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Posted by
Sameem khan
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औरत हो तो ऐसी || Hindi kahaniyan || moral stories || Islamic waqia
एक बादशाह अपने छत के ऊपर टहलने चला गया
टहलते टहलते उसकी नजर महल के नजदीक घर के
छत के ऊपर पड़ा जिस पर एक बहुत खूबसूरत
औरत कपड़े सुखा रही थी बादशाह ने अपनी एक
बंदी को बुलाकर पूछा यह बीवी किसकी है
बंदी ने बोला बादशाह सलामत आपके गुलाम
फिरोज की बीवी है बादशाह के ऊपर उस औरत के
हुसन और जमाल का नशा छा चुका था उसने
फिरोज को बुलवाया तो फिरोज हाजिर हुआ
बादशाह ने कहा फिरोज हमारा एक काम है
हमारा यह खत फना मूल के बादशाह तक पहुंचा
दो और इसका जवाब भी उनसे ले आना फिरोज उस
खत को लेकर घर वापस आ गया खत को अपने तकिए
के नीचे रखा और सफर का सामान तैयार किया
रात को घर में ठहरा और सुबह मंजिले मकसूद
पर निकल गया इस बात से बेखबर था कि बादशाह
ने उसके साथ क्या चाल चली है इधर धर फिरोज
जैसे ही नजरों से ओझल हुआ बादशाह चुपके से
फिरोज के घर पहुंचा और आहिस्ता से फिरोज
का दरवाजा खटखटाया फिरोज की बीवी ने पूछा
कौन है बादशाह ने कहा मैं बादशाह तुम्हारे
सोहर का मालिक हूं औरत ने दरवाजा खोला
बादशाह अंदर आकर बैठ गया फिरोज की बीवी ने
हैरान होकर कहा आज बादशाह सलामत हमारे
यहां गरीब खाने में बादशाह ने कहा
यहां मैं मेहमान बनकर आया हूं फिरोज की
बीवी ने बादशाह के मतलब को समझकर कहा मैं
अल्लाह की पन्हा चाहती हूं आपके इस तरह
आने से जिसमें मुझे कोई भलाई नजर नहीं आ
रही बादशाह ने गुस्से में आकर कहा ए लड़की
क्या कह रही हो तुम शायद तुम मुझे नहीं
पहचानती मैं बादशाह सलामत हूं तुम्हारे
सोहर का मालिक हूं फिरोज की बीवी ने कहा
बादशाह सलामत मैं जानती हूं कि आप ही
बादशाह हैं
लेकिन बड़े बुजुर्ग कह गए हैं कि शेर को
जितनी भी तेज भूख लगी हो लेकिन वह मुर्दार
खाना शुरू नहीं कर देता और कहां बादशाह
सलामत तुम उस कटोरे में पानी पीने आ गए हो
जिसमें तुम्हारे कुत्ते ने पानी पिया है
बादशाह ने उस औरत की बातों से बड़ा
शर्मिंदा हुआ और उसको छोड़कर वापस चला गया
लेकिन अपने जूते वहीं पर भूल गया यह सब तो
बादशाह की तरफ से हुआ फिरोज को आधे रास्ते
में याद आया कि जो खत बादशाह ने उ दिया था
वह खत तो घर में ही छोड़कर चला आया उसने
घोड़े को तेजी से वापस मोड़ा और अपने घर
के लिए रवाना हो गया फिरोज घर पहुंचा
तकियो के नीचे से खत निकालते वक्त उसकी
नजर पलंग के नीचे पड़े बादशाह के जूते के
ऊपर पड़ा जो वह जल्दी में भूल गया था
फिरोज का सर चकराने लगा और वह समझ गया कि
बादशाह ने उसे सफर पर इसलिए भेजा था ताकि
वह अपना मतलब पूरा कर सके फिरोज बिना कुछ
किसी को बता
चुपचाप घर से निकला खत लेकर वह चल पड़ा और
काम खत्म करने के बाद बादशाह के पास वापस
आया तो बादशाह ने इनाम के तौर पर उसे 100
टिनर दिए फिरोज टिनर लेकर बाजार गया औरतों
के इस्तेमाल के कीमती कपड़े और कुछ तोहफे
भी खरीदें घर पहुंचकर बीवी को सलाम किया
और कहां चलो तुम्हारे मायके चलते हैं बीवी
ने पूछा यह क्या है उसने कहा बादशाह ने
इनाम दिया है और मैं चाहता हूं तुम इस
पहनकर अपने घर वालों को भी दिखाओ बीवी ने
कहा जैसा आप चाहे बीवी तैयार हुई और अपने
सोहर के साथ अपने वालि दिन के घर रवाना हो
गई दामाद और बेटी और उनके लाए गए तोहफे को
देखकर वे लोग बहुत खुश हुए फिरोज बीवी को
छोड़कर वापस आ गया और एक महीना गुजर जाने
के बावजूद भी बीवी का हाल तक ना पूछा और
ना उसे वापस बुलाया फिर कुछ दिन बाद
उसके साले साहब उससे मिलने आए और उससे
पूछा फिरोज आप हमारे बहन और मुझसे नाराजगी
की वजह बताएं या तो फिर हम आपको काजी के
पास पेश करेंगे उसने कहा तुम चाहो तो कर
लो लेकिन मेरे जिम्मे में उसका कोई ऐसा हक
बाकी नहीं है कि मैं अदा ना किया हो वे
लोग अपना केस काजी के पास ले गए काजी ने
फिरोज को बुलवाया काजी उस वक्त बादशाह के
पास बैठा हुआ था लड़की के भाइयों ने कहा
अल्लाह बादशाह सलामत और काजी को कयूम टाइम
रखें काजी साहब हमने एक हरा भरा भाग दत
फलों से भरे हुए और साथ में मीठे पानी के
कुआं इस शख्स के हवाले में दिया था इस
शख्स ने हमारा बाग उजाड़ दिया सारे फल खा
लिए दत काट लिए और कुएं को खराब करके बंद
कर दिया काजी फिरोज की तरफ मुंह तो वज्जा
होकर
पूछा हां तो लड़के तुम क्या कहते हो इस
बारे में फिरोज ने कहा काजी साहब जो बाग
मुझे दिया गया था उसे उससे बेहतर हालों
में मैंने उसे वापस कर दिया है काजी ने
पूछा क्या इसने बाग तुम्हारे हवाले वैसे
हालत में दिया है जैसे तुमने दिया था हां
उन्होंने वैसे ही हालत में वापस किया है
लेकिन हम उससे बाग वापस करने की वजह पूछना
चाहते हैं काजी बोला हां फिरोज तुम क्या
कहना चाहते हो इस बारे में फिरोज ने कहा
काजी साहब मैं बाग किसी बुग या नफरत की
वजह से नहीं छोड़ा बल्कि इसलिए छोड़ा कि
एक दिन मैं बाग में आया तो उसमें मैंने
शेर के पंजों के निशान देखे और मुझे खौफ
हुआ कि शेर मुझे खा ना जाए इसलिए शेर के
बचने की वजह से मैंने बाग में जाना बंद कर
दिया बादशाह टेक लगाए यह सब सुन रहा था
उठकर खड़ा हो गया और कहा फिरोज अपने बाग
की तरफ अमन और सलामती से जाओ और ना डड़की
क्षम इसमें कोई शक नहीं की शेर तुम्हारे
बाग में आया था लेकिन वह वहां पर कुछ असर
छोड़ सका ना कोई पत्ता तोड़ सका और ना ही
कोई फल खा सका वह वहां पर थोड़ी देर ठहरा
और मायूस होकर लौट गया और अल्लाह की कसम
मैंने कभी भी तुम्हारे बाग के करीब लगे
दीवारों जैसी दीवारें नहीं देखी फिरोज
अपने घर लौट आया और अपने बीवी को भी वापस
ले लिया फिरोज और उसके सालों के अकल मंदी
थी कि उन्होंने सारा माजरा ही मिसाल से ही
सुलझा लिया ना तो काजी को पता चल सका और
ना दरबारियों को पता चल सका और ना किसी और
को आखिर माजरा क्या है कि किस बारे में
बात कर रहे हैं क्या खूब बेहतर है अपने
अहले हवाल की राजत छुपाना कि लोगों को पता
ना चल सके अपने घरों के भेद और घरों के
भेद किसी पर जाहिर ना होने दिया करें
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