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Posted by
Sameem khan
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दावते इस्लामी के मक्तबतुल मदीना के तरजमे वाले कुरआन,
"कन्जुल ईमान मअ खजाइनुल इरफान" सफहा 647 पर पारह 18 सूरतुल अमिनून आयत नम्बर 115 में अल्लाह पाक का इर्शादे मुबारक है तो क्या यह समझते हो कि हम ने तुम्हें बेकार बनाया और तुम्हें हमारी तरफ फिरना नहीं ।
हज़रते अल्लामा मौलाना सय्यिद मुहम्मद नईमुद्दीन मुरादआबादी इस आयते करीमा के तहूत फ़रमाते हैं: और (क्या तुम्हें) आखिरत में जज़ा के लिये उठना नहीं ? बल्कि तुम्हें इबादत के लिये पैदा किया कि तुम पर इबादत लाज़िम करें और आखिरत में तुम हमारी तरफ लौट कर आओ तो तुम्हें तुम्हारे आमाल की जजा दें। (खजाइनुल इरफान)
प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयो !
हम सभी को अपनी ज़िन्दगी के हकीकी मक्सद के हुसूल के लिये हर दम कोशां रहना चाहिये, गुनाहों से बचना और सवाब के कामों को करते रहना चाहिये । दावते इस्लामी का चैनल देखते दिखाते रहिये कि अच्छी अच्छी निय्यतों के साथ दावते इस्लामी के चैनल के प्रोग्राम देखना और दूसरों को देखने की दावत देना भी बाइसे रिज़ाए रब्बुल अनाम और जन्नत में ले जाने वाला काम है। मौत की हर दम याद रखिये ! मौत दुल्हा को ऐन बारात से और दुल्हन को हजलए अरूसी में बिस्तरे राहत व मसर्रत से यक दम उचक लेती है।
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