
वक्त गैर जरूरी बातें ना किया करो खाना
खाते वक्त छोटे-छोटे नवाल करके मुंह में
डाला करो खाना खाने के बाद अल्लाह का
शुक्र अदा किया करो जो आदमी खाना खाने के
बाद अल्लाह का शुक्र अदा करता है वही खाना
उसके लिए शफा बन जाता है दोस्तों अब हम
बताते कि शादी की रात सोहर ने अपनी बीवी
को चार नसीहत कौन सी की उसने कहा मुझे
तुमसे मोहब्बत है इसलिए मैंने तुमसे शादी
की अगर किसी वजह से मुझसे गलती हो जाए तो
तुम मेरी गलती की वजह से सब्र कर लेना
मुझे ढोल की तरह ना बजाना बीवी ने कहा
इसका क्या मतलब है सोहर ने कहा कि मुझे
गुस्से के वक्त कोई जवाब ना देना मुझसे
राज की हर बात करना लेकिन लोगों के शिकवे
और शिकायतें ना करना दिल एक है या तो
इसमें मोहब्बत रह सकती है या फिर नफरत एक
वक्त में दोनों चीजें दिल में नहीं रह
सकती अगर मेरी कोई बात बुरी लगे तो दिल
में ना रखना हजरत अली रज्जी अल्लाह ताला
अन का उन घरों के बारे में क्या फरमान है
जिन घरों में रात के बर्तन नहीं धोए जाते
एक औरत हजरत अली रज्जी अल्लाह ताला अन के
पास आई और कहने लगी या अली मेरी वह कौन सी
आदत है जिसकी वजह से मेरी तकलीफ और
परेशानियां खत्म नहीं होती हजरत अली रजि
अल्लाह ताला अन ने फरमाया ए औरत तुम्हारी
एक आदत बहुत बुरी है इसकी वजह से तुम्हारी
परेशानियों में असाफा होता जा रहा है वह
यह है कि तुम रात के बर्तन वैसे ही छोड़
देती हो ए औरत याद रखना जिन घरों में रात
के बर्तन वैसे की पड़े होते हैं उन घरों
में शैतान बर्तनों की महक संगते हुए आते
हैं उन घरों के बर्तनों में बचा हुआ खाना
खाता है इस तरह उन घरों में परेशानियों का
सिलसिला शुरू हो जाता है उस घर के अपराध
आपस में लड़ने झगड़ने लगते हैं एक दूसरे
से नफरत करने लगते हैं इस तरह घर का सारा
सुकून तबाह बर्बाद हो जाता है हवा तीनों
हजरात अल्लाह ताला ने हजरत अली को बेशुमार
इल्म से नवाज

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