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Posted by
Sameem khan
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हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के कितने बेटे थे ? family members of prophet moha.
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https://naatandnohaylyrics.blogspot.com/?m=1
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम
हुजुर सहाब की वाक्य
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम
का पूरा वाक्य
प्यारे नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के कितने बेटे थे ? family members of prophet moha.
दोस्तों आज के वीडियो में हम आपको बताने
वाले हैं हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला
अलैहि वसल्लम के कितने बेटे थे और कितने
बेटियां थी और उनके क्या क्या नाम है इस
तरह की जानकारी ज्यादातर मुसलमानों को
नहीं होती है अगर कोई यह पूछ बैठे कि हजरत
मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम के
कितने बेटे और बेटियां हैं और अगर आपको
मालूम ना हो तो आप उन्हें क्या जवाब दोगे
ऐसे में क्या आप शर्म से पानी पानी नहीं
हो जाओगे और अगर आप इसका जवाब नहीं दे पाए
तो आप एकदम बेकार हो जाएंगे इसलिए प्यारे
दोस्तों आज का वीडियो आपके लिए बहुत ही
खास है क्योंकि आज के इस वीडियो में हम
आपको सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम के
बेटे और बेटियों के बारे में जानकारी देने
वाले हैं इसलिए इस वीडियो को एकदम आखिर तक
जरूर देखें अगर आपको हुजूर सल्लल्लाहु
ताला अलैहि वसल्लम से सच्ची मोहब्बत है तो
इस वीडियो को पूरा देखिए और अपने भाइयों
को अपने दोस्तों में शेयर भी कर दें ताकि
ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह जानकारी
पहुंच जाए तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं
आज की वीडियो हम पहले तो आपको हजरत
मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम के
बेटियों के बारे में बताते हैं यानी कि आप
सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम की कितनी
बेटियां हैं और उनके क्या-क्या नाम है
उसके बाद में आपको उनके बेटों की बारे में
बताएंगे प्यारे दोस्तों अल्लाह के पैगंबर
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि
वसल्लम की चार बेटियां थी और वह सभी की
सभी बेटियां हजरत खदीजा रजि अल्लाह ताला
अन्हा से थी पहली बेटी हजरत जैनब रजी
अल्लाह ताला अन्हा दोस्तों अल्लाह के नबी
हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु ताला
अलैहि वसल्लम की सबसे बड़ी बेटी हजरत जैनब
थी हजरत जैनब जब पैदा हुई उस वक्त आप
सल्ला ला अलैहि वसल्लम की उम्र मुबारक 30
साल की थी हजरत जैनब की निकाह अपनी खाला
के बेटे अब्बू लाश के साथ हुआ था जैनब ने
अपनी इस्लाम अपनी मां के साथ कबूल किया
यानी कि वह अपनी मां हजरत खदीजा के साथ ही
इस्लाम में दाखिल हुई थी लेकिन उनके शौहर
अब्बू लाश अभी भी मक्का के काफिले के साथ
में थे इसीलिए वह पैगंबर हजरत मोहम्मद
सल्लल्लाहु ताला वसल्लम के साथ हिजरत करके
नहीं आ पाई जंग ए बदर में अब्बू लाश कैद
होकर आए जब वह रिहा हुए उसी वक्त वह हजरत
मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम से
यह कह गए थे कि वह हजरत जैनब को हिजरत की
इजाजत भी देंगे इस वजह से हजरत जैनब मदीना
जाने को तैयार हुई लेकिन हर बार हर बार
बीन असव ने एक नेजा तानकर मारा जिससे हजरत
जैनब नीचे गिरी और उनका हमल साबित हो गया
यानी कि उनका हमल खत्म हो गया लेकिन वह
किसी तरह मदीना अपने वालिद नबीए करीम
सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम की खिदमत
में पहुंच गई और फिर उनका इंतकाल आठ हिजरी
में हुआ हजरत जैनब ने अपने पीछे एक बेटी
हजरत हुन मामा को छोड़ दिया था और अब्बू
आश जब मुसलमान नहीं हुए थे तब काफिरों ने
उन्हें इस बात पर बहुत उकसाया था कि वह
हजरत जैनब को तलाक दे दे लेकिन उन्होंने
इंकार कर दिया
और फिर सैयदीना हजरत जैनब के महीना जाने
के कुछ दिनों के बाद वह भी मुसलमान हो गए
थे दूसरी बेटी हजरत रुकैया हजरत मोहम्मद
सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम की दूसरी
बेटी रुकैया थी प्यारे दोस्तों हजरत
रुकैया रद अल्लाह ताला अन्हा की पैदाइश उस
वक्त हुई जब हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला
अलैहि वसल्लम की उम्र मुबारक 33 साल की थी
हजरत रुकैया का निकाह मक्का में हजरत उस
उमान बिन अफान के साथ हुआ था जब मक्का के
काफिर ईमान वालों को तकलीफ देने और उन पर
जुल्म करने के हद पार कर रहे थे तब दोनों
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि
वसल्लम की इजाजत से मुसलमानों के साथ हस
में रहने चले गए हस में अल्लाह ताला ने इन
जोड़े को एक बेटा अदा किया उन्होंने नाम
अब्दुल्ला रख दिया जब बदर की जंग हुई तब
हुजूर सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम बदर
की तरफ तशरीफ ले जा रहे थे उस वक्त हजरत
रुकैया बीमार थी उनकी तीमारदारी और देखभाल
करने के लिए उनके शौहर हजरत उस्मान को
मदीना में छोड़ गए थे इसलिए हजरत उस्मान
लड़ाई में शामिल नहीं हो पाए लेकिन इसी
बीमारी में हजरत रुकिया का इंतकाल हो गया
जिस वक्त हजरत जैद बिन हरीज जीत की खुशी
लेकर मदीना आए थे उस वक्त हजरत रुकैया को
दफन किया जा रहा था उनके बेटे बेटे
अब्दुल्लाह उनकी मां के बाद दो सालों तक
जिंदा रहे उनकी उम्र 6 साल की थी कि उनका
इंतकाल हो गया तीसरी बेटी उम्मे कुलसूम
रजि अल्लाह ताला अन्हा दोस्तों हजरत
मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम की
तीसरी बेटी थी उम्मे कुलसूम दोस्तों हजरत
रुकैया के इंतकाल के बाद अल्लाह के रसूल
सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने अपनी
दूसरी बेटी की शादी हजरत उस्मान रजी
अल्लाह ताला अन्हो के साथ तीन हिजरी में
की इसीलिए हजरत उस्मान रजि अल्लाह ताला अन
को दोनों वाला कहा जाता है क्योंकि उनके
निकाह में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु ताला
अलैहि वसल्लम की दो बेटियां आई यह एक ऐसी
नेमत थी जो किसी दूसरे के पास नहीं थी
लेकिन नव हिजरी में उम्मे कुलसुम का भी
इंतकाल हो गया उनके कोई बच्चे नहीं थे
उम्मे कुलसुम को हजरत रुकिया के यानी उनकी
बहन के ही बगल में दफन किया गया था चौथी
बेटी सैयदा फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि
वसल्लम की चौथी बेटी थी हजरत फातिमा रजि
अल्लाह ताला अन्हा हजरत फातिमा का निकाह
बदर के वाक्य के बाद बोहत के वाक्य से
पहले अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु ताला
अलैहि वसल्लम हजरत अली रजि अल्लाह ताला
अन्हो के साथ करा दी हजरत फातिमा रजि
अल्लाह ताला अन्हा की पांच औलाद हुई नंबर
एक हजरत हसन नंबर दो हजरत हुसैन नंबर तीन
हजरत मोहसीन नंबर चार उम्मे कुलसूम और
नंबर पांच हजरत जैनब मेरे दोस्तों सिवाय
हजरत फातिमा रजि अल्लाह ताला अन्हा के
किसी और साहबजादे से पैगंबर हजरत अल्लाह
ताला अलैहि वसल्लम की यह चार बेटियां थी
जब आपको मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला अलैहि
वसल्लम के बेटों के बारे में बताते हैं
यानी कि आपके कितने बेटे थे और उनके क्या
क्या नाम है नंबर एक सबसे पहले बेटे थे
हजरत कासिम दोस्तों पैगंबर हजरत मोहम्मद
सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम के सबसे
बड़े बेटे का नाम काशिम था जो हजरत खदीजा
से थे जब वह पांव पर चलना सीख गए थे और दो
साल के थे तभी उनका इंतकाल हो गया नंबर दो
दूसरे बेटे थे अब्दुल्लाह दोस्तों हजरत
मोहम्मद सल्लल्लाहु ताला वसल्लम के दूसरे
बेटे को नाम अब्दुल्लाह था हजरत
अब्दुल्लाह को तैयब और ताहिर का नाम भी
दिया गया था उनकी पैदाइश मक्का में हुई थी
और मक्का में उनकी वफात हुई इनका जब वफात
हुई तो काफिर यह समझ रहे थे कि बेटा नहीं
बचा तब मोहम्मद का नाम लेने वाला कोई नहीं
रहेगा तो दोस्तों इसी बात के ऊपर सरय कोशर
अल्लाह ताला ने नाजिल की थी हालांकि उन
काफिरों को अपनी औलाद पर गुरूर था उन्हीं
का आज कोई नाम लेवा नहीं है और हमारे नबीए
करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नाम लेवा
आज किसी से छुपे नहीं हैं प्यारे दोस्तों
हजरत मोहम्मद सल्लल्लाह ताला अलैहि वसल्लम
के तीसरे बेटे थे हजरत इब्राहिम वह भी चंद
सालों तक जिंदा रहे आपका 17 या 18 महीने
में हिजरत के वक्त ही इंतकाल हो गया
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु ताला वसल्लम
अपने छोटे बेटे की मौत पर बहुत दुखी थे जब
हजरत इब्राहिम का इंतकाल हुआ अल्लाह के
रसूल सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम ने कहा
हकीकत में यह आंखें आंसू बहाती हैं और यह
दिल दुखी है लेकिन जुबान से हम ऐसा कुछ
नहीं कहते हैं जो हमारे अल्लाह को नाराज
करता है हकीकत हम तुम्हारी जुदाई में दुखी
है इसका हवाला है बुखारी
शरीफ प्यारे दोस्तों अगर हम अल्लाह के नबी
हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु ताला
अलैहि वसल्लम की जिंदगी पर एक नजर डालें
तो हमें सीखने के लिए बहुत सारे सबक
मिलेंगे हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु
ताला अलैहि वसल्लम को अल्लाह ताला ने बेटे
और बेटियां दिए लेकिन अल्लाह ने बच्चों को
एक-एक करके अपने पास बुला लिया और इससे
पहले अल्लाह के नबी के मां-बाप दादा चाचा
और उन्हें भी एकएक करके सबको बुला लिया जब
आप सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम को उनकी
जरूरत थी एक के बाद एक गमों का सिलसिला
पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु
ताला अलैहि वसल्लम पर पड़ता गया आप
सल्लल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम की जिंदगी
पूरे इंसानियत के लिए एक नमूना थी इसीलिए
अल्लाह को सामने रखते हुए आपने सब्र किया
और पूरी दुनिया को यह दिया कि अगर कोई
मुसीबत तुम पर पड़े तो उस पर सब्र कैसे
करना है दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको आज
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अल्लाह हाफिज
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