नमाज़ों के नाम की वज्ह

फ़ज्र : फ़ज्र का मा’ना : “सुब्ह" है। चूंकि फज्र की नमाज़ सुबह के वक्त पढ़ी जाती है, इस लिये इस नमाज़ को फज्र की नमाज़ कहा जाता है 

ज़ोहर : ज़ोहर का एक माना है : "ज़हीरा" (या'नी दोपहर), चूंकि येह नमाज़ दोपहर के वक्त पढ़ी जाती है, इस लिये इसे ज़ोहर की नमाज़ कहा जाता है।

अस्र : अस्र का मा’ना : "दिन का आखिरी हिस्सा" चूंकि येह नमाज़ इसी वक़्त में अदा की जाती है इस लिये इस नमाज़ को अस्र की नमाज़ कहा जाता है।

मग़रिब : मग़रिब का माना सूरज गुरूब होने का वक्त है, चूंकि मरिब की नमाज़ सूरज के गुरूब होने के बाद अदा की जाती है इस लिये इस नमाज़ को मगरिब की नमाज़ कहा जाता है

इशा : इशा के लुग़वी माना : रात की इब्तिदाई तारीकी के हैं, 2 चूंकि येह नमाज़ अंधेरा हो जाने के बाद अदा की जाती है इस लिये इस नमाज़ को इशा की नमाज़ कहा जाता है।

Comments

Popular posts from this blog

15+ Darood Sharif

Noha Lyrics Saqqa e Haram Rakh Lena Bharam Lyrics Munajat Mola Abbas Noha Lyrics

Best naat Khwaab e Ghaflat mein soye hue momino lyrics