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शबे बारात की हकीकत क्या है || Is Raat hota kya hai || Islamic


shabe barat hota kya hai aur is Raat kya kya hota hai aur Allah tala kiska gunah bakhsh deta hai aur kaun jiyega kaun marega aur Allah tala kisko risk farmaye ga bahut hi aham video hai pura dekhiae 

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शबे बारात की हकीकत क्या है || Is Raat hota kya hai || Islamic

प्यारे दोस्तों एक ऐसी रात जिस रात के
अंदर इंसानी जिंदगियों के बारे में बहुत
अहम फैसले किए जाएंगे कौन मरेगा कौन जिएगा
और कौन इस दुनिया में एक नई जिंदगी की
शुरुआत करेगा और कौन इस दुनिया को छोड़कर
इस दुनिया को अलविदा कहेगा कौन गरीब से
अमीर बन जाएगा और किसकी जिंदगी का सवाल
शुरू होने वाला है और किन लोगों के नाम
मुर्दों लोगों के लिस्ट में लिख दिए
जाएंगे दोस्तों आज की इस वीडियो में हम
आपको बताएंगे कि शबे बरात की हकीकत क्या
है इस रात में ना आए अमल क्यों तब्दील
होते हैं और इस रात में इंसानों के और इस
रात में इंसानों के बारे में कौन-कौन से
अहम फैसले किए जाते हैं और अगर खुदाना
खस्ता हमारा नाम भी मुर्दों लोगों की
लिस्ट में लिख चुका हो तो हमें क्या करना
चाहिए इस रात कितने लोगों की मगफिरत की
जाती है और इस रात कौन से व बग बत लोग है
जिनकी मगफिरत नहीं की जाती है और हुजूर
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस रात
कौन-कौन से अमल करने को इरशाद फरमाया और
जरूरत के मुताबिक मुसलमान सबको शबे बारात
को किस तरह से गुजारना चाहिए दोस्तों इन
तमाम तार सवालात के जवाब हदीस की रोशनी
में आज की इस वीडियो में हम आपको बताएंगे
लिहाजा आपसे गुजारिश है कि हमारी इस
वीडियो को एकदम आखिर तक जरूर देखें
दोस्तों सुभानु उल मुअज्जम की 15वीं रात
को शबे बरात कहा जाता है शबे रात को कहते
हैं और बारात के माना है बड़ी होना
क्योंकि इस रात को मुसलमान तौबा करके और
अल्लाह तबारक व ताला के बारगाह में अपने
गुनाहों की माफी मांगा करते हैं और अल्लाह
तबारक व ताला की बारगाह में अपने गुनाहों
को छोड़ने का इकरार करते हैं तो अल्लाह
तबारक व ताला अपने रहमत के सदके बेशुमार
मुसलमानों को जहन्नुम से निजात देता है
इसलिए इस रात को शबे बरात कहते हैं हजरत
अता बिन यसा रजी अल्लाह हो ताला अन्हा
बयान फरमाते हैं कि लैलातुल कदर के बाद
शबे बरात की 15वीं रात सबसे अफजल रात है
दोस्तों आपको बताते चले कि शबे बरात
फरिश्तों के लिए अल्लाह तबारक व ताला ने
ईद का दिन मुकर्रर किया है जिस तरह कि
अल्लाह तबारक व ताला ने जमीन पर रहने वाले
इंसानों को दो ईद अता फरमाई इसी तरह
अल्लाह तबारक व ताला ने आसमान वालों के
लिए भी दो ईद मुकर्रर कर रखी है एक शबे
बारात और दूसरा शबे कदर इंसान क्योंकि यह
दोनों ईदे दिन में मनाते हैं जबकि फरिश्ते
यह दोनों ईदे रात को मनाते हैं अल्लाह
तबारक व ताला ने इन दोनों रातों को
फरिश्ते के लिए ईद इसलिए मुकर्रर किया
क्योंकि इंसान रात को सो जाता है जबक
फरिश्ते रात को सोते नहीं वह हर वक्त
अल्लाह तबारक व ताला की इबादत में मशरूम
रहते हैं दोस्तों शबे बरात के मुताबिक
अल्लाह तबारक व ताला कुरान पाक में इरशाद
फरमाया है कसम है उस रोशन किताब की बेशक
हमने उसे बरकत वाली रात में उतारा बेशक हम
दर सुनने वाले हैं इसमें बांट दिया जाता
है हर हिकमत वाला काम इस आयते करीमा के
तफसीर में मुफस्सिर लिखते हैं कि इस शब से
मुराद शबे कदर या शबे बारात है और हजरत
अक्रमा रजि अल्लाह हो ताला अन्हू जिगर
मुक्त सरीन बयान करते हैं कि लैलतुल कद्र
मुबारक से मुराद शबे बारात है दोस्तों इस
रात के अंदर उन तमाम लोगों की फेहरिस्ट
यानी लिस्ट तैयार की जाती है जो इस दुनिया
के अंदर जिंदा रहने वाले होंगे और जो इस
साल के अंदर मरने वाले होंगे जो हज करने
वाले होंगे इन तमाम लोगों के नाम इस
फेहरिस्त के अंदर लिख दिया जाता है यानी
कि इस लिस्ट के अंदर लिख दिए जाते हैं इस
लिस्ट में दर्ज होने वाले हर अहम की तामिल
में जर्रा बराबर भी कमी नहीं की जाती हजरत
आयशा सिद्दीक रजि अल्लाह हुू ताला अन्हा
बयान फरमा है कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु
अलैहि व आलीही वसल्लम ने इरशाद फरमाया
क्या तुम जानती हो कि शबे 15वीं शब में
क्या होता है तो हजरत आयशा रजि अल्लाह हु
ताला अन ने अर्ज किया या रसूल अल्लाह
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आप ही इरशाद फरमा
दीजिए तो नबी ए करीम सल्लल्लाहु ताला अलही
वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि आइंदा साल में
जितने भी पैदा होने वाले होते हैं वह इस
रात में लिख दिए जाते हैं और जितने लोग
आइंदा साल में मरने वाले होते हैं वह भी
इस रात में लिख दिए जाते हैं और इस रात
में लोगों के साल भर के अमाल उठाए जाते
हैं और इस रात में लोगों की रिस्क मुकर्रर
किया जाता है और रिस्क उतारा जाता है हजरत
अता बिन यासर रजि अल्लाह ताला अन्हो बयान
फरमाते हैं कि शाबान की 15वीं रात अल्लाह
तबारक ताला मलाक मौत को एक फेहरिस्त देकर
हुकुम फरमाता है कि जिन जिन लोगों के नाम
इस फेहरिस्त यानी लिस्ट में लिखे हैं उन
रूहों को आइंदा साल मुकर्रर वक्त पर यानी
तय किए गए वक्त पर कब्ज करना दोस्तों इस
रात में लोगों के जिंदगी और मौत का फैसला
हो चुका होता है जबकि लोगों के हालात यह
होते हैं कि वह अपनी दुनिया में मग्न होते
हैं कोई अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने के चक्कर
में लगा होता है तो कोई अपनी कोठी और
बंगला बनवाने की कोशिश में लगा रहता है तो
कोई अपनी शादियों की तैयारी में लगा होता
है जबकि वह यह नहीं जानता कि उसका नाम
मुर्दों लोगों की लिस्ट में लिखा जा चुका
है हजरत उस्मान बिन मोहम्मद रजि अल्लाह
ताला अनहर भी है कि सरव कायनात हजरत
मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
ने इरशाद फरमाया कि एक शाबान से दूसरी
शाबान तक लोगों की जिंदगी खत्म करने का
वक्त इस रात में लिखा जाता है यहां तक कि
इंसान शादी विवाह करता है और उसके बच्चे
पैदा होते हैं हालांकि उसका नाम मुर्दों
के फेहरिस्त में लिखा जा चुका होता है
दोस्तों शबे बारात की एक बहुत बड़ी
कि इस रात में अल्लाह तबारक व ताला
बेशुमार लोगों की बख्शीश फरमाता है जैसे
कि हजरत आयशा सिद्दीका रजि अल्लाह ताला
अन्हा बयान फरमा है कि एक रात मैंने हुजूर
अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपने पास
ना पाया तो मैं आपकी तलाश में निकली मैंने
देखा कि हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम जन्नतुल बकी में तशरीफ फरमाए हैं
और आप सल्लल्लाहु अलैहि वा आले वस ने
इरशाद फरमाया क्या तुम्हें यह खफा है कि
अल्लाह तबारक व ताला और उसका रसूल
तुम्हारे साथ ज्यादती करेंगे मैंने अर्ज
किया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वा
आलि वसल्लम मुझे यह ख्याल हुआ कि शायद आप
किसी दूसरी लिहा के पास तशरीफ ले गए हैं
तो हुजूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने
इरशाद फरमाया बेशक अल्लाह तबारक ताला
शाबान की 15वीं सब आसमानी दुनिया पर अपनी
शान के मुताबिक जलवा अगर होते हैं और
कबीलाई बोनो क्लब के बकरियों के बालों से
भी ज्यादा लोगों की मगफिरत फरमाता है हजरत
अबू बकर सिद्दीक रजि अल्लाह ताला अनहरिया
करते हैं कि हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि शाबान की 15वीं
शब में अल्लाह तबारक व ताला आसमानी दुनिया
पर अपनी शान के मुताबिक जलवा गर होते हैं
और इस शब में हर किसी की मगफिरत फरमा देता
है सिवाय उन लोगों के जो शिर्क करने वाले
हो और बुक्स रखने वाले हो और एक दूसरी
रिवायत में आता है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि अल्लाह
तबारक व ताला शाबान की 15वीं शब में अपने
रहमो करम से तमाम महकत को बख्शीश फरमा
देता है सिवाय उन लोगों के जो शिर्क करने
वाले हो और घिन्हा रखने वाला हो हजरत
अब्दुल्लाह बिन अमर बिन आस रजि अल्लाह
ताला अन से रिवायत है कि हुजूर अकरम
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया
कि शाबान की 15वीं रात में अल्लाह तबारक व
ताला अपने रहमत से दो लोगों के अलावा सब
लोगों की मदद फरमाता है एक वह शख्स जो कि
घिन्हा रखने वाला हो और दूसरा वह शख्स जो
किसी को नाहक कत्ल करने वाला हो
दोस्तों शबे बरात में फरिश्तों को बाजु
दिया जाता है और शबे बारात एक ऐसी रात है
जिसमें अल्लाह तबारक व ताला मुसलमान की
मगफिरत फरमाता है और दुआओं को कबूल करता
है जैसे कि हजरत उस्मान रजि अल्लाह ताला
अन रिवायत करते हैं कि हुजूर अकरम
सल्लल्लाहु अलैहि व आलीही वसल्लम ने इरशाद
फरमाया जब शाबान की 15वीं शब आता है तो
अल्लाह तबारक ताला की तरफ से ऐलान होता कि
है कोई मगफिरत तलब करने वाला है कि उसके
गुनाह बख्श दूं है कोई मुझसे माफी मांगने
वाला कि उसे अता करूं उस वक्त अल्लाह ताला
तबारक से जो कुछ मांगा जाए वह सब मिलता है
और वह सबकी दुआ को कबूल फरमाता है सिवाय
बदक औरत और मसार एक शख्स के हजरत अली रजि
अल्लाह अन से रिवायत है कि गैप बताने वाले
आका व मौला हजरत मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि
वा आलीही वसल्लम ने इरशाद फरमाया तो रात
को कयाम कर करो और दिन को रोजा रखो
क्योंकि गुरूब आफताब यानी सूरज डूबने के
वक्त से ही अल्लाह तबारक व ताला की रहमत
आसमान दुनिया पर नाजिल हो जाती है और
अल्लाह तबारक व ताला इरशाद फरमाता है कि
है कोई मगफिरत तलब करने वाला है मैं उसको
बख्श दूं है कोई रिस्क मांगने वाला मैं
उसको रिस्क दूं है कोई मुसीबत ज्यादा कि
मैं उसे मुसीबत से निजात दूं यह ऐलान टूल
बे फजर यानी सूरज निकलने के वक्त अल्लाह
तबारक ताला की तरफ से होता है दोस्तों
हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वा अलेही
वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि शाबान मेरा
महीना है और रमजान अल्लाह तबारक व ताला का
महीना है रिवायत में आता है कि हुजूर अकरम
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम माहे रमजान के
अलावा शाबान उल मुकर्रम में सबसे ज्यादा
रोजा रखा करते हैं और अल्लाह तबारक व ताला
की इबादत के लिए कब्र बस्ता हो जाते और
हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शाबान
मुबारक में बहुत ज्यादा अल्लाह तबारक व
ताला की इबादत किया करते और सहाबा इकराम
को इसकी टकली किया करते थे लेकिन अफसोस की
आज के दौर में लोग इस मुकद्दस रात को
आतिशबाजी की नजर कर देते हैं जिस रात में
अल्लाह तबारक व ताला से मगफिरत तलब करनी
चाहिए उस रात को आज के मुसलमान खर्च और
आतिशबाजी में गुजार देते हैं और अल्लाह
तबारक ताला को राजी करने के बजाय उल्टा इन
गुनाहों के अंदर मुक्ति होकर अल्लाह तबारक
व ताला की नाफरमान यां करने लगते हैं और
अल्लाह तबारक व ताला को नाराज कर बैठते
हैं दोस्तों इस रात के अंदर हमें कसरत से
अल्लाह तबारक व ताला की इबादत करनी चाहिए
और हमेशा हमेशा के लिए अपने गुनाहों से
तौबा करनी चाहिए क्योंकि हो सकता है कि
हमारा नाम भी उन लोगों के फेहरिस्त में
लिखा जा चुका हो जो इस साल मरने वाले हैं
हमें चाहिए कि हम अपने तमाम गुनाहों से
तौबा करें और अल्लाह तबारक व ताला की
बारगाह में अपने गुनाहों की माफी तलब करें
दोस्तों शबे बरात की रात को अल्लाह तबारक
व ताला के बारगाह में गुजारना चाहिए और शब
बेदारी करनी चाहिए जैसा कि सल्लल्लाहु
ताला अलैहि वसल्लम खुद भी शब बेदारी करते
और दूसरों को शब बेदारी करने की तकलील
फरमाते और अल्लाह तबारक व ताला की इबादत
करने की हुक्म फरमाते अल्लाह तबारक व ताला
से दुआ है कि हुजूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम के बताए हुए रास्ते पर चलने की
तौफीक अता फरमाए और हुजूर सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम की मोहब्बत के अंदर जीना
मरना नसीब फरमाए और इस रात के सदके अल्लाह
तबारक व ताला हमारी और तमाम मुसलमानों की
मगफिरत फरमाए आमीन दोस्तों उम्मीद करते
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अल्लाह हाफिज

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