आज भी ज़ैनब की आती है सदा भाई हुसैन
आज भी ज़ैनब की आती है सदा भाई हुसैन
तेरा चेहरा तेरी आंखें भूल कब पाई हुसैन
आज भी जैनब की आती है सदा भाई हुसैन
चलते नाक़े से गिराया खुद को जलती रेत पर
चलते नाक़े से गिराया खुद को जलती रेत पर
घुटनियों के बल मैं तेरी लाश पर आई हुसैन
आज भी ज़ैनब की आती है सदा भाई हुसैन
बस मैं घबराई थी खंज़र तुझ पे चलता देखकर
बस मैं घबराई थी खंज़र तुझ पे चलता देखकर
फिर किसी मुश्किल में घिर कर मैं ना घबराई हुसैन
कौन था जो मरने वालों में नहीं था खूबरु
कौन था जो मरने वालों में नहीं था खूबरु
भूलने बैठी तो किस-किस की ना याद आई हुसैन
बह रहे थे आंख से आंसू तेरी रुख़सत के वक़्त
बह रहे थे आंख से आंसू तेरी रुख़सत के वक़्त
फिर कोई आंसू ना टपका आंख पथराई हुसैन
दूर उफ़तादा सफ़र से लौटकर मैंने नवीद
ठंडा पानी जब पिया बस तेरी याद आई हुसैन
ठंडा पानी जब पिया बस तेरी याद आई हुसैन
आज भी जैनब की आती है सदा भाई हुसैन
आज भी जैनब की आती है सदा भाई हुसैन
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